दांतों में चिप से लेकर ट्रैफिक कैमरा हैकिंग तक! अमेरिका और इजरायल ने खामेनेई को कैसे मारा? इंटरनेट पर कहानियों की बाढ़
How Khamenei was Killed: रेडिट पर एक थ्रेड में दावा किया गया कि ईरान के जनरल और कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी मोसाद और सीआईए के लिए काम कर रहे थे.

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई तरह की थ्योरी सामने आ रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान के खिलाफ संयुक्त ऑपरेशन किया, जिसमें खामेनेई मारे गए. कहा जा रहा है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने उनकी लोकेशन ट्रैक की थी, लेकिन उन्हें कैसे खोजा गया- इस पर पुख्ता जानकारी कम है. इसी वजह से कई दावे और साजिश की कहानियां वायरल हो रही हैं.
ट्रंप और नेतन्याहू का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अलग-अलग बयानों में कहा कि यह कार्रवाई ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए की गई. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर खामेनेई को 'दुनिया के इतिहास का सबसे बुरा व्यक्ति' बताया. उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर साजिश की थ्योरी की बाढ़ आ गई.
‘टूथ फेयरी’ थ्योरी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने दावा किया कि मोसाद ने ईरान में डॉक्टर और दंत चिकित्सक के रूप में अपने एजेंट भेजे. आरोप है कि इन लोगों ने अहम सैन्य अधिकारियों के दांतों में इलाज के दौरान ट्रैकिंग चिप लगा दी. कुछ पोस्ट में यह भी कहा गया कि गैस्ट्रो डॉक्टरों ने भी इसी तरह के डिवाइस शरीर में लगाए. हालांकि, इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है.
करीबी दायरे में ‘जासूस’ की थ्योरी
रेडिट पर एक थ्रेड में दावा किया गया कि ईरान के जनरल और कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी मोसाद और सीआईए के लिए काम कर रहे थे. पोस्ट में कहा गया कि क़ानी हमले से ठीक पहले खामेनेई के घर पर थे और हमले से पहले वहां से निकल गए. कुछ खबरों में उनके मोसाद से संबंधों की जांच या गिरफ्तारी की बात भी कही गई, लेकिन यह दावा अभी तक पूरी तरह साबित नहीं हुआ है.
ट्रैफिक कैमरों की हैकिंग
सोशल मीडिया पर यह भी कहा गया कि इजरायल ने कई सालों से ईरान के ट्रैफिक कैमरे हैक कर रखे थे और इन्हीं से खामेनेई की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी. बाद में अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में इस दावे की पुष्टि की गई. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरे वर्षों से हैक थे और उनका डेटा तेल अवीव और दक्षिणी इजरायल के सर्वरों तक भेजा जा रहा था. एक खास कैमरा एंगल से यह भी पता चलता था कि बॉडीगार्ड अपनी गाड़ियां कहां खड़ी करते हैं और रोजमर्रा की गतिविधियां कैसी हैं.
प्रेयर ऐप ‘बादे सबा’ की हैकिंग
एक और दावा था कि इजरायल ने ईरान के लोकप्रिय प्रेयर टाइम ऐप ‘बादे सबा’ को हैक कर लिया. इस ऐप के 50 लाख से ज्यादा डाउनलोड बताए गए हैं. रॉयटर्स के अनुसार, इस ऐप पर 'हिसाब का समय आ गया है' जैसे संदेश दिखाए गए और सेना से हथियार छोड़ने की अपील की गई. ईरान की प्रमुख मीडिया वेबसाइट्स- IRNA, ISNA, Tabnak और Asr-e Iran को भी हैक किए जाने की पुष्टि हुई है. इसे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा बताया गया.
कौन सी थ्योरी सही, कौन नहीं
जहां ट्रैफिक कैमरों की हैकिंग और प्रेयर ऐप पर साइबर हमले की पुष्टि हो चुकी है, वहीं दांतों में चिप लगाने और करीबी अधिकारी के जासूस होने वाली थ्योरी अभी सिर्फ दावे ही मानी जा रही हैं. खामेनेई को कैसे ट्रैक किया गया, इस पर अभी भी पूरी और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
























