Xप्लेन: क्या वाकई होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान कंट्रोल खो रहा है? अब किसका कब्जा
Strait of Hormuz Control: होर्मुज स्ट्रेट ऐसे दौर में है, जहां ईरान का कंट्रोल कमजोर हुआ है, अमेरिका का कंट्रोल अधूरा है और सबसे बड़ी कीमत आम लोग चुका रहे हैं.

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रास्ता होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच जंग छिड़ी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका का इस स्ट्रेट पर 'पूरा कंट्रोल' है. वहीं, ईरान इस दावे को खारिज करता हुआ कह रहा है कि होर्मुज ईरानी इलाका है. इस बीच शिपिंग डेटा और समुद्री यातायात के आंकड़े कह रहे हैं कि ईरान का कंट्रोल कमजोर हुआ है. तो क्या अमेरिका को कंट्रोल मिल गया है या स्ट्रेट पर किसी का कंट्रोल नहीं बचा है...
क्या ईरान का कंट्रोल कमजोर हुआ?
शिपिंग डेटा कंपनी Kpler के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले 80% से ज्यादा जहाजों ने ओमानी रास्ता इस्तेमाल किया है. यह ओमानी रास्ता एक शिपिंग चैनल है, जिसका ईरान जोरदार विरोध करता है.
यह बदलाव बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि महज एक महीने पहले Kpler ने ओमानी रास्ता से लगभग शून्य शिपिंग दर्ज की थी. यानी कुछ ही हफ्तों में जहाजों का रूट पूरी तरह बदल गया है. Kpler के क्रूड ऑयल विश्लेषण प्रमुख हुमायूं फलकशाही ने कहा, 'ऐसा लगता है कि ईरान ने कम से कम आंशिक रूप से स्ट्रेट पर अपना कंट्रोल खो दिया है.'
मगर सिर्फ रूट बदलना ही नहीं, बल्कि कुल यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. युद्ध से पहले रोजाना करीब 130 से 140 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे.
- 12 अगस्त को सिर्फ 8 जहाज ही गुजरे.
- 15 अगस्त को 9 जहाज गुजरे.
- 16 अगस्त को सिर्फ 5 और 17 अगस्त को कोई भी जहाज नहीं गुजरा.
- 18 अगस्त को 6 कमोडिटी जहाज गुजरे.
- 19 अगस्त को 6 जहाज गुजरे.
Kpler के मुताबिक, 10-दिन का औसत सिर्फ 11 जहाज प्रतिदिन रह गया है.
ईरान की रणनीति: 'मच्छर बेड़ा' से लेकर टोल वसूली तक
ईरान ने होर्मुज पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए कई रणनीतियां अपनाई हैं. ईरान की नौसेना रणनीति छोटी, तेज और सस्ती नावों यानी 'मच्छर बेड़ा' पर निर्भर है. इनमें हजारों मिसाइल और अटैक बोट, साथ ही करीब 20 गादिर-कैटेगरी की मिनी-पनडुब्बियां शामिल हैं. स्पीडबोट, नौसैनिक खदानें, क्रूज-बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन ने ईरान की सामरिक घेराबंदी को मजबूत किया है.
ईरान ने उन जहाजों पर हमले भी किए हैं जो ओमानी रास्ता का इस्तेमाल कर रहे थे. युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में 54 घटनाओं में जहाजों को नुकसान पहुंचा है. 3 जहाज तबाह हो चुके हैं और 13 नजदीकी टक्कर की घटनाएं हुई हैं. 17 जून के बाद से जब ईरान और अमेरिका ने सुरक्षित रास्ता पर सहमति जताई थी, तब कम से कम 15 जहाजों पर हमले हुए.
ईरान ने स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की भी कोशिश की. 17 जून के MoU खत्म होने के बाद, सैद्धांतिक रूप से ईरान फिर से टोल वसूल सकता था. लेकिन Kpler के मुताबिक, ईरान टोल वसूलने में सफल नहीं हो पाया है. पिकरिंग एनर्जी पार्टनर्स के डैन पिकरिंग ने कहा, 'ईरान का टोल वसूलने का अनुरोध ऐसी चीज है जो ज्यादातर मिडिल ईस्ट के लोग नहीं करना चाहते और नहीं कर रहे हैं.'
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका MoU में तय की गई अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करता.' ईरान की मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, तेल प्रतिबंध हटाना और ईरान की फ्रीज संपत्तियों की रिहाई शामिल है.
अमेरिकी दावा: 'हमारा पूरा कंट्रोल है'
18 अगस्त को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक नक्शा पोस्ट किया, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को 'नया अमेरिकी क्षेत्र' लेबल किया गया. अमेरिका ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण नौसैनिक उपस्थिति बनाए रखी है. अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने पिछले हफ्ते कहा कि स्ट्रेट से और उसके आसपास तेल की कुल खेप लगभग 15 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी, जो युद्ध-पूर्व औसत 20 मिलियन बैरल के करीब है.
अमेरिकी नौसेना ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी भी लागू कर रही है. यह किसी भी जहाज को ईरानी बंदरगाहों पर जाने या वहां से आने से रोकती है.
क्या सच में होर्मुज पर कोई कंट्रोल है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सच्चाई यह है कि न तो ईरान का पूरा कंट्रोल है और न ही अमेरिका का. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, 'हकीकत ट्रंप की घोषणा से कहीं ज्यादा जटिल है.'
- ईरान की स्थिति: ईरान ने अपना कुछ कंट्रोल खो दिया है क्योंकि जहाज ओमानी रास्ता का इस्तेमाल कर रहे हैं और टोल नहीं दे रहे. हालांकि, ईरान अभी भी हमले करने के काबिल है. ईरान जहाजों के लिए खतरा बना हुआ है.
- अमेरिकी स्थिति: अमेरिका का नौसैनिक दबदबा है, लेकिन तेल का प्रवाह अभी भी युद्ध-पूर्व स्तर से काफी नीचे है.
पूर्व अमेरिकी प्रशांत कमान संयुक्त खुफिया केंद्र निदेशक कार्ल शस्टर ने कहा, 'बहुत कम मर्चेंट शिपिंग कंपनियां और उनके जहाज इस बात पर भरोसा करते हैं कि अमेरिका उनके सुरक्षित रास्ता को महफूज कर सकता है.'
क्या है होर्मुज स्ट्रेट और क्यों है इतना खास?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक समुद्री रास्ता है. यह दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा चोकप्वाइंट (चोक पॉइंट) है. युद्ध से पहले, इस रास्ते से रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स गुजरते थे. दुनिया के कुल तेल और LNG के कारोबार का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ता से होता था.
यह रास्ता सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों के तेल निर्यात के लिए जीवनरेखा है. अगर यह रास्ता बंद हो जाए या ब्लॉक हो, तो वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है. जो हो रहा है.























