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कल का बजट आज: 'जेटली की पोटली' से देश के लिए क्या निकलेगा?

नई दिल्ली: मोदी सरकार का चौथा बजट आने में महज एक दिन से भी कम का वक्त बचा है. आम लोगों की सबसे ज्यादा उम्मीद इसी बात पर है कि नोटबंदी के बाद बजट से उनकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? सभी की नजरें वित्तमंत्री अरुण जेटली के लाल ब्रीफकेस पर टिकी हुईं हैं. सभी जानना चाह रहे हैं कि जेटली की पोटली में आम से लेकर खास तक के लिए क्या खास होगा?

एक नजर आम बजट 2017-18 को लेकर दस बड़ी संभावनाओं पर

टैक्स पेयर को छूट उम्मीद अनुमान है कि इस साल बजट में कर योग्य आमदनी की निचली सीमा यानी स्लैब ढ़ाई लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख या फिर साढ़े तीन लाख रुपये तक किया जा सकता है. ऐसा हुआ तो हर स्लैब में आयकर चुकाने वाले को 5 हजार एक सौ पचास रुपये से 10 हजार तीन सौ रुपये तक की बचत हो सकती है.

देश में व्यक्तिगत आयकर देने वालों की संख्या 3.65 करोड़ है. जबकि 1.71 करोड़ से ज्यादा ऐसे हैं जो औसतन 26 हजार रुपये ही टैक्स देते हैं. मतलब ये हुआ कि इन 1.71 करोड़ करदाताओं को बीस से 40 फीसदी की बचत होगी. हालांकि ऐसा नहीं लगता कि दस लाख से ऊपर तीस फीसदी वाले स्लैब में कोई बदलाव होगा. इसके बावजूद बजट में अन्य प्रावधानों में करदाताओं के लिए राहत का इंतजाम किया जा सकता है.

होम लोन में छूट की उम्मीद बजट में इस बार आयकर दाता होम लोन से भी ज्यादा रकम बचा पाएंगे. पूरी संभावना है कि इस बार वित्त मंत्री अरुण जेटली होम लोन में राहत का एलान करें. हाउंसिग सेक्टर मंदी से जूझ रहा है. अगर हाउसिंग में खरीदारी बढ़ी तो एक साथ कई उद्योगों को फायदा मिलता है और बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनते हैं. इससे पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलती है.

इसी को ध्यान मे रखते हुए ब्याज की रकम पर छूट दो से बढ़ा कर ढ़ाई लाख रुपये की जा सकती है. फिलहाल होम लोन लेने वाले की 2 लाख रुपये तक की आमदनी टैक्स फ्री हो जाती है. इसमें कल कुछ शर्तों के साथ पचास हजार का इजाफा देखने को मिल सकता है.

साथ ही इस बात के भी आसार हैं कि ब्याज भुगतान में कर में छूट पहली मासिक किश्त से ही शुरु कर दी जाए. अभी घर का कब्जा मिलने के बाद ही ये छूट मिलती है. जिसमें अक्सर कई साल लग जाते हैँ. मकान लेने के लिए ब्याज दर नीचे आई है और अगर इसमें कर छूट भी शामिल हो जाए तो रियल इस्टेट इंड्रस्ट्री के लिए ये बड़ा तोहफा साबित होगा.

भत्ते में छूट की उम्मीद मिडिल क्लास के लिए वित्तमंत्री एक और तोहफा लेकर आ सकते हैं. तीसरी बड़ी छूट धारा 80 सी के अंदर देखने को मिल सकती है. ये छूट दो लाख रुपये तक हो सकती है. फिलहाल ये छूट सिर्फ डेढ़ लाख रुपये है. यानी हर स्लैब को पचास हजार टैक्स फ्री इनकम का फायदा हो सकता है. वित्त मंत्री अरुण जेटली शिक्षा और परिवहन जैसे भत्तों की सीमा में बढ़ोतरी का रास्ता भी अपना सकते हैं.

कर छूट के लिए स्कूल ट्यूशन फीस की सालाना सीमा 2400 रुपये और हॉस्टल फीस की सालाना सीमा 7200 रुपये से बढ़ायी जा सकती है. इसी तरह घर से दफ्तर आने-जाने के लिए सालाना 19200 रुपये खर्च पर कर में छूट मिलती है. इस सीमा में भी बढ़ोतरी मुमकिन है.

मेडिकल के खर्चों और एलटीए के मामले में भी कर छूट की व्यवस्था में फेरबदल करने की कोशिश होगी. मिडिल क्लास के लिए ये बजट की खबर ला सकता है. लेकिन सरकार एक हाथ से देकर दूसरे हाथ से लेने का रास्ता अपनाने वाली है.

सर्विस टैक्स बढ़ सकता है देश भर को एक बाजार बनाने वाली नयी कर व्यवस्था वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी को पहली जुलाई से लागू किया जाना है. संकेत है कि इसमें सर्विस कर की दर 17-18 फीसदी तक जा सकती है. इसी को देखते हुए सर्विस कर की दर बढ़ायी जा सकती है.

अभी सर्विस कर की मौजूदा दर 14 फीसदी है जिस पर आधे-आधे फीसदी की दर से स्वच्छता और किसान कल्याण सेस लगाया जाता है. इससे सर्विस कर की प्रभावी दर 15 फीसदी हो जाती है. सर्विस कर की दर बढ़ने से शहर क्या, गांव ,क्या, हर तबके के लोगों की जेब ढीली होगी.

कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए बड़े एलान की उम्मीद सरकार की कोशिश है कि अब अधिकतर लेनदेन डिजिटल माध्यमों से ही हों और नगद इस्तेमाल को हतोत्साहित किया जाए. नोटबंदी के बाद ऐसे उपायों को लेकर मुख्यमंत्रियों की समिति ने भी अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंप दी है और समिति को भरोसा है कि उनकी सिफारिशों का संज्ञान बजट लेगा.

इसी के बाद आसार हैं कि बैंक से 50 हजार रुपये या ज्यादा की नकद निकासी पर टैक्स लगाया जा सकता है. तकनीकी भाषा में इसे बैंकिंग कैश ट्रांजैक्शन टैक्स यानी बीसीटीटी कहा जाता है. यूपीए सरकार के कार्यकाल में कुछ वर्षों तक 20 हजार रुपये या उससे ज्यादा निकालने पर बीसीटीटी का प्रावधान था, जिसे बाद में हटा लिया गया.

डेबिट या क्रेडिट कार्ड और मोबाइल बटुए से लेन-देन पर इनकम टैक्स में कुछ रियायतें दी जा सकती हैं. छोटे दुकानदारों को बायोमेट्रिक सेंसर समेत स्मार्ट फोन खरीदने के लिए कुछ सब्सिडी दी जा सकती है.

सरकार पहले ही कह चुकी है कि 2 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले यदि डिजिटल लेन-देन को अपनाते हैं तो उनके लिए कर की गणना 8 के बजाए 6 प्रतिशत आय मानकर की जाएगी. अब इसके लिए विशेष प्रावधान बजट में शामिल होगा. इससे 1.23 लाख रु से भी ज्यादा कर की बचत हो सकती