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सूरज का महाविस्फोट! X Class Solar Flare से बढ़ी चिंता, क्या धरती पर पड़ेगा असर?

Solar Flare: सूरज पर 1 जुलाई की रात शक्तिशाली X Class सोलर फ्लेयर दर्ज किया गया, जिसकी पुष्टि रशियन एकेडमी ऑफ साइंसेज की सोलर लैबोरेट्री ने की है.

सूरज पर 1 जुलाई की रात एक शक्तिशाली X-Class सोलर फ्लेयर दर्ज किया गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह सबसे उच्च श्रेणी का सौर विस्फोट होता है और इसके प्रभावों पर दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं. इस घटना के बाद वैज्ञानिकों ने संभावित स्पेस वेदर को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है.

रूसी वैज्ञानिकों ने की पुष्टि

रशियन एकेडमी ऑफ साइंसेज की सोलर लैबोरेट्री ने पुष्टि की है कि यह X-Class सौर विस्फोट 1 जुलाई की रात करीब आधी रात के आसपास रिकॉर्ड किया गया. वैज्ञानिक सौर विस्फोटों को उनकी तीव्रता के आधार पर A, B, C, M और X श्रेणियों में बांटते हैं. इनमें X-Class सबसे शक्तिशाली श्रेणी मानी जाती है. हर अगली श्रेणी की तीव्रता पिछली श्रेणी से लगभग 10 गुना अधिक होती है.

क्या पड़ सकता है इसका असर?

वैज्ञानिकों के अनुसार बड़े सौर विस्फोटों के दौरान सूरज से अत्यधिक ऊर्जा और आवेशित कण अंतरिक्ष में निकलते हैं. यदि इनके साथ निकला कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पृथ्वी की ओर आता है और उसका प्रभाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र तक पहुंचता है, तो भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) पैदा हो सकता है.

ऐसी स्थिति में कुछ सैटेलाइट सेवाएं, रेडियो संचार, जीपीएस और हाई-फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकते हैं. कुछ मामलों में बिजली ग्रिड पर भी असर पड़ सकता है, हालांकि इसका प्रभाव सौर विस्फोट की दिशा और तीव्रता पर निर्भर करता है.

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30 जून को भी दर्ज हुए थे M-Class सौर विस्फोट

वैज्ञानिकों के अनुसार X-Class विस्फोट से एक दिन पहले यानी 30 जून को भी सूरज पर लगातार तीन M-Class सौर विस्फोट दर्ज किए गए थे. M-Class, X-Class के बाद दूसरी सबसे शक्तिशाली श्रेणी मानी जाती है. कम समय में लगातार बड़े सौर विस्फोट दर्ज होने से वैज्ञानिक सूरज की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं.

सूरज के भीतर की गतिविधियों पर भी शोध जारी

बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक सूरज के अंदर होने वाली तरंगों और कंपन पर भी अध्ययन कर रहे हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार सूरज के भीतर होने वाले ये कंपन उसके चुंबकीय क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों से जुड़े हो सकते हैं. इन्हीं गतिविधियों का असर अंतरिक्ष के मौसम पर भी पड़ता है. इस विषय पर अभी लगातार शोध जारी है.

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11 साल के सौर चक्र के चरम पर है सूरज

विशेषज्ञों के अनुसार सूरज इस समय अपने 11 वर्षीय सौर चक्र (Solar Cycle) के चरम चरण के करीब है. इस दौरान सूरज पर सौर धब्बों, सौर विस्फोटों और अन्य गतिविधियों में तेजी देखी जाती है. इसी कारण आने वाले समय में भी इस तरह की अंतरिक्षीय घटनाएं देखने को मिल सकती हैं.

वैज्ञानिक लगातार रख रहे हैं नजर

अंतरिक्ष एजेंसियां और वैज्ञानिक सूरज की गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संभावित प्रभाव का सही आकलन सौर कणों की दिशा, गति और पृथ्वी तक पहुंचने की स्थिति का विश्लेषण करने के बाद ही किया जा सकता है. फिलहाल दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.

आशुतोष प्रताप सिंह ABP न्यूज़ डिजिटल की न्यूज़ टीम का हिस्सा हैं. नेशनल और इंटरनेशनल खबरें करते हैं. ब्रेकिंग न्यूज पर फोकस रखते हैं. राजनीति, चुनाव, खेल, राष्ट्रीय घटनाक्रम और सामाजिक मुद्दों पर गहरी समझ रखते हैं. करीब 8 वर्षों का पत्रकारिता में अनुभव है. उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से ताल्लुक रखने वाले आशुतोष ने जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से रेडियो एवं टीवी जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है.

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