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Xप्लेन: हूती हमलों में 13 लोगों के घायल होने के बाद सऊदी अरब के कई शहरों में इमरजेंसी अलर्ट

शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में कुछ नागरिकों के घायल होने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने स्थिति को संभालते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी और बाद में यह स्पष्ट किया कि तात्कालिक खतरा अब टल चुका है.

यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोही समूह ने सोमवार को दावा किया कि उसने दक्षिणी सऊदी अरब में किंग खालिद एयर बेस पर बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है. साथ ही, इस समूह ने लाल सागर शिपिंग रूट पर स्थित रणनीतिक द्वीपों पर भी अपना कब्ज़ा और दायरा काफी बढ़ा लिया है. हूती समूह के प्रवक्ता याह्या सारेई ने कहा कि खमीस मुशैत स्थित इस महत्वपूर्ण बेस पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों के ज़रिए सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, जिसमें एयरक्राफ्ट हैंगर, रडार, रनवे और गोला-बारूद डिपो मुख्य रूप से शामिल थे. समूह ने दावा किया कि इन सुनियोजित हमलों से बेस को भारी नुकसान पहुंचा है, हालांकि स्वतंत्र सूत्रों से नुकसान की इस सीमा की तुरंत पुष्टि नहीं हो सकी है.

इन हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में 13 नागरिकों के घायल होने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने स्थिति को संभालते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी और बाद में यह स्पष्ट किया कि तात्कालिक खतरा अब टल चुका है.

एहतियात के तौर पर, सऊदी अधिकारियों ने खमीस मुशैत, आभा, ताइफ, जेद्दा और जजान समेत कई प्रमुख दक्षिणी शहरों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया है. हूतियों का कहना है कि यह सैन्य ऑपरेशन पिछले पांच दिनों के दौरान यमन भर में सऊदी अरब द्वारा किए गए 300 से ज़्यादा हवाई हमलों के कड़े जवाब में किया गया था. समूह का दावा है कि सऊदी F-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों ने खमीस मुशैत और ताइफ एयरबेस से उड़ान भरकर ये हमले किए थे.

सऊदी अरब ने भी हूती ठिकानों पर अपनी बमबारी तेज की

सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती समूह के बीच एक बार फिर से भड़के इस भारी तनाव के बीच, सऊदी गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर अपनी बमबारी तेज कर दी है. हालांकि, हूती समूह द्वारा 300 से ज़्यादा हमलों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है. इसके बावजूद, हूती नेतृत्व ने खुली धमकी दी है कि यदि यमन पर हवाई हमले नहीं रोके गए, तो वे सऊदी अरब की सीमा के भीतर और अधिक आक्रामक हमले करेंगे.

उन्होंने चेतावनी दी है कि संघर्ष और बढ़ने की स्थिति में वे और भी बड़े और विनाशकारी हमलों से करारा जवाब देंगे. सोमवार का यह ताजा दावा पिछले हफ़्ते सऊदी अरब पर हुए एक अन्य बड़े हूती हमले के बाद सामने आया है, जिसमें समूह ने खमीस मुशैत और सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए मिसाइलों और ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था. सऊदी अधिकारियों ने बताया कि उन पिछले हमलों में कई लोग घायल हुए थे और तेल सुविधाओं में आग लग गई थी.

हूती विद्रोहियों का ग्रेटर हनिश और लेसर हनिश द्वीपों पर पूर्ण कब्ज़ा

इस सैन्य संघर्ष के बीच, यमन के लाल सागर तट पर हूती समूह की बढ़ती पकड़ वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा संकट बनती जा रही है. इसी दौरान, हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य' के पास स्थित द्वीपों पर अपना नियंत्रण काफ़ी मजबूत कर लिया है. 

यमन सरकार और हूती अधिकारियों ने सोमवार को पुष्टि की कि विद्रोहियों ने ग्रेटर हनिश और लेसर हनिश द्वीपों पर पूर्ण कब्ज़ा कर लिया है. ये दोनों सामरिक द्वीप जलडमरूमध्य से लगभग 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं. यह रणनीतिक कब्ज़ा तब हुआ जब इस समूह ने यमन के पश्चिमी तट पर तेज़ी से आगे बढ़ते हुए मोचा बंदरगाह और मय्युन द्वीप (जिसे पेरिम द्वीप के नाम से भी जाना जाता है) पर भी अधिकार जमा लिया था.

लाल सागर के मुहाने पर स्थित पेरिम द्वीप पर कब्जे के साथ-साथ हूतियों की इस नई सैन्य बढ़त ने सीधे तौर पर सऊदी अरब के तेल निर्यात और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भारी दबाव बढ़ा दिया है. इससे पहले हुए एक हवाई हमले के कारण सऊदी अरब की बेहद अहम 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' भी ठप हो गई थी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब ने 1980 के दशक में होर्मुज जलडमरूमध्य के एक सुरक्षित विकल्प के रूप में इस 1,200 किलोमीटर लंबी रणनीतिक पाइपलाइन का निर्माण किया था. अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापारियों के मुताबिक, अगर यह प्रमुख पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति  में 4 प्रतिशत तक की भारी कटौती हो सकती है. इस बड़े व्यवधान की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए सऊदी और यमनी संयुक्त वायु सेना ने मोचा पोर्ट के आसपास सक्रिय हूती ठिकानों पर हवाई हमले और बमबारी बेहद तेज कर दी है, फिर भी हूतियों ने लगभग पूरे पश्चिमी तट पर अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी है.

आखिर क्यों है सऊदी और हूतियों के बीच यह दुश्मनी?

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों (जिन्हें 'अंसार अल्लाह' भी कहा जाता है) के बीच की यह दुश्मनी मुख्य रूप से भू-राजनीतिक, धार्मिक और क्षेत्रीय वर्चस्व की एक लंबी लड़ाई का परिणाम है. यमन में शिया समुदाय की जैदी शाखा से ताल्लुक रखने वाले हूती विद्रोहियों को क्षेत्रीय शिया ताकत ईरान का खुला वैचारिक, वित्तीय और सैन्य समर्थन प्राप्त है, जिसे सऊदी अरब अपने लिए एक सीधा और बड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा मानता है.

सुन्नी बहुसंख्यक सऊदी अरब को इस बात का कड़ा डर रहता है कि उसकी दक्षिणी सीमा पर एक ईरान-समर्थित कट्टरपंथी शिया मिलिशिया का मजबूत होना उसकी अपनी आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभुत्व को चुनौती देगा. इसके अलावा, साल 2014-2015 में हूतियों द्वारा यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को उखाड़ कर राजधानी सना पर कब्जा करने के बाद, सऊदी अरब ने यमनी राष्ट्रपति की अपील पर एक सुन्नी अरब गठबंधन का नेतृत्व करते हुए हूतियों के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप शुरू कर दिया था.

तब से लेकर आज तक, यमन में सुस्थिर सरकार की बहाली और सऊदी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर दोनों पक्षों के बीच यह खूनी संघर्ष लगातार जारी है, जो अब लाल सागर के समुद्री मार्गों और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई लाइनों को भी अपनी चपेट में ले चुका है.

संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.

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