हिंदी न्यूज़न्यूज़TRADE ALERT: डंपिंग-रोधी शुल्क नहीं लगाने की बड़ी कीमत चुका रहा भारत! रिपोर्ट में आए चौंकाने वाले खुलासे
TRADE ALERT: डंपिंग-रोधी शुल्क नहीं लगाने की बड़ी कीमत चुका रहा भारत! रिपोर्ट में आए चौंकाने वाले खुलासे
नई रिपोर्ट के अनुसार, सस्ते विदेशी आयात पर सख्ती नहीं होने से घरेलू उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि शुल्क लागू करने से विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है.
Written By : एबीपी लाइव | Edited By: Anshu Kumar Singh | Updated at : 26 May 2026 06:36 PM (IST)
डंपिंग-रोधी शुल्क नहीं लगाने की बड़ी कीमत चुका रहा भारत! रिपोर्ट में आए चौंकाने वाले खुलासे
Source : SOCIAL MEDIA
भारत अगर सस्ते विदेशी सामान पर डंपिंग-रोधी शुल्क लागू करे, तो हर साल करीब 28,540 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है. एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इन शुल्कों को लागू नहीं करने से देश के घरेलू उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है.
रिपोर्ट में बताया गया कि अभी कई ऐसे उत्पाद हैं जिन पर व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने डंपिंग-रोधी शुल्क लगाने की सिफारिश की है, लेकिन उन्हें अभी तक लागू नहीं किया गया. इसकी वजह से भारतीय कंपनियों को हर साल लगभग 11,938 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.
यह रिपोर्ट सी-डीईपी रिसर्च और सेंटर फॉर WTO स्टडीज ने तैयार की है. इसमें कहा गया है कि अगर सरकार इन शुल्कों को लागू कर देती है, तो घरेलू कंपनियां विदेशी आयात पर निर्भरता कम कर पाएंगी और देश में ही मांग पूरी की जा सकेगी. इससे विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी.
अध्ययन में 33 उत्पादों का विश्लेषण किया गया. इसमें सामने आया कि सस्ते आयात के कारण अभी करीब 1.54 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है. अनुमान है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो यह नुकसान 2030 तक बढ़कर 2.70 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
रिपोर्ट में रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई गई है. फिलहाल लगभग 24 हजार नौकरियों पर असर पड़ रहा है, और आने वाले वर्षों में यह संख्या बढ़कर 38 हजार से 42 हजार तक पहुंच सकती है.
डंपिंग-रोधी शुल्क ऐसे टैक्स होते हैं जिन्हें सरकारें घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए लगाती हैं. जब कोई विदेशी कंपनी अपने देश की तुलना में बेहद कम कीमत पर दूसरे देश में सामान बेचती है, तो उसे डंपिंग कहा जाता है. इससे स्थानीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पहले भारत में DGTR की ज्यादातर सिफारिशें लागू कर दी जाती थीं. वर्ष 2020 तक लगभग सभी मामलों में कार्रवाई होती थी, लेकिन हाल के समय में कई सिफारिशों को मंजूरी नहीं मिली. नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच बड़ी संख्या में प्रस्ताव खारिज किए गए.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डंपिंग-रोधी शुल्क समय पर लागू किए जाएं, तो इससे घरेलू उद्योग मजबूत होंगे, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
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