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भारत के लिए क्या है Chandrayaan-2 अभियान का महत्व ? जानिए कैसे दुनिया में इतिहास रचेगा देश

Chandrayaan-2 पहला भारतीय अभियान है जो स्वदेशी तकनीक से चंद्रमा की सतह पर उतरेगा. आइये जानतें हैं अंतरिक्ष अभियान में चंद्रमा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसके दक्षिणी ध्रुव का महत्व.

नई दिल्ली: अन्तरिक्ष में अपना परचम लहरा कर एक इतिहास रचने से भारत बस कुछ ही क्षण दूर है. भारत और देश के अन्तरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए सात सितंबर की देर रात का समय बेहद महत्वपूर्ण है. 7 सितंबर को रात 1:55 पर जब Chandrayaan 2 का लेंडर विक्रम चांद की धरती पर कदम रखेगा उसी के साथ भारत एक नया इतिहास रच देगा. चंद्रमा की सतह पर Chandrayaan 2 के उतरने का सीधा नजारा देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 60 हाईस्कूल विद्यार्थियों के साथ बेंगलुरु स्थित इसरो केंद्र में मौजूद रहेंगे. ऐसे में सबके मन में यही सवाल है कि Chandrayaan 2 के सफलता से देश कैसे इतिहास रचेगा. कैसे भारत के लिए Chandrayaan 2 मिशन महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं..

भारत के लिए चंद्रयाण-2 अभियान का महत्व क्या है ?

Chandrayaan 2 मिशन भारत के लिए एक ऐतिहासिक मिशन है. इस मिशन का मकसद चंद्रमा के प्रति जानकारी जुटाना और ऐसी खोज करना है, जिससे भारत के साथ-साथ पूरी मानवता को लाभ हो. इसका मकसद वैज्ञानिकों की भावी पीढ़ी को प्रेरित करना भी है. चंद्रयाण-2 मिसन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहला भारतीय अभियान है, जो स्वदेशी तकनीक से चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा. इस मिशन की सफलता से यह साफ हो जाएगा कि हमारे वैज्ञानिक किसी के मोहताज नहीं हैं.

भारत के लिए क्या है Chandrayaan-2 अभियान का महत्व ? जानिए कैसे दुनिया में इतिहास रचेगा देश

चांद्रयाण-2 का महत्व

1-इस मिशन की अहमियत बताते हुए इसरो ने कहा कि चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां अब तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है. अधिकांश मिशन भूमध्य चंद्ररेखा के आसपास गए हैं, जहां चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की तुलना में सपाट जमीन है. इस लिहाज से यह मिसन भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

2-बताया जाता है कि चांद का दक्षिणी ध्रुव अन्य हिस्सों के मुकाबले ज्यादा छायादार है. ऐसी स्थिति में वहां पानी होने की संभावना अधिक है.पानी की मौजूदगी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भविष्य में इंसान की उपस्थिति के लिए फायदेमंद हो सकती है. अगर चंद्रमा पर पानी मिलता है तो यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी.

3-इस मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह में मौजूद तत्त्वों का अध्ययन कर यह पता लगाना कि उसके चट्टान और मिट्टी किन तत्त्वों से बनी है. उनमें मैग्निशियम, कैल्शियम और लोहे जैसे खनिज को खोजने का प्रयास करना है. इसके साथ ही वहां मौजूद खाइयों और चोटियों की संरचना का अध्ययन करना, चंद्रमा की सतह का घनत्व और उसमें होने वाले परिवर्तन का अध्ययन करना इस मिशन का मुख्य उद्देश्य है.

4- इसके अलावा चंद्रमा के सतह की 3-D तस्वीरें लेना भी इस मिशन का उद्देश्य है.

5- ग्रीन एनर्जी की खोज के लिहाज से भी भारत का मिशन चंद्रयाण-2 काफी महत्वपूर्ण है. दरअसल स्वच्छ ऊर्जा या ग्रीन एनर्जी के लिए पूरी दुनिया तरस रही है. ऐसा माना जा रहा है कि चंद्रमा पर बड़ी मात्रा में पाए जाने वाले हीलियम-3 की खोज कर भारत इस समस्या से भी निजात पा सकता है. हीलियम-3 की खोज के लिहाज के चंद्रयाण-2 काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव इसकी खोज के लिए काफी महत्वपूर्ण है. अगर भारतीय वैज्ञाणिक हीलियम-3 की खोज कर लेते हैं तो भारत वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन सकता है. इससे 500 साल तक ऊर्जा की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है. नासा के अनुसार चंद्रमा पर 10 लाख मीट्रिक टन हीलियम-3 मौजूद है.

इसमें कोई शक नहीं कि Chandrayaan 2 भारत के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है. भारत के अलावा केवल तीन देश अमेरिका, रूस और चीन ने ही अब तक चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की है, यह ISRO की तकनीकी क्षमता और एक्सपर्टीज को दर्शाता है.

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