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लालू भी आ गए, 15 दिन भी बीता पर कार्रवाई नहीं; नीतीश के खिलाफ बागी सुधाकर पर अब तक एक्शन क्यों नहीं?

सुधाकर सिंह अक्टूबर 2022 से ही बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं. राजद कई दफे कह चुका है कि उन पर कार्रवाई होगी, लेकिन अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है. आखिर क्या वजह है?

बिहार कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद से ही सुधाकर सिंह नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. लालू यादव को नेता बताने वाले सुधाकर सीएम नीतीश को झांसेबाज और शिखंडी बता चुके हैं. सुधाकर के बयान पर अब तक चुप्पी साधी जेडीयू भी आक्रामक मोड में आ गई है.

जवाबी हमला करते हुए जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार सिंह ने सुधाकर सिंह को 420 का आरोपी बताया है. कुमार ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जेल में बंद अपराधी अगर बढ़ते अपराध पर बोलने लगे, तो ये ताज्जुब ही है. 

2024 की तैयारी में जुटी महागठबंधन के लिए सुधाकर का बयान बार-बार परेशानियां बढ़ाने का काम कर रही है. आरजेडी हाईकमान कई बार सुधाकर पर कार्रवाई करने की बात कह चुका है, लेकिन लंबे अरसे बाद भी सुधाकर पर कार्रवाई नहीं हुई है.

लेटर बम फूटने से महागठबंधन में हड़कंप
सीएम नीतीश पर बयानबाजी के बीच सुधाकर सिंह ने एक ओपन चिट्ठी लिखी है. सुधाकर ने चिट्ठी में कहा है कि नीतीश कुमार गफलत से बाहर आएं. उन्होंने आगे कहा कि सभी तार्किक सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री एक ही घिसा-पिटा जवाब देते हैं कि सामने वाले को कुछ पता ही नहीं हैं. 

नीतीश को संबोधित करते हुए सुधाकर ने कहा कि आप हमेशा कहते हैं कि जनता ही मालिक है, तो अगले चुनाव में किसी सीट से उम्मीदवार बन जाइए. जनता फिर वोट के जरिए बता देगी कि आप पर से कैसे उनका विश्वास उठ गया है.

नीतीश कुमार से क्यों खफा हैं सुधाकर?
अगस्त में नीतीश कैबिनेट विस्तार में आरजेडी कोटे से सुधाकर सिंह को कृषि मंत्री बनाया गया. मंत्री बनने के एक महीने बाद ही सुधाकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने लगे. कृषि मंत्रालय को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया, जिसके बाद एक मीटिंग में नीतीश ने उन्हें टोका. 

सुधाकर मीटिंग में ही नीतीश के खिलाफ भड़क गए और यहां तक कह दिया कि मैं इस्तीफा भिजवा दूंगा. सरकार में विवाद को देखते हुए लालू यादव ने सुधाकर से इस्तीफा देने के लिए कहा, जिसे सुधाकर ने पिता जगदानंद के जरिए भिजवाया था. 

नाराजगी की मूल वजह विभागीय नीति और अधिकारियों का ट्रांसफर-पोस्टिंग था. सुधाकर कृषि विभाग के मुख्य सचिव को हटाना चाहते थे, जिसे नीतीश कुमार ने मानने से इनकार कर दिया. सुधाकर ने सरकार को कृषि रोडमैप बनाने का सुझाव दिया. 

बयान देने को लेकर आरजेडी में बना है गाइड लाइन
अगस्त में जब महागठबंधन की सरकार बनी तो सभी पार्टियों ने एक साझा गाइड लाइन बनाया, जिसके तहत शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ कोई नेता बयान नहीं दे सकेगा. आरजेडी ने इसे राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी पास कराया. 

आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने शीर्ष नेतृत्व को लेकर बयान देने का अधिकार लालू यादव और तेजस्वी यादव को दिया. यानी गठबंधन समेत तमाम मुद्दे पर आरजेडी में सिर्फ लालू यादव और तेजस्वी यादव ही बयान दे सकते हैं.

सुधाकर को नोटिस, लालू यादव के आने पर कार्रवाई की बात
सुधाकर सिंह की ओर से नीतीश कुमार के खिलाफ लगातार बयान देने की वजह से आरजेडी की खूब किरकिरी हुई, जिसके बाद 18 जनवरी को आरजेडी ने सुधाकर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी के लेटरपैड से जारी नोटिस में 14 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया था. 

नोटिस भेजे जाने के बाद तेजस्वी यादव ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि 15 दिन का वक्त पार्टी ने दिया है. उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी, लेकिन 30 दिन बीत जाने के बाद भी आरजेडी ने सुधाकर पर कोई एक्शन नहीं लिया है. पार्टी में अनुशासन से जुड़े मामलों में कार्रवाई का अधिकार लालू यादव के पास है.

सिंगापुर से लालू यादव के आए हुए भी करीब एक हफ्ते का समय बीत चुका है. दिल्ली आने के बाद लालू बेटे और बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी से भी मुलाकात कर चुके हैं. 

सुधाकर को नहीं हटाने को लेकर उठ चुका है सवाल
सुधाकर सिंह पर अब तक कार्रवाई नहीं होने को लेकर जदयू और बीजेपी के नेता सवाल भी उठा चुके हैं. जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने पिछले दिनों एक बयान में कहा था कि नीतीश कुमार को कोई गाली देगा, तो मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं. 

