अमेरिका के सबसे ताकतवर न्यूक्लियर वॉरशिप गेराल्ड में लगी आग, लाल सागर में हुई घटना, जानें पूरा मामला
अमेरिका की नेवी ने दावा किया है कि आग युद्ध की वजह से नहीं लगी है. जहाज के प्रोपल्शन प्लांट को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है. एयरक्राफ्ट कैरियर फिलहाल सुचारू रूप से चालू है.

फारस की खाड़ी में चल रहे युद्ध के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां अमेरिका के सबसे खतरनाक और बड़े युद्धपोत एयरक्राफ्ट कैरियर (USS) गेराल्ड आर फोर्ड सीवी-78 में आग लग गई है. यह आग युद्धपोत के लाउंड्री में लगी है. लाल सागर में खड़ा यह युद्धपोत ईरान पर हमला करने के लिए एक बेस के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. यह परमाणु संपन्न युद्धपोत है.
इसको लेकर अमेरिका की नेवी ने दावा किया है कि आग युद्ध की वजह से नहीं लगी है. जहाज के प्रोपल्शन प्लांट को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है. एयरक्राफ्ट कैरियर फिलहाल सुचारू रूप से चालू है. इस हादसे में दो अमेरिकी सैनिकों के जलने की भी खबर है. फिलहाल उनका इलाज किया जा रहा है. हालत स्थिर बताई जा रही है.
On March 12, USS Gerald R. Ford (CVN 78) experienced a fire that originated in the ship’s main laundry spaces. The cause of the fire was not combat-related and is contained.
— U.S. Naval Forces Central Command/U.S. 5th Fleet (@US5thFleet) March 12, 2026
There is no damage to the ship’s propulsion plant, and the aircraft carrier remains fully operational.…
अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर क्या दी जानकारी?
अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान से युद्ध लड़ रहा है. इसका इस्तेमाल अमेरिका एयरबेस के तौर पर कर रहा है. अमेरिकी सेना ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा है कि 12 मार्च को यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN 78) में आग लग गई थी. यह आग युद्धपोत के मेन लॉन्ड्री में लगी. फिलहाल आग लगने की वजह का युद्ध से किसी तरह का कोई लेना देना नहीं है. आग पर काबू पा लिया गया है. जहाज के उस हिस्से को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है. एयरक्राफ्ट कैरियर चालू है. दो नाविक इस हादसे में घायल हुए हैं, उनका इलाज चल रहा है. इन्हें चोटें आई है. वे स्थिर हालत में हैं.
ukdefencejournal.org.uk के मुताबिक, बुधवार तक फोर्ड सऊदी अरब के लाल सागर के उत्तरी हिस्से में काम कर रहा था. फोर्ड और उसके तीन एस्कॉर्ट्स यूएसएस ग्रेट (DDG-72), USS बैनब्रिज (DDG-96) और यूएसएस विंस्टन एस चर्चिल (DDG-81) पिछले दिनों लाल सागर में तैनात किए गए हैं.
जानें इस युद्ध पोत के बारे में...
यह दुनिया का सबसे महंगा एयरक्राफ्ट कैरियर और अमेरिका की समुद्री ताकत है. यह अमेरिकी नौसेना का CVN-78 फोर्ड क्लास का पहला जहाज है. इसका नाम 38वें राष्ट्रपति गेराल्ड फोर्ड के नाम पर रखा गया है. इसकी लंबाई 333 मीटर है. इसका वजन 1 लाख टन है. यह न्यूक्लियर पावर्ड सुपर कैरियर है. इसमें दो ए1बी न्यूक्लियर रिएक्टर लगे हैं. इनके अलावा इनमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम लगे हैं. यह 90 से ज्यादा फाइटर जैट्स ले जा सकता है. इसकी अनुमानित लागत 13 अरब डॉलर है. अमेरिका ने इसे 2017 में दुनिया के सामने पेश किया था.
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Source: IOCL


























