EC की बैठक में जेडीयू ने कहा- एक फेज में हो चुनाव और प्रचार करने की छूट मिले, आरजेडी ने दी ये प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. बैठक में में सभी पार्टियों से यह राय ली गई कि आखिर किस प्रकार चुनाव प्रचार किया जाए?

पटनाः चुनाव आयोग ने आज सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इस बैठक में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों से चुनाव को लेकर सुझाव मांगे गए थे. बैठक के बाद जेडीयू और आरजेड़ी ने अपनी बातें रखीं. बिहार विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने ही बचे हैं. ऐसे में अगर कोरोना संकट के बीच चुनाव अपने सही समय पर होता है तो सभी पार्टियों के लिए जो सबसे बड़ी समस्या है वह यह है कि कोरोना महामारी के बीच चुनाव प्रचार कैसे किया जाए.
इसी मुद्दे को लेकर बिहार चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी जिसमें सभी पार्टियों से यह राय ली गई कि आखिर किस प्रकार चुनाव प्रचार किया जाए. बैठक के दौरान कई बातें उभर कर आईं जिसके बाद एक बार फिर सूबे की विपक्षी पार्टियां और सत्तारूढ़ पार्टियां आमने-सामने गई हैं.
जेडीयू नेता और सांसद ललन सिंह ने कहा कि बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी हर दल से चुनाव प्रचार को लेकर चर्चा कर रहे थे. हमने भी जेडीयू के तरफ से अपनी राय रखी. हम लोगों ने आयोग से यह कहा है कि चुनाव प्रचार को दो भागों में बांट दीजिए. एक उम्मीदवार गांव-गांव घूमे वोट मांगे जैसे मांगते थे और दूसरा बड़े नेता जो हैं वो रैलियां करें और ऐसे करें जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो. एसओपी का कैसे पालन हो उसको चुनाव आयोग तय करे और उसके अनुरूप हम लोग काम करेंगे.
ललन सिंह ने बताया कि इसके अतिरिक्त हमने ने मांग की है कि बिहार में एक फेज में चुनाव होना चाहिए क्योंकि आज की तारीख में सिर्फ बिहार में चुनाव हो रहा है. देश की पारामिलिट्री फोर्स जो पूरे देश में जाती थी, आज फ्री है तो उन फोर्स को लगाकर एक फेज में चुनाव संपन्न करवाने चाहिए. आपको अगर चुनावकर्मियों की कमी हो तो भारत सरकार के जो उपक्रम हैं उनके कर्मचारियों को लगाइए, बगल के राज्यों से कर्मचारियों को मंगाइए, लेकिन एक फेज में चुनाव कराइए ताकि 5-6 फेज के चुनाव का जो बोझ उम्मीदवारों के ऊपर रहता है वह खत्म हो सके और एक दिन में चुनाव सम्पन्न हो जाए.
इसके साथ ही जेडीयू नेता ने कहा कि बड़े नेता कैसे रैलियां करें इस पर चुनाव आयोग दिशा निर्देश जारी करे. चुनाव आयोग लोगों से, राष्ट्रीय स्तर पर भी जो राजनीतिक दल हैं उनसे सलाह मशवरा कर कोई निर्णय ले. वहीं ईवीएम की विश्वसनीयता के संबंध में उन्होंने कहा कि ईवीएम सबसे सुरक्षित मतदान का तरीका है.
इधर, विपक्षी पार्टी आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा कि एक बात जान लें कि यह एक एजेंडा पर बैठक थी, यहां कई एजेंडा आ गए तो हमने मिलकर कहा कि आज एक एजेंडे पर बात कीजिए, अन्य एजेंडों पर बाद में बात करेंगे. आज का एजेंडा था कि चुनाव का प्रचार कैसे हो? षड्यंत्रकारी का विचार है कि चुनाव प्रचार न हो. रुलिंग पार्टी को छोड़ कर सभी पार्टियां यहां खड़ी हैं और सबकी एक राय है कि चुनाव प्रचार हो. वहीं उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा आप कहां डिस्टेंसिंग मेन्टेन कर रहे हो, आप डेमोक्रेटिक प्रोसेस के पार्ट हो. आप अगर बात लोगों तक नहीं पहुंचाएंगे तो डेमोक्रेसी देश में नहीं रहेगी.
