पलायन पर बिहार सरकार की बड़ी मुहिम, मुख्य सचिव बोले- पैदल चलने वालों को मदद दिलाने की ज़िम्मेदारी थानों को दिया गया
बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने एबीपी न्यूज़ को बताया है कि पैदल चलने वालों को मदद दिलाने की ज़िम्मेदारी थानों को सौंपा गया है.

पटना: बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने एबीपी न्यूज़ से बताया कि आने वाले मज़दूरों के लिए बड़ा ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है. दीपक कुमार ने कह, '' 25 मई तक बाहरी राज्यों से अप्रवासी मजदूर आएंगे. हमारा अनुमान था कि 7 से 8 लाख लोग होंगे पर आज के डेट में ये अनुमान लगाया जा रहा है कि 12 से 15 लाख लोग आएंगे. ये नंबर अचानक बढ़े हैं. लोग ट्रेन चलाने को लेकर मांग कर रहे हैं और हम ट्रेन चला भी रहे हैं. हमलोग आने वालों का स्वागत कर रहे हैं. वो अगर आते हैं तो उससे हमारे राज्य को लाभ ही होगा क्योंकि हम उनके स्किल को यूज करेंगे. हालांकि जो पहले 18 मई तक लाने का टारगेट था उसे अब पूरा करने में समय अधिक लगेगा. अब हमलोग 25 तक का टारगेट रख रहे हैं.''
कोरोना महामारी से बचने के लिए बनाई केटेगरी
उन्होंने कहा,'' बाहर से जो माइग्रेंट आ रहे हैं वो काफी संख्या में हैं और हमलोग उन्हें इंस्टीट्यूटशनल क्वॉरंटीन सेंट्र में रख रहे हैं. वो जितने भी राज्य से आ रहे हैं हमने उनको तीन पार्ट में डिवाइड किया है. एक A केटेगरी है जहां से इंफेक्शन के चांसेज ज्यादा है. मुंबई, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली को A कैटगरी में है. इसके अलावा B और C कैटेगरी भी है पर A कैटेगरी के लोगों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. B और C में पंचायत और गांव के क्वॉरंटीन सेंटर में रखा गया है. 65 हजार क्वारंटीन सेंटर हमारे चलना शुरू हो गए हैं. अगर हम इस नम्बर को क्वॉरंटीन में रख लेते हैं तो ये राज्य के लिए बहुत बड़ा फायदा होगा.
31 मई तक लॉक डाउन बढाने का सुझाव दिया
उन्होंने कहा,'' हमलोगों ने भारत सरकार को ये सुझाव दिया है कि अगर हमलोग 25 मई तक सभी लोगों को वापस लाते हैं और उन्हें 14 दिन तक क्वॉरंटीन रखते हैं तो ये 5 से 6 जून तक समय चला जाता है. इस पीरियड में श्रमिकों का मूवमेंट होगा, ट्रेनें चलेंगी, बसे चलेंगी, उनके लिए पदाधिकारी और कर्मचारियों का मूवमेंट होगा. इस वजह से इस दौरान अगर हम लॉकडाउन खोल देते हैं तो हमारा जो पर्पस है वो पूरा नही हो पायेगा. हम चाहते हैं कि कम से कम 31 मई तक बेसिक लॉकडाउन जारी रहे, जिसमे इंटर स्टेट मूवमेंट, इंटर डिस्ट्रिक मूवमेंट ,स्कूल,कॉलेज, सिनेमाघर ये सभी बेसिक चीजें बंद रहनी चाहिए. इस पीरियड में हम ये भी चाहते हैं कि यद्यपि लॉकडाउन जारी रहता है बांकी कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी चालू रहनी चाहिए चूंकि जो हमारे माइग्रेंट आ रहे हैं हम उनका यूज कर सके उन्हें रोजगार दे सके.''
पैदल आने वालों को थानेदार करें मदद
उन्होंने आगे कहा,'' ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है जिस तरह की घटनाएं हुई है और हमलोगों ने ट्रेन या बस के लिए अनेक राज्यों को कहा है. जो भी वो भेजते हम उन्हें स्वीकार करेंगे. इसलिए डेट बढ़ाते जा रहे हैं और इसके लिए बार्डर पर भी हमलोग ने बेहतर इंतजाम किया है. हमलोग ने बॉर्डर पर ही बहुत बड़ा सेंटर बनाया है. कैमूर और गोपालगंज में भी जहां प्रतिदिन 10 से 12 हजार लोगों को हैंडल कर रहे हैं. वहां उनका रजिस्ट्रेशन से लेकर उनके खाने पीने की व्यवस्था होती है. फिर वहां से उनको बस या ट्रेन से उनके गांव तक पहुंचाया जाता है. दिक्कत दो तीन कारणों से है क्योंकि लोग ट्रक से भी आ रहे हैं, ट्रक के लिए जहां तक इजाजत है जाने देते हैं फिर आगे का सफर उन्हें पैदल ही चलना पड़ता है. इस पर हमलोग ने आज भी कई इंस्ट्रक्शन जारी किए हैं. सभी लोकल थाने को कहा गया है कि इस तरह के लोग जो भी मूव कर रहे हैं उनको थाना प्रभारी अपने पास बुलाए फिर कंट्रोल रूम को सूचित करें, फिर गाड़ी से उन्हें क्वॉरंटीन सेंटर तक ले जाए.''
क्वॉरंटीन में कुछ लोग कर रहे अनुशासनहीनता
उन्होंने कहा,''क्वॉरंटीन सेंटर में व्यवस्था को लेकर शिकायत हमलोगों के पास भी आती है. हमलोग प्रतिदिन जिस जिले से शिकायत आती है उस जिले के डीएम को शाम में जुड़ते हैं और क्या समस्या आई, क्यों आई ये समझते हैं. मगर एक दो चीज मैं आपके माध्यम से लोगो को बताना चाहूंगा कि एक तो बहुत बड़ी संख्या में मजदूरों को हम लोग हैंडल कर रहे हैं और दूसरी बात क्या है कि उसमे जितने लोगों को क्वॉरंटीन किया गया है वो अनिच्छुक लोग हैं जो रहने के लिए तैयार नही है. उन्हें लगता है कि ये इतनी दूर से आकर घर के निकट है फिर भी घर नही जा सकते हैं. उन्हें जबर्दस्ती रोका गया है और जब अनिच्छुक लोगो को आप रोकते हैं और वो एक बड़ी संख्या में होते हैं तो इस तरह की समस्या आती है.''
नहीं मिलेगा हज़ार रुपये अनुदान
उन्होंने अंत में कहा,'' इसमे कार्यवाही की बात नही है पर हम ये जरूर कह रहे हैं कि अगर आप क्वॉरंटीन सेंटर बीच में छोड़कर जाते हैं. अगर आप अनुशासन का पालन नहीं करते हैं तो जो बिहार सरकार एक हजार की राशि आपको देगी वो नही मिलेगा.''
Source: IOCL



























