सफेद चमगादड़ जैसा दिखने वाला B-21 बॉम्बर क्या है? इसके बिना चीन को मात नहीं दे पाएगा अमेरिका, चौंकाने वाला खुलासा
B-21 Bomber: अमेरिकी थिंकटैंक मिशेल इंस्टीट्यूट की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें अमेरिकी वायुसेना को चीन से कमजोर दिखाया गया है. अमेरिका को सबसे खतरनाक B-21 बॉम्बर बढ़ाने की जरूरत है.

अमेरिकी वायुसेना को चीन की बढ़ती सैन्य ताकत का मुकाबला करने के लिए कम से कम 200 नए B-21 Raider स्टेल्थ बॉम्बर बनाने की सख्त जरूरत है. यह मांग एक नई रिपोर्ट में की गई है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि मौजूदा संख्या बहुत कम है और चीन के साथ संभावित युद्ध, खासकर ताइवान पर हमले के मामले में अमेरिका की जीत के लिए बड़ी संख्या में एडवांस्ड बॉम्बर जरूरी हैं.
अमेरिकी थिंकटैंक रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
अमेरिकी समर्थित थिंकटैंक मिशेल इंस्टीट्यूट फॉर एयरोस्पेस स्टडीज की रिपोर्ट स्ट्रैटजिक ‘अटैक: मेनटेनिंग द एअर फोर्य कैपेसिटी टू डिनाय एनेमी सैंक्चुअरीज’ रिपोर्ट 9 फरवरी 2026 को जारी हुई, जिसे रिटायर्ड कर्नल मार्क ए. गुनजिंगर (USAF) और हीदर आर. पेनी ने लिखी है. इसमें मुख्य पॉइंट्स:
- अमेरिकी एयर फोर्स की मौजूदा बॉम्बर ताकत सिर्फ ‘रेड फोर्स’ (एक बार के हमले वाली) है, न कि ‘कैंपेन फोर्स’ (लंबे समय तक चलने वाले अभियान वाली). कोल्ड वॉर के बाद दशकों से फोर्स में कटौती और मॉडर्नाइजेशन में देरी से स्टेल्थ बॉम्बर बहुत कम हो गए हैं.
- चीन के साथ युद्ध में (जैसे ताइवान पर हमला) पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को मुख्य भूमि पर ‘सैंक्चुअरी’ (सुरक्षित ठिकाने) से हवाई और मिसाइल हमले करने से रोकना जरूरी है. रिपोर्ट कहती है कि ‘एक मजबूत हमला सबसे अच्छा बचाव है.‘ अमेरिकी रणनीति सिर्फ ताइवान पर कब्जा रोकने तक सीमित है, लेकिन संतुलित रणनीति में चीन के मिलिट्री लीडरशिप, कमांड एंड कंट्रोल, और लंबी दूरी की ताकतों पर स्ट्रेटेजिक हमले शामिल होने चाहिए.
- चीन की एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) नेटवर्क और भूगोल से उसके पास सुरक्षित ठिकाने बन जाते हैं, जहां से वह हाई-डेंसिटी थ्रेट्स लॉन्च कर सकता है. अमेरिका को इन सैंक्चुअरी को डिनाय करने के लिए लंबी दूरी के पेनेट्रेटिंग एयरपावर की जरूरत है.
लंबी दूरी के मिशन के लिए बना B-21 बॉम्बर
B-21 Raider छठी पीढ़ी का स्टेल्थ बॉम्बर है, जो रडार को चकमा देता है, लंबी दूरी के मिशन करता है, परमाणु हथियार ले जा सकता है और एडवांस्ड एयर डिफेंस को भेद सकता है. अमेरिका अभी कम से कम 100 B-21 बनाना चाहता है, जबकि नई रिपोर्ट की सिफारिश है कि 200 B-21 बॉम्बर बनाए जाएं. साथ ही मौजूदा 76 B-52 (अपग्रेडेड) को बनाए रखें. अगर B-52 रखे जाएं, तो 200 के लक्ष्य के लिए कुल 224 B-21 तक खरीदने पड़ सकते हैं. B-1 और B-2 को रिटायर न करें जब तक 100 B-21 ऑपरेशनल न हों.
मिशेल इंस्टीट्यूट्स की लिस्ट में और क्या सिफारिशें?
रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार से कहा काठी पीढ़ी के F-47 फाइटर जेट्स की संख्या 185 से बढ़ाकर 300 करें. कुल मिलाकर 500 से ज्यादा अगली पीढ़ी के फाइटर और बॉम्बर (B-21 + F-47) की जरूरत है, ताकि चीन में टारगेट पर ‘अंदर से बाहर’ हमला किया जा सके और PLA की मिसाइल क्षमताओं को खत्म किया जा सके. F-35 की संख्या भी बढ़ाएं.
इस रिपोर्ट का रणनीतिक महत्व कितना है?
200 B-21 ’वर्ल्ड वॉर III’ के लिए नहीं, बल्कि होल्ड बैक (रोकथाम), विश्वसनीय डिटरेंस और लंबे संघर्ष में एट्रिशन रिजर्व के लिए जरूरी हैं. B-21 और F-47 मिलकर दुश्मन के एयरस्पेस में घुसकर निर्णायक हमले करेंगे.
रिपोर्ट कहती है कि कम ताकत वाली फोर्स ‘पीस थ्रू स्ट्रेंथ’ नहीं बना सकती और डिटरेंस फेल होने पर जीत नहीं सकती. यह राष्ट्र का स्ट्रेटेजिक फैसला है, सिर्फ एयर फोर्स का नहीं. रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत है, कॉस्ट-पेर-इफेक्ट एनालिसिस करें और वॉरगेमिंग से फोर्स मिक्स तय करें.
यह रिपोर्ट अमेरिका-चीन तनाव के बीच आई है, जहां पेंटागन इंडो-पैसिफिक में अपनी ताकत बढ़ाने पर फोकस कर रहा है. हालांकि, ये सिफारिशें आधिकारिक नीति नहीं हैं, बल्कि थिंक टैंक की सलाह हैं, जो बजट, उत्पादन और रक्षा खर्च पर बड़ी बहस छेड़ सकती हैं. B-21 का प्रोडक्शन चल रहा है और पहला फ्लाइट टेस्ट हो चुका है, लेकिन संख्या बढ़ाने से लागत और समय दोनों बढ़ेंगे.
Source: IOCL

























