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Indonesia: सेहत संबंधी चिंताओं को दरकिनार कर इंडोनेशिया में तेजी से बढ़ रहा Dog Meat का कारोबार

Indonesia's Dog Meat: दुनिया में जानवरों के जरिए फैलने वाले वायरस जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है, इसके बावजूद इंडोनेशिया (Indonesia) में डॉग मीट के कारोबार में लगातार उछाल आ रहा है.

Indonesia's Dog Meat Business: पूरी दुनिया में जहां जानवरों के जरिए मंकीपॉक्स (Monkeypox), कोरोना (Corona), कांगो फीवर (Congo Fever) जैसे वायरसों से पैदा होने वाली बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. वहीं इंडोनिशया जैसे देश में कुत्ते के मांस (Dog Meat) यानी डॉग मीट का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है. यहां लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की जानवरों से इंसान में फैल रही वायरस जनित बीमारियों की चेतावनी को भी अनदेखा कर रहे हैं.

इंडोनेशिया में लोग अपनी सेहत संबंधी चिताओं को धत्ता बताते हुए जमकर डॉग मीट खा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक इंडोनेशिया की 270 मिलियन आबादी में से लगभग 7 फीसदी के डॉग मीट का सेवन करने का अनुमान है.

इंडोनेशियाई हैं डॉग मीट के शौकीन

डॉग मीट कारोबार के खिलाफ अभियान चलाने वाले एक समूह डॉग मीट फ्री इंडोनेशिया (Dog Meat Free Indonesia) के मुताबिक, यहां लगभग 7 फीसदी लोगों के कुत्ते के मांस खाने का अनुमान है. डॉग मीट के रेस्तरां पूरे मेडन (Medan) में मिलते हैं, जहां स्वदेशी बतक (Batak) लोग प्रोटीन के स्वाद के लिए इस मीट के शौकीन हैं.गौरतलब है कि इंडोनेशिया के 270 मिलियन लोगों में से 87 फीसदी मुस्लिम हैं और ये कुत्ते के उत्पादों को हराम या निषिद्ध मानती है. उनके लिए सूअर के मांस की तरह ही डॉग मीट भी हराम है. इंडोनेशिया की लगभग 9 फीसदी आबादी ईसाई है. यहां डॉग मीट खासकर अक्सर ईसाई बाहुल्य इलाकों में खाया जाता है. ये इलाके उत्तरी सुमात्रा, उत्तरी सुलावेसी और पूर्वी नुसा तेंगारा हैं.

पशु अधिकार समूह करते हैं बैन की मांग

इंडोनेशिया में पशु अधिकार समूह (Animal Rights Groups) डॉग मीट के कारोबार पर आपत्ति जताते हैं. इन समूहों का मानना है कि डॉग मीट को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, क्योंकि यह कारोबार क्रूरता को बढ़ावा देता है. इसके साथ ही रेबीज जैसी बीमारियों के प्रकोप को भी बढ़ाता है और पब्लिक हेल्थ के लिए खतरे पैदा करता है. उधर दूसरी तरफ डॉग मीट खाने वाले इंडोनेशियाई इस मीट को चिकन या बीफ खाने से अलग नहीं मानते हैं. पूर्वी नुसा तेंगारा के मोलो (Mollo) के रहने वाले एक लेखक और खाद्य कार्यकर्ता डिकी सेंडा (Dicky Senda) बताते हैं कि हाल के वर्षों में इस प्रांत में डॉग मीट के व्यापार में काफी उछाल आया है. यहां सुगंधित मसालों के मिश्रणों के साथ पकाए गए कैनाइन मीट बेचने वाली कुकरमुत्तों की तरह बढ़ आई दुकानें इसका सबूत हैं.

दिनों-दिन बढ़ती जा रही डॉग मीट की मांग

खाद्य कार्यकर्ता डिकी सेंडा बताते हैं कि पूर्वी नुसा तेंगारा में डॉग मीट के रेस्तरां की लोकप्रियता इस हद तक बढ़ गई है कि इस मीट के कारोबारियों को बढ़ती मांग की वजह से आपूर्ति में संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है. डॉग मीट रेस्तरां की आपूर्ति पूरी करने के लिए यहां कुत्तों को पोटेशियम युक्त भोजन में जहर देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. यह जहर जानवरों को बेहोश कर देता है, लेकिन मांस पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है. सेंडा ने कहा, "मैंने पिछले कुछ वर्षों में इस तरह से पांच या छह कुत्तों को खो दिया है." देश भर में डॉग मीट के लिए कुत्तों की निर्मम हत्या की रिपोर्टों को देखते हुए डॉग मीट फ्री इंडोनेशिया कई वर्षों से इस मांस पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार से कह रहा है. हालांकि कई स्थानीय सरकारों ने अपने आसपास के इलाकों में डॉग मीट की बिक्री को गैरकानूनी करार दिया है. इस समूह की कोशिशों से ही बीते साल पहला मुकदमा मध्य जावा (Central Java) के एक डॉग मीट व्यापारी चला. अदालत ने इस व्यापारी पर 10 महीने की जेल के साथ ही 10,000 डॉलर का जुर्माना लगाया गया था. 

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