पटना: गर्दनीबाग में जुटे हजारों अतिथि शिक्षक, नियमितीकरण की मांग तेज, दो दिन चलेगा धरना
Bihar News: गर्दनीबाग में अतिथि शिक्षकों का दो दिवसीय धरना शुरू किया. इस प्रदर्शन में काफी संख्या में शिक्षक शामिल होंगे. शिक्षक सेवा सुरक्षा और 65 वर्ष तक सेवा की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे है.

पटना में आज (16 फरवरी) से बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू हो रहा है. जो कल (17 फरवरी) तक चलेगा. इस आंदोलन को लेकर शिक्षकों में भारी उत्साह और आक्रोश देखा जा रहा है. पूरे बिहार से सैकड़ों की संख्या में अतिथि शिक्षक पटना पहुंच रहे हैं, ताकि अपनी मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जा सके.
जानकारी के अनुसार, धरना-प्रदर्शन की शुरुआत सुबह 11 बजे से राजधानी के प्रसिद्ध धरना स्थल गर्दनीबाग में होगी. अतिथि शिक्षक लंबे समय से सेवा सुरक्षा, मानदेय, स्थायी व्यवस्था और सम्मानजनक भविष्य की मांग कर रहे हैं. यह दो दिवसीय धरना सरकार पर दबाव बनाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
विभिन्न विश्वविद्यालयों से हजारों अतिथि शिक्षक पहुंचेंगे पटना
बिहार राज्य विश्वविद्यालय अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ की ओर से धरना प्रदर्शन किया जाएगा. दो दिन तक चलने वाले धरना कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए सूबे के विभिन्न विश्वविद्यालयों से हजारों अतिथि शिक्षक पटना पहुंचेंगे. विधानमंडल का बजट सत्र चल रहा इस दौरान यह धरना कार्यक्रम शुरू हो रहा है. बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के अतिथि प्राध्यापक प्रोटेस्ट में शामिल होंगे. मांग बिहार राज्य के विभिन्न पारंपरिक विश्वविद्यालयों में कई वर्षों से कार्यरत अतिथि प्राध्यापकों को नियमित करने की है. मांग है कि अतिथि सहायक प्राध्यापकों का सेवा समायोजन सुनिश्चित किया जाए और सेवा 65 वर्षों तक या नियमितीकरण किया जाए.
संघ की बैठक में विभिन्न बिंदुओं पर हुई थी चर्चा
संघ की बैठक इसी महीने की शुरुआत में हुई थी. इसमें सभी अतिथि प्राध्यापक शामिल हुए थे. मीटिंग में मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गयी, जिसमें 16 और 17 फरवरी को गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम रखने का निर्णय लिया गया था. तय हुआ था कि बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के अतिथि प्राध्यापक बड़ी संख्या में शामिल होकर सरकार से आग्रह पूर्वक अपनी मांगें रखेंगे.
संघ के अनुसार सरकार विभिन्न स्तर के कॉन्ट्रैक्ट, अस्थाई शिक्षकों और कर्मचारियों को सेवा विस्तार और सुविधाएं दे चुकी है. लेकिन राज्य के पारंपरिक विश्वविद्यालय में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का सुध नहीं ले रही है. बिहार में हजारों की संख्या में अतिथि शिक्षक हैं.
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