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यूपी: जानिए कौन हैं ओम प्रकाश राजभर?, क्या है उनकी पार्टी का कद

ओपी राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के साथ आई थी.हाल के महीनों में राजभर कई मुद्दों पर योगी सरकार की ही खिंचाई करते रहे हैं.

नई दिल्ली: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव खत्म होते ही एक बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने अपने कैबिनेट से सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को बाहर कर दिया है. उन्होंने यूपी के राज्यपाल राम नाइक से पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांग जन कल्याण मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की सिफारिश की थी. इस सिफारिश को राज्यपाल ने मंजूर कर लिया. राजभर ने इस फैसले का स्वागत किया है. इन सबके बीच आइए जानते हैं कि कौन हैं राजभर और क्या है उनकी पार्टी का कद.. यूपी में बीजेपी की दो सहयोगी पार्टियां हैं. अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी. अपना दल के साथ बीजेपी के रिश्ते मीठे रहे हैं लेकिन भारतीय समाज पार्टी के संबंध बीजेपी से कभी मीठे तो कभी कड़वे रहे हैं. हम बात कर रहे हैं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की. यूपी के पूर्वांचल में पिछड़ों की इस पार्टी का क़रीब 40 विधानसभा सीटों पर दबदबा रहा है. हाल के महीनों में राजभर कई मुद्दों पर योगी सरकार की ही खिंचाई करते रहे हैं. उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि बीजेपी सरकार में भ्रष्टाचार और बढ़ गया है. ओपी राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के साथ आई थी. राजभर जाति का प्रभाव राजभर जाति के वोट बैंक की करें, तो पूर्वांचल में करीब-करीब हर सीट पर अपना प्रभाव रखता है. पूर्वांचल की मऊ, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, देवरिया, आजमगढ़, अंबेडकरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, सोनभद्र, मिर्जापुर सहित कई जिलों पर राजभर जाति के वोट बैंक का अच्छा पर्सेंटेज है. 2017 में इस समीकरण को समझते हुए बीजेपी ने ओम प्रकाश राजभर की पार्टी भारतीय समाज पार्टी के साथ विलय कर लिया था. लेकिन राजभर और बीजेपी के रिश्ते धीरे-धीरे तल्ख होले चले गए. राजभर को पूजते हैं समर्थक, बनाई है चालीसा देश में नेताओं को भगवान की तरह पूजने के नए चलन में अब उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का नाम भी जुड़ गया है. पार्टी समर्थकों ने दल के अध्यक्ष और सूबे के मंत्री ओमप्रकाश राजभर की ‘चालीसा‘ बना डाली है और उनकी पूजा करते हैं. बलिया के सुखपुरा थाना क्षेत्र स्थित राजभर बिरादरी के बाहुल्य वाले धर्मपुरा गांव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और प्रदेश के दिव्यांग जन सशक्तिकरण मंत्री ओम प्रकाश राजभर की तस्वीर उनके लगभग हर समर्थक के घर में टंगी हुई है. राजभर के समर्थक ‘ओमप्रकाश चालीसा’ पढ़कर उनकी पूजा करते हैं. वे धर्मपुरा गांव स्थित काली मंदिर में सप्ताह में एक दिन जुटते हैं और मंदिर के द्वार पर राजभर की प्रतिमा रखकर उसकी विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं. विश्व हिन्दू परिषद भी कर चुका है बर्खास्त करने की मांग विश्व हिन्दू परिषद ने साधु संतों और राम मंदिर पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के विवादास्पद बयान पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए राजभर को मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की थी. विहिप मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा था, 'संतों और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण पर की गयी ओछी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जायेगी. राजभर योगी सरकार में रहते हुये पीठ में खंजर भोंक रहे हैं. यह कार्य एक विभाजक तत्व ही कर सकता है.' राजभर ने किया था दावा- नरेंद्र मोदी दोबारा पीएम