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अब ट्रेनों में बदलेंगे कोच के रंग, लाल और सुनहरे पीले रंग का नया कलेवर यात्रियों को लुभाएगा

पूर्वोत्‍तर रेलवे के गोरखपुर मुख्‍यालय में रेल कोच को नया कलेवर देने का काम शुरू हो चुका है. अब ट्रेन के कोच का रंग नीला नहीं रहेगा.

गोरखपुरः पूर्वोत्‍तर रेलवे के गोरखपुर मुख्‍यालय में रेल कोच को नया कलेवर देने का काम शुरू हो चुका है. अब ट्रेन के कोच का रंग नीला नहीं रहेगा. कोच को लाल और सुनहरे पीले रंग में नया रूप दिया जा रहा है. रेलवे को उम्‍मीद है कि कोच का नयापन यात्रियों को खूब लुभाएगा. इसके साथ ही ट्रेन में लगाने के लिए वातानुकूलित और इंडेक्‍शनयुक्‍त पेंट्रीकार भी तैयार किया जा रहा है. इसमें माइक्रावेव और फ्रीजर भी होगा. इसके साथ ही आग से बचाव के लिए जनरल और स्‍लीपर कोच में भी पहली बार अग्निशमक यंत्र लगाए जा रहे हैं.

गोरखपुर में पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय है और यहां पर इसके यांत्रिक कारखाने में इस समय कई ऐसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं. पूर्वोत्‍तर रेलवे के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह बताते हैं कि रेलवे की यात्रा करते समय यात्रियों को सुखद अनुभव हो. इसी थीम को लेकर रेलवे इस समय बोगियों के कायाकल्प में जुटा हुआ है. भारतीय रेलवे अपनी छवि को सुधारने के लिए नए-नए उपायों की तलाश कर रहा है. ऐसे में रेल डिब्बों का रंग बदलने का सुझाव रेल मंत्रालय को पसंद आया है. गोरखपुर में रेल अधिकारियों ने इसके लिए रात-दिन एक करके काम करना शुरू कर दिया है. आपने देखा होगा कि कई ट्रेन के डिब्बों का नीला रंग होता है. इसका मतलब ये है कि यह आईसीएफ कोच है. आपको बता दें कि आईसीएफ कोच की स्पीड 70 से 140 किमी प्रति घंटा तक होती है.

अब ट्रेनों में बदलेंगे कोच के रंग, लाल और सुनहरे पीले रंग का नया कलेवर यात्रियों को लुभाएगा

एनई रेलवे गोरखपुर मैकेनिकल वर्कशॉप में तैनात सीनियर सेक्‍शन इंजीनियर एके श्रीवास्‍तव बताते हैं ये मेल एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में लगाए जाते हैं. भारतीय रेल में आईसीएफ कोच ही ज्यादा चलते हैं लेकिन अब इनकी जगह आपको अब पीले और गहरे लाल रंग में रंगे नजर आयेंगे. गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने के पेंट शॉप में नीले कोचों को पीला करने का काम शुरू कर दिया है. इस बार जो पेंट लगाया जा रहा है वो पहले से काफी चमकीला है और इसपर एंटी ग्रेफ़ीटी कोटिंग लगाई जा रही है, जिससे इसका रंग तीन साल से अधिक तक ऐसे ही बना रहे और इस पर खरोच लगने से पेंट न निकले. यहां पर जैसे-जैसे बोगिया रिपेयर होने आ रही हैं. इनको नए रंग में रंगकर वापस भेजा जा रहा है. कुछ महीनों में सभी नीले रंग की बोगियों की जगह इसी लाल और सुनहरे पीले रंग की बोगियां नजर आने लगेंगी.

इस काम में लगे अधिकारियों का कहना है की पहले से इसको मेंटेन करना भी आसान होगा और इस नये रंग में रंगी बोगियों से यात्रियों की आँखों को सुकून के साथ कुछ नयापन मिलेगा. पूर्वोत्तर रेलवे इस समय कई ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. जो यात्री सुविधाओं में इजाफा करने के साथ सफर और और सुरक्षित बनाने का काम करेंगे. गोरखपुर का यांत्रिक कारखाना इस समय कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर रिसर्च कर रहा है. इसमें सबसे महत्वपूर्व एलएचबी हॉट बुफे कार प्रोजेक्ट है. चलिए बताते हैं कि आखिर क्या है इस प्रोजेक्ट की खासियत और कैसे यह हमारे सफर को और आसान करने वाला है. अब लंबी दूरी की सामान्य एक्सप्रेस ट्रेन के यात्रियों को भी राजधानी और दूरंतो की तरह रास्ते में गर्म और स्वादिष्ट नाश्ता, खाना मिलेगा.