उन्होंने बताया कि हम लोगों ने कहा कि हमारे पास साधन क्या है लोगों से जुड़ने का? हम चाहते हैं एक नई गवर्नेंस आए और आपका काम है हमें साधन देना. अब यह टीवी पर बोल रहे हैं बड़े-बड़े स्क्रीन लगाकर यह बात कर रहे हैं यह धनवान हैं, जियो और खरबपति लोग उनके साथ हैं , हम लोगों के पास के जुबान है और गरीबों को आवाज सुनाने की एक ताकत है. आप हमें कैसे रोकोगे किसी चीज़ के नाम पर? आप क्यूं चाहते हो कि नए साधन से प्रचार हो? जो खरबपति हैं जिनके पास साधन है वो प्रचार करें और जो हमारे छोटे-छोटे दल जिनके पास साधन नहीं है वो क्या करेंगे?
जगदानंद सिंह ने कहा कि यह चुनाव धनशक्ति और जनशक्ति की टकराहट है. धनशक्ति वाले चाहते हैं कि धन की ताकत से इस डेमोक्रेसी को हम अपने हाथ में ले लें. हमें लोगों के बीच में नहीं जाने देना चाहते हैं. हमने कहा कि हमें जन के बीच में जाने दो. जिस दिन डिस्कशन बंद हो जाएगी उस दिन डेमोक्रेसी खत्म हो जाएगी. नई तकनीक का प्रयोग तो खरबपति के लिए है. अगर प्रचार नहीं चाहते हो तो कोई प्रचार मत करने दो. बांट दो मेनिफेस्टो, फिर कितना फिजिकल डिस्टेंस हो जाएगा. किसी से कोई मतलब नहीं रहेगा और सारे साधनों को बंद कर दो और बोल दो की कमिंग सरकार क्या करेगी, नई सरकार क्या करेगी और अगर उसको एक्सप्लेन करना है, कमिटमेंट करना है तो फिर चुनाव प्रचार की अनुमति दो.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम कमिटमेंट के आधार पर जनता को अट्रैक्ट करते हैं, आज जनता और लीडर के बीच में बाधा खड़ा करोगे तो यह मुल्क खत्म हो जाएगा. इसलिए यह जो कोरोना है यह डेमोक्रेसी को समाप्त करने के लिए नहीं है. वर्चुअल प्रचार को रूलिंग पार्टी को छोड़ कर सभी पार्टी के लीडर ने अमान्य करार दिया है. हमारे औजार को मत छीनों हमें जाने दो लोगों के बीच. हां एक चीज़ करो जो मास्क लगाकर नहीं जाएगा उसे मत जाने दो, या आप थर्मल स्क्रीनिंग कर दो. वीआईपी की मीटिंग में बम ब्लास्ट ना हो जाए उसका उपाए करते हैं ना?
वहीं एक फेज में बिहार विधानसभा चुनाव कराने के संबंध में जगदानंद सिंह ने कहा कि हमें इसमें कोई दो राय नहीं है. आप एक फेज में करा लो लेकिन एक फेज कराने का कंडीशन आज ही, कितने फेज में चुनाव होगा इससे हमको कोई मतलब नहीं लेकिन आप यह चाहते हो कि हम प्रचार न करें, हमें लोगों से मिलने ना दें, नेता और जनता का भेंट ना होने दें इसपर हमें सख्त ऐतराज है.
जगदानंद सिंह ने कहा कि आप जाने दो हमें जनता के बीच में. स्क्रीन से लाखों जगह तुम्हारा प्रचार होगा कुछ रेगुलेट नहीं कर पाओगे. वहीं चुनाव आयोग की विश्वसनीयता के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आयोग का कुछ नहीं कहना है. अफसोस कहीं ना कहीं आयोग अपनी विश्वसनीयता खोता चला जा रहा है. और इस काम को अगर उसने किया तो भारत का डेमोक्रेसी खतरे में है. चुनाव आयोग जो एक संवैधानिक संस्था वह जनता के इंटरेस्ट का सॉल्यूशन नहीं निकाल करके केवल व्यापारियों के हाथ में पूरी सत्ता देना चाहता है. इससे हमको ऐतराज है.
वहीं सीपीआई नेता ने कहा कि जेडीयू की राय के हमलोग खिलाफ हैं. उनका हम विरोध करते हैं और जो ट्रेडिशनल प्रचार प्रसार है, छोटी-बड़ी सभा नुक्कड़-नाटक, यह सब होना चाहिए. बिना प्रचार प्रसार के चुनाव नहीं होगा. यह जनतंत्र को खत्म करने का साजिश है.
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Source: IOCL


