बीजेपी नेता सुशील मोदी भी कार्रवाई नहीं करने को लेकर सवाल उठा चुके हैं. सुशील मोदी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से सुधाकर सिंह बोल रहे हैं, अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह सब लालू यादव और तेजस्वी यादव के इशारों पर हो रहा है.

कार्रवाई की बात पर एक्शन क्यों नहीं ले रहा हाईकमान
सुधाकर सिंह पर कार्रवाई की बात लंबे वक्त से हो रही है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह को...

1. जगदानंद सिंह का बेटा होने बड़ी वजह- सुधाकर आरजेडी के दिग्गज और संस्थापक नेता जगदानंद सिंह के बेटे हैं. 2022 में लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने जगदानंद सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला था, उस वक्त आरजेडी ने तेज प्रताप पर कोई कार्रवाई नहीं की थी. 

तेज प्रताप ने खुद की पार्टी भी बना ली थी, जिसके बाद आरजेडी की प्रदेश इकाई ने कार्रवाई की सिफारिश लालू यादव से की थी. आरजेडी सूत्रों के मुताबिक तेज प्रताप पर कार्रवाई नहीं करने वाले लालू यादव अगर सुधाकर पर कार्रवाई करेंगे तो गलत मैसेज जाएगा.

अक्टूबर 2022 में जब सुधाकर सिंह ने नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा दिया था तो उस वक्त जगदानंद सिंह ने इसे कुर्बानी बताया था. ऐसे में माना जा रहा है कि जगदानंद भी बेटे के सपोर्ट में हैं.

राजपूत बिरादरी से होना भी सुधाकर के लिए एक मजबूत पक्ष है. मुस्लिम और यादव के बाद राजपूत वोट बैंक आरजेडी के साथ मजबूती से जुड़ा रहा है. 2009 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट से 4 नेता सांसद बने थे, जिसमें 3 राजपूत थे. 

वर्तमान में आरजेडी के पास जगदानंद सिंह के अलावा कोई बड़ा चेहरा राजपूत बिरादरी से नहीं है. ऐसे में सुधाकर पर कार्रवाई कर अपने कोर वोटरों से पार्टी नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी.

2. कार्रवाई के बाद तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं- अगर आरजेडी सुधाकर सिंह पर कार्रवाई करती है तो उनकी सदस्यता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. सुधाकर रामगढ़ सीट से आरजेडी के विधायक हैं. तकनीकी तौर पर जब पार्टी विधायकों पर कार्रवाई करती है, तो उन पर दलबदल कानून लागू नहीं होता है.

वहीं कार्रवाई के बाद सुधाकर तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं. सुधाकर शुरू से ही नीतीश कुमार से गठबंधन के खिलाफ रहे हैं. ऐसे में 2020 में तेजस्वी की ओर से किए गए वादों को भी मुद्दा बना सकते हैं, जिस वजह से बीजेपी को आरजेडी को घेरना का मौका मिल सकता है.

सुधाकर अपने भाषणों की वजह से युवाओं में खासे-लोकप्रिय हैं. 2020 के चुनाव में सरकारी नौकरी और रोजगार बड़ा मुद्दा बना था. नई सरकार आने के बाद सरकारी नौकरी देने को लेकर ऐलान तो हुआ है, लेकिन धरातल पर इसका असर नहीं दिखा है.

आरजेडी को 2020 में युवाओं का वोट एकतरफा मिला था. ऐसे में अगर सुधाकर पर कार्रवाई होती है, तो सुधाकर युवाओं को फिर से नीतीश सरकार के खिलाफ गोलबंद कर सकते हैं, जिससे आरजेडी और तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ सकती है.

3. गठबंधन को लेकर नीतीश की क्रेडिबिलिटी भी वजह- पिछले 10 सालों में नीतीश कुमार 3 बार गठबंधन का पाला बदल चुके हैं. ऐसे में भविष्य में नीतीश क्या करेंगे, इसको लेकर भी उहापोह की स्थिति है.

यही वजह कि आरजेडी वेट एंड वाच की स्थिति अपना रही है. 25 फरवरी को पूर्णिया के सीमांचल में आरजेडी, जदयू और महागठबंधन दलों की बड़ी रैली प्रस्तावित है. ऐसे में आरजेडी रैली पर ज्यादा फोकस कर रही है. सुधाकर मुद्दे पर इसी के बाद कोई कार्रवाई हो सकती है.

आरजेडी सुधाकर पर कार्रवाई कर मामले को तवज्जो भी नहीं देना चाहती है, जिससे रैली की सफलता पर असर पड़े.

नीतीश के सब्र का बांध भी टूट रहा
सुधाकर सिंह के बयानों के तीर से घायल नीतीश कुमार के सब्र का बांध भी शुक्रवार को टूट गया. पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में नीतीश ने कहा कि उसे कुछ पता ही नहीं है. आप लोग झूठ का ही उसे नोटिस ले रहे हैं.

उन्होंने कहा कि पहले सुधाकर सिंह पढ़ाई कर लें और चीजों को जान लें. बिहार में कैसे कृषि क्षेत्र में पिछले 17 सालों से काम हो रहा है. सुधाकर सिंह पर नीतीश कुमार की यह पहली प्रतिक्रिया थी, जिसके बाद माना जा रहा है कि अब नीतीश भी एक्शन के मोड में हैं.

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