आठ दिनों बाद भी संस्कृति के हत्यारे का पता नहीं, लखनऊ के एसएसपी ने अपील जारी की
संस्कृति की हत्या के आठ दिन हो गए हैं लेकिन अब तक हत्यारों का पता नहीं चल पाया है. बलिया के गांव की रहने वाली संस्कृति पढ़ाई के लिए लखनऊ आई थी. 22 जून को उसकी लाश आईआईएम रोड पर खेत में मिली.

लखनऊ: संस्कृति की हत्या के आठ दिन हो गए हैं लेकिन अब तक हत्यारों का पता नहीं चल पाया है. बलिया के गांव की रहने वाली संस्कृति पढ़ाई के लिए लखनऊ आई थी. 22 जून को उसकी लाश आईआईएम रोड पर खेत में मिली.
वो लहू विहीन थी, माथे पर गहरे ज़ख़्म के निशान थे. उसे ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. लोगों को लगा कि रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई होगी. इस घटना से लखनऊ के लोग सदमे में थे.
पोस्टमार्टम के बाद पता चला लड़की के साथ बलात्कार जैसी कोई घटना नहीं हुई है. तो फिर संस्कृति की हत्या किसने और क्यों की? लखनऊ पुलिस इसी सवाल से जूझ रही है लेकिन अब तक जवाब नहीं मिल पाया है. जिले के एसएसपी दीपक कुमार ने पब्लिक से हत्यारे का पता लगाने में मदद की अपील की है.
संस्कृति की हत्या करने वाले को पकड़ने के लिए 55 पुलिस वालों की एक टीम बनाई गई है. आईजी सुजीत पांडे रोज़ इस टीम की मीटिंग लेते हैं. अब तक 20 हज़ार से भी अधिक नंबरों के कॉल डिटेल खंगाले जा चुके हैं, 150 लोगों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग़ हाथ नहीं लगा है.
एसएसपी दीपक कुमार कहते हैं," हमने शहर के कई सीसीटीवी फ़ुटेज चेक किए. एक जगह वो हमें अकेले जाते हुए दिखी. हम दिन रात केस में लगे हुए हैं."

अपने माता पिता की इकलौती बेटी संस्कृति लखनऊ में रह कर पोलिटेकनिक में पढ़ाई करती थी. 21 जून की रात को बलिया जाने के लिए बादशाह नगर रेलवे स्टेशन की तरफ़ निकली थी. उसके पिता उमेश कुमार राय वक़ील हैं. उनका परिवार फेफना इलाक़े में रहता है.
मां आकृति राय सबसे बस यही पूछती हैं,"मेरी बिटिया ने किसका क्या बिगाड़ा? किसने उसे मार दिया." बलिया से लेकर लखनऊ तक इस हत्या कांड को लेकर लोगों में आक्रोश है. सोशल मीडिया में जस्टिस फ़ॉर संस्कृति के नाम से अभियान चल रहा है.

Source: IOCL























