Nature अपना केस खुद लड़ती है और फैसला भी खुद ही सुनाती है | Open Letter
Episode Description
जोशीमठ में जो हुआ है, पहली बार नहीं है है, हम इंसानों की गलती रही है और इसीलिए नेचर से माफ़ी मांग रही हूँ। abp live podcasts पर मैं मानसी हूँ आपके साथ लेकर के open letter
Dear Nature ,
किसी के दिल के साथ खिलवाड़ करना तो सेकंड नंबर पे आता है , सबसे ज़्यादा और पहले नंबर पे खिलवाड़ तो हमने तुम्हारे साथ किया है
environment को बचाने की बातें करने वाले ज़्यादातर लोग ac में और कार में बैठ के सोशल मैसेज देते हैं। sorry इस hypocrisy के लिए भी।
sorry की हम भूल गए की ईंट पत्थर सीमेंट के बने मकान की हम मरम्मत कर सकते हैं लेकिन धरती नहीं रही तो घर कहाँ बनाएंगे ?
अगर पेड़ हमें फ्री ऑक्सीजन की जगह फ्री wifi दे रहे होते तो उन्हें ज़्यादा काटने की जगह ज़्यादा से ज़्यादा उगा रहे होते। जिसने हमें बनाया है उसकी तो हम पूजा करते हैं लेकिन जो बनाया है उसकी बेकद्री करते हैं। sorry की तुम्हारा रास्ता काट कर हम खुद के लिए रास्ते बनाते चले गए ! पैसे न डूब जाएँ इसकी चिंता तो है , शहर अभी हमारा थोड़ी डूब रहा है तो चिंता क्यों करें? नेचर को हमने एटीएम मशीन बना रखा है जिससे हम ज़रूरतें लेते ही रहते हैं बिना ये सोचे की कब हमें देखना पड़ जाये This Atm is out of service !
दिल बहलाने के लिए ख़याल अच्छा है की मदर नेचर को menopause हो रहे हैं , कहीं cold wave, कहीं बाढ़ , कहीं heat wave , कहीं सूखा पर सुनो
खून करने के बाद अदालत आपको माफ़ी नहीं सिर्फ सज़ा देती है, और Nature अपना केस खुद लड़ती है और फैसला भी खुद ही सुनाती है।
सुनिए open letter, abp live podcasts पर मानसी के साथ























