ईरान के नतांज परमाणु ठिकाने पर बड़ा अटैक, अमेरिका और इजरायल ने बरसाए बम
US-Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग 22वें दिन भी जारी है. शनिवार (21 मार्च) को तेहरान के सबसे अहम नतांज परमाणु केंद्र पर यूएस-इजरायल की ओर से बड़ा हमला किया गया.

पश्चिमी एशिया में छिड़ी जंग जारी है. आज (21 मार्च) को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सबसे अहम नतांज परमाणु केंद्र पर बड़ा हमला किया गया. ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी मिजान ने बताया, अमेरिका और इजरायल ने मिलकर यहां जबरदस्त बमबारी की है. हालांकि दावा किया गया कि इस अटैक में किसी भी तरह के रेडिएशन के रिसाव की खबर नहीं है. इस युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मच गई है.
पहले भी किया जा चुका अटैक
युद्ध के पहले सप्ताह में भी अमेरिका-इजरायल की ओर से ईरान के मुख्य परमाणु केंद्र नतांज पर हमला किया गया था. सैटेलाइट तस्वीरों में यहां कई इमारतें छतिग्रस्त नजर आई थीं. बता दें कि तेहारान से इस परमाणु संयंत्र की दूरी करीब 220 किलोमीटर है. जून 2025 में भी 12 दिनों के संघर्ष के दौरान इजरायल और अमेरिका ने इसको निशाना बनाया था.
3 और वॉरशिप तैनात कर रहा अमेरिका
अमेरिका-इजरायल की ओर से यह बड़ा हमला ऐसे समय में किया गया, जब एक दिन पहले ही यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप यह कह चुके हैं कि मिडिल ईस्ट में वह मिलिट्री ऑपरेशन को कम करने पर विचार कर रहा है, जबकि अमेरिका पश्चिम एशिया में तीन अतिरक्त युद्धपोतों और लगभग 2500 अतिरिक्त मरीन सैनिकों की तैनाती कर रहा है.
नवरोज के बीच हवाई हमले
शुक्रवार (20 मार्च) को इजरायल ने ईरान में नवरोज यानी फारसी नववर्ष मनाए जाने के बीच हवाई हमले किए, जबकि इजरायल ने एक दिन पहले ही ईरान के एक प्रमुख गैस क्षेत्र पर और हमले नहीं करने का वादा किया था.
ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस प्रतिष्ठानों पर हमले तेज कर दिए हैं. दुबई में शुक्रवार तड़के उस समय विस्फोट की जोरदार आवाज सुनाई दी, जब शहर के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम ने हमलों के दौरान गोलाबारी को नाकाम किया.
ईरान के 'साउथ पार्स' गैस क्षेत्र पर इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने भी कार्रवाई की. जिसके बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार देर रात कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर इजराइल अपतटीय गैस क्षेत्र पर फिलहाल कोई हमला नहीं करेगा. अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को युद्ध शुरू किए जाने के बाद, ईरान के कई शीर्ष नेता हवाई हमलों में मारे गए हैं और कहा जा रहा है कि देश की सैन्य क्षमताएं कमजोर हुई हैं.
Source: IOCL


























