उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश सरकार के खिलाफ उपवास रख जताई नाराजगी, सामने रखी सात मांगे
कुशवाहा ने कहा कि कोटा में रह रहे छात्र परेशानी में हैं. लॉकडाउन में पुलिस की सख्ती ज़रूरी है लेकिन लॉकडाउन की आड़ में पुलिस ने इस तरह की कार्रवाई की है जिसको कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.

पटना: लॉकडाउन के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरएलएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने धरना प्रदर्शन कर नीतीश सरकार के प्रति विरोध दर्ज कराया. उपेंद्र कुशवाहा ने वैशाली ज़िले के महनार इलाके में अपने गांव के एक लाइब्रेरी को धरना का केंद्र बनाया. वह लाइब्रेरी के हॉल में अपने समर्थकों के साथ दो घण्टे तक बैठे. कुशवाहा ने इसे उपवास कार्यक्रम बताया. वह सुबह नौ बजे से ग्यारह बजे तक हॉल में बैठे रहे.
कुशवाहा ने कहा, '' इस उपवास का कारण है, लॉकडाउन की वजह से कुछ लोग भुखमरी के शिकार हो रहे हैं. दिहाड़ी मजदूर काम नहीं कर पा रहे हैं, जिसके चलते स्थिति बिगड़ रही है. सरकार का दावा है कि हम सबकी मदद कर रहे हैं लेकिन सरकार का दावा सच्चाई से परे है. सरकार की सच्चाई को लोगों के बीच लाने की ज़रूरत है. शासन प्रशासन के लोग जो कह रहे हैं उस आधार पर सरकार दावा कर रही है लेकिन सच्चाई इससे अलग है. लोग भुखमरी के शिकार हैं.''
कुशवाहा ने आगे कहा,'' कोटा में रह रहे छात्र परेशानी में हैं. लॉकडाउन में पुलिस की सख्ती ज़रूरी है लेकिन लॉकडाउन की आड़ में पुलिस ने इस तरह की कार्रवाई की है जिसको कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. किसान के फसलों की समय पर कटाई नहीं हुई, जिसके चलते उनको नुकसान हुआ है. उनकी भरपाई का मामला है. हम आंख बंद कर देखते रहें यह ठीक नहीं है इसलिए इन सवालों पर सरकार का ध्यान लाने की जरूरत है. इसी वजह से हमने लॉकडाउन का पालन करते हुए आज दो घंटे का उपवास रखा था.''
कुशवाहा ने अपनी सात सूत्री मांग रखी
1. सभी जरूरतमंदों को फिलहाल बिना राशनकार्ड (आधार कार्ड या मतदान पहचान पत्र के आधार पर) देखे राशन उपलब्ध हो.
2. नावकोठी (बेगूसराय), गोह (औरंगाबाद) एवं राज्य के अन्य कई हिस्सों में लॉकडाउन के नाम पर आमजनों के खिलाफ बर्बरतापूर्ण कदम उठाने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो एवं पीड़ित परिजनों को मुआवजे के साथ तीव्रता से न्याय मिले.
3. राज्य के बाहर फंसे बिहारी मजदूरों, विद्यार्थियों एवं अन्य लोगों की बिहार में वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाएं.
4. असमय वर्षा, आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और लॉकडाउन के कारण फसल कटाई में देरी के चलते किसानों की हुई क्षति की पूर्ति हो.
5. बिहार के सभी किसानों के कृषि उत्पाद यथा धान, गेहूं, दलहन और तिलहन की सरकारी खरीद समर्थन मूल्य पर नगद खरीदने की व्यवस्था हो.
6. बिहार में मजदूरों-कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पहल हो.
7. बिहार में आंदोलनरत शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होकर उनके बकाया वेतन का अविलंब भुगतान किया जाये.
