नहीं बन पाएंगे ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि नरेंद्र मोदी दोबारा पीएम नहीं बन पाएंगे. अगला पीएम दलित वर्ग से होगा. उन्होंने कहा कि मायावती का दावा पीएम पद के लिए सबसे मजबूत है और उनका काम बोलता है. अगर जरूरत पड़ी तो मैं भी उनका समर्थन करूंगा. राजभर की पार्टी ने पूर्वांचल की 39 सीटों पर उतारे हैं प्रत्याशी लोकसभा सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा से समझौता ना होने के बाद राजभर ने पूर्वांचल की 39 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए हैं, इनमें प्रधानमंत्री मोदी की संसदीय वाराणसी सीट भी शामिल है. राजभर ने दी थी चेतावनी बता दें कि थोड़े वक्त पहले ही राजभर ने कहा था, "मैं बीजेपी का नेता नहीं. हमारी अलग पार्टी है. पूर्वांचल में हमारी ताकत को देखते हुए बीजेपी ने हमें अपने साथ लिया. हम किसी की कृपा से नहीं, लड़ाई लड़कर मंत्री बने हैं. इसलिए सच बोलते हैं. प्रदेश के मुख्यमंत्री से जनता हितों के लिए मेरी वैचारिक लड़ाई है." ओमप्रकाश राजभर ने भारतीय जनता पार्टी को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर प्रदेश में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण नहीं दिया गया तो उनकी पार्टी एनडीए से अलग हो जाएगी. सुहेलदेव भारतीय समता पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ने कहा था, "जब चुनाव नजदीक आता है तो बीजेपी को सहयोगी दल याद आते हैं. इस बार बिल्ली मट्ठा भी फूंककर पीएगी." सीएम योगी के फैसले पर क्या बोले राजभर राजभर ने कहा,"हम फैसले का स्वागत करते हैं. मुख्यमंत्री जी ने यह फैसला देर से लिया है. यह निर्णय बीस दिन पहले लिया गया होता तो और अच्छा होता." उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के साथ उनकी पार्टी का गठगंधन नहीं हुआ और इसके बाद 13 अप्रैल को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा,"मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फैसला स्वागत योग्य है. मंत्री पद से हटाये जाने पर मुझे कोई शिकवा शिकायत नही है." राजभर ने कहा,"लोकसभा चुनाव में हम मात्र एक सीट मांग रहे थे. हम एक पार्टी हैं और अगर चुनाव नहीं लड़ेंगे तो जनता को क्या जवाब देंगे. अब हम अकेले चलेंगे और अपनी पार्टी की बात जनता तक पहुंचायेंगे." उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछड़े वर्ग के हित की लड़ाई लड़ी तथा यह लड़ाई लड़ते रहेंगे, योगी सरकार को सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू करने की फुर्सत नही मिली. राजभर ने कहा कि वह अपनी ताकत का इस्तेमाल पिछड़े वर्ग को जागृत करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने पर लगायेंगे. क्या है पूरा मामला आपको बता दें कि पिछले काफी वक्त से ओम प्रकाश राजभर के बयान, बीजेपी और सरकार को असहज कर रहे थे. उन्होंने हाल ही में कहा था कि मायावती अच्छी प्रधानमंत्री साबित हो सकती हैं. उन्होंने गठबंधन की तारीफें की थीं और बीजेपी पर निशाना साधा था. ओम प्रकाश राजभर जब से बीजेपी से जुड़े हैं तभी से उस पर निशाना भी साध रहे हैं. लगातार वे अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रहते हैं. उन्होंने हाल में कई ऐसे बयान दिए जिसके बाद से ये तय माना जा रहा था कि सरकार उन पर कार्रवाई कर सकती है. राजभर ने आखिरी चरण में पूर्वांचल की तीन सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवारों को समर्थन भी दे दिया था. राजभर ने कहा था, ''मैंने 13 अप्रैल को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. यह बीजेपी को तय करना है कि वह इसे स्वीकार करे या खारिज करे. मुझे अब सरकार से कोई लेना-देना नहीं है.'' उन्होंने ये भी कहा था कि बीजेपी चुनाव में उनकी पार्टी के नाम और झंडे का दुरुपयोग कर रही है. राजभर ने कहा था कि उन्होंने इस संबंध में चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है.

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