अब ट्रेनों में बदलेंगे कोच के रंग, लाल और सुनहरे पीले रंग का नया कलेवर यात्रियों को लुभाएगा

एनई रेलवे के सीनियर सेक्‍शन इंजीनियर सुधाकर सिंह खानपान की व्यवस्था को और बेहतर बनाने और सुरक्षित यात्रा के लिए पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनों में परंपरागत पेंट्रीकार की जगह अति आधुनिक वातानुकूलित एलएचबी हॉट बुफे कार यानी वेस्टीब्यूल्ड रसोई यान लगाई जाएगी. अभी यह व्यवस्था एलएचबी कोच की रेक वाली ट्रेनों में ही हो रही है. दरअसल, हॉट बुफे कार में सिलेंडर की व्यवस्था नहीं है. गैस सिलेंडर की जगह इसमें इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट लगाई जा रही है. यह काफी कुछ उस इंडक्शन कुकर की तरह से है. जिस पर हमारे-आपके घरों में खाना बनाया जाता है. ट्रेन में इसी पर नाश्ता और खाना बनेगा, इससे आग लगने की आशंका समाप्त हो जाएगी. इस पेंट्रीकार में चिमनी की व्यवस्था है, ताकि धुआं और अन्य हानिकारक तत्व बाहर निकल जाए. इसमें यह व्यवस्था की गयी है कि पेंट्रीकार का तापमान भी निर्धारित सीमा में बना रहे.

नाश्ता और खाना ताजा रखने के लिए कार में डीप फ्रीजर, बाटल कूलर, हॉट केस और वाटर बॉयलर जैसे विशेष उपकरण लगे हुए है. यह पेंट्री कार पूरी तरह से स्टील से इस तरह से बनाया गया है ताकि इसमें चूहे, काक्रोच भी पनप न सकें और जिस हाइजीन की बात की जाती है वो भी बरकरार रहे. कुल मिलाकर कहें तो हॉट बुफे कार को अति आधुनिक स्वरूप दिया गया है और जल्द ही यह परम्परागत किचन की जगह एलएचबी कोच वाले ट्रेनों में लगना शुरू हो जायेगा. पहले अधिकतर ट्रेनों में आग लगने की घटनाओं में गैस सिलेंडर का ज्यादा योगदान होता था लेकिन इस व्यवस्था से खाना भी ख़राब नहीं होगा और आग लगने की संभावना भी ख़त्म हो जाएगी.

अब ट्रेनों में बदलेंगे कोच के रंग, लाल और सुनहरे पीले रंग का नया कलेवर यात्रियों को लुभाएगा

एनई रेलवे के जूनियर इंजीनियर हितेन्‍द्र बहादुर बताते हैं कि गोरखपुर के रेलवे वर्कशॉप में एक और नई शुरुआत की जा रही है. अभी तक चलती ट्रेनों में आग लगने पर सिर्फ पेंट्री कार और एसी कोच में ही आग बुझाने की सुविधा मिल पाती थी. स्लीपर क्लास और जनरल क्लास के यात्रियों को इससे सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता था. पिछले कुछ सालों में रेलवे में आग लगने की घटनाओं पर अगर नजर डालें तो सबसे ज्यादा घटनाएँ जनरल क्लास और स्लीपर क्लास में होती आई हैं. ऐसे में भारतीय रेल के इतिहास में पहली बार पूर्वोत्तर रेलवे, जनरल क्लास और स्लीपर क्लास की बोगियों में भी फायर सेफ्टी अलार्म और अग्नि शमन यंत्र लगाने जा रहा है.

इसके लिए गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने के काम शुरू हो गया है और कई ट्रेनों में इसे लगाया भी जा चुका है. इस अग्नि शमन यंत्र के साथ एक अलार्म भी लगाया गया है. जिससे कोई अगर इसे चुराने या प्रयोग करने के लिए निकाले तो तुरंत सायरन बजने लगेगा. पूर्वोत्‍तर रेलवे की पहल यात्रियों को सुकून के साथ सुरक्षा और संरक्षा देने के अपने संकल्‍प को भी पूरा करने में जुटा है. ऐसे में ये यात्रियों को सुखद अनुभूति और स्‍वास्‍थ्‍य के साथ सुरक्षित सफर का भी एहसास कराएगा.

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