मेरा नीतीश कुमार से निवेदन था कि मैं जेडीयू में शामिल होऊं तो बीजेपी की सहमति हो- प्रशांत किशोर
पीके ने कहा कि कुछ जगहों पर इस बात को ऐसे दिखाया जा रहा है कि जेडीयू के फैसले अमित शाह ले रहे हैं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. ये मेरा और नीतीश जी का संयुक्त मत था कि इसमें बीजेपी की भी सहमति होनी चाहिए.

नई दिल्ली: बीते 15 जनवरी को एबीपी न्यूज़ के बिहार शिखर सम्मेलन कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को लेकर एक दिलचस्प बात बताई. नीतीश ने खुलासा करते हुए कहा था कि प्रशांत किशोर को जेडीयू में शामिल कराने के लिए खुद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें दो बार फोन किया. अब इसपर प्रशांत किशोर ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है.
प्रशांत किशोर (पीके) ने कहा कि नीतीश कुमार के बयान का मतलब था कि साथी दल भी ये चाहते थे कि मैं यहां आऊं. इसमें मैं कोई दिक्कत देखता नहीं हूं. मेरा भी नीतीश कुमार से निवेदन था कि अगर मैं आपके दल में शामिल होता हूं तो गठबंधन के सहयोगी बीजेपी की सहमति होनी चाहिए. प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार ने अमित शाह के फोन करने की जो बात बताई वो उसी सहमति को दर्शाने के लिए कही.
इसके आगे पीके ने कहा कि कुछ जगहों पर इस बात को ऐसे दिखाया जा रहा है कि जेडीयू के फैसले अमित शाह ले रहे हैं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. ये मेरा और नीतीश जी का संयुक्त मत था कि इसमें बीजेपी की भी सहमति होनी चाहिए.
प्रशांत किशोर पिछले साल सितंबर में पार्टी में शामिल हुए थे और उन्हें अक्टूबर में उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था. किशोर चुनावी साल में लगातार जेडीयू से युवाओं को जोड़ रहे हैं. पिछले दिनों उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी के चुनाव में भी अहम भूमिका निभाई और बीजेपी के खिलाफ जेडीयू को जीत मिली. पीके के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर 2014 में बीजेपी की सफलता के बाद चर्चा में आए थे. 'अबकी बार मोदी सरकार' जैसे नारे प्रशांत किशोर की टीम ने ही गढ़े. बाद में उन्होंने बीजेपी से खुद को अलग कर लिया.
उसके बाद प्रशांत किशोर नीतीश कुमार के लिए काम करने लगे. उन्होंने 'बिहार में बहार है, फिर नीतीशे कुमार है', 'नीतीशे-नीतीशे' जैसे नारे गढ़े और 2015 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दिलाई. अपनी रणनीति के तहत पीके ने नीतीश कुमार की 'सुशासन बाबू' वाली छवि पेश किया.
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