नौ देशों की महिला राजदूतों ने अडानी की एनर्जी प्लांट का किया दौरा, प्रोजेक्ट में महिलाओं की भूमिका को सराहा
नौ देशों की महिला राजदूतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात में अडानी ग्रुप के परियोजनाओं का जायजा लिया. सभी ने इस बात पर जोर दिया कि कार्यस्थलों पर विविधता देश की आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है.

अडानी ग्रुप ने गुजरात के खावड़ा और मुंद्रा में एक विशेष कार्यक्रम में लक्जमबर्ग, रोमानिया और स्लोवेनिया सहित नौ देशों की महिला राजदूतों के एक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया. महिला राजदूतों ने यहां नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य परियोजनाओं का जायजा लिया लेने का साथ-साथ इसमें महिलाओं की भागीदारी की सराहना की. प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले पश्चिमी भारत के कच्छ जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्र खावड़ा में अडानी ग्रीन एनर्जी के 30 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा संयंत्र में महिला इंजीनियरों के साथ बातचीत की. सभी ने इस बात पर जोर दिया कि कार्यस्थलों पर विविधता किसी देश की आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है.
महिला कर्मचारियों से की बात
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से एक दिन पहले यानी बुधवार (6 मार्च 2025) को सात राजदूतों और दो उच्चायुक्तों ने बंदरगाहों से ऊर्जा तक के क्षेत्र में काम करने वाले अडानी फाउंडेशन से समर्थित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिला सदस्यों के साथ भी बातचीत की. अडानी ग्रुप ने एक बयान में कहा, "राजदूतों ने देखा कि किस तरह क्षय ऊर्जा परियोजना अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को सतत विकास के साथ एकीकृत कर रही है, जिसमें ऊर्जा नेटवर्क संचालन केंद्र (ईएनओसी) भी शामिल है, जिसकी देखरेख महिला इंजीनियर कर रही हैं."
महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुंद्रा बंदरगाह को भी दौरा किया, जो लगभग 11 फीसदी समुद्री सामान और 33 फीसदी कंटेनर यातायात को संभालता है. मुंद्रा बंदरगाह पर आने वाले राजदूतों ने मुंद्रा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (ईएमसी) का दौरा भी किया, जहां वैश्विक कंपनियां उन्नत विनिर्माण में निवेश कर रही हैं.
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में कौन-कौन शामिल
इन प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में भारत में इंडोनेशिया की राजदूत इना कृष्णमूर्ति, लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविसिएन, मोल्दोवा की राजदूत आना तबान, भारत, नेपाल और बांग्लादेश में रोमानिया की राजदूत सेना लतीफ, सेशेल्स गणराज्य की उच्चायुक्त लालाटिताना अकूशे, लेसोथो की उच्चायुक्त लेबोहांग वैलेंटाइन मोचाबा, एस्टोनिया की राजदूत मार्जे लूप, स्लोवेनिया की राजदूत मातेजा वोदेब घोष, लक्जमबर्ग की राजदूत पैगी फ्रांत्जेन शामिल थीं.
#WATCH | Gujarat: Ahead of #InternationalWomensDay on 8th March, a delegation of women Ambassadors from nine nations visited Adani Group’s projects in Khavda and Mundra, where they witnessed India's strides in clean energy, infrastructure and industrial development. pic.twitter.com/fRWv4FYMjg
— ANI (@ANI) March 7, 2025
अडानी ग्रुप की सराहना की
रोमानियाई राजदूत सेना लतीफ कहा, ''अडानी फाउंडेशन के कार्यबल को देखना प्रभावशाली था. हमने देखा कि युवा इंजीनियरों को कैंपस से भर्ती करके यहां प्रयोगशालाओं में लाया गया है. वे भारत के संपूर्ण सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दे रहे हैं.'' उन्होंने कहा कि अडानी ग्रुप ने गैर-खेती योग्य जमीन को सोलर प्लांट और मैन्यूफैक्चरिंग साइट में बदल दिया, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र और भारत को ऊर्जा भी मिली है. उन्होंने आगे कहा कि रोमानिया भारत के साथ सहयोग करने के अवसरों की तलाश कर रहा है.
लेसोथो की उच्चायुक्त मोचाबा ने महिला इंजीनियरों से कहा, "मेरा आपके लिए यह मैसेज है कि एक महिला के रूप में आप जिस समाज में रह रही हैं, उसकी इंजीनियर हैं. आपको बहादुर होना होगा, आपको अपना ध्यान केंद्रित कर रहना होगा और महत्वपूर्ण भूमिकाओं में देश का नेतृत्व करना होगा."
'बंजर, बेकार जमीन सेवा का मंच बनी'
लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविसिएन ने कहा, "यह काफी प्रेरणादायक है कि कैसे एक बंजर, बेकार जमीन अचानक देश की सेवा करने का मंच बन गई है. यह न केवल सीमित समुदाय के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए महत्वपूर्ण है. इस ग्रुप में महिलाएं ऑपरेशनल स्तर से लेकर टॉप मैनेजमेंट तक सभी पदों पर काम कर रही हैं. यह सशक्तीकरण की बात है. भारत के परिवर्तन में महिलाएं सबसे आगे हैं. यह ग्रुप एसएचजी महिलाओं का भी समर्थन कर रहा है जो विभिन्न हस्तशिल्प वस्तुएं बनाती हैं और अपने परिवारों का भरण-पोषण करने में सक्षम हैं."
सेशेल्स की राजदूत एकौचे ने कहा कि वह भारत में उच्चायुक्त बनने वाली अपने देश की पहली महिला हैं. उन्होंने कहा कि वह महिलाएं, बच्चों की शिक्षा और विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. एस्टोनिया की राजदूत लूप ने कहा, "महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में काम करते देखना बहुत दिलचस्प था. इतने बड़े पैमाने पर सोलर पैनल का उत्पादन और उसमें महिलाओं की भागीदारी देखना प्रभावशाली था.



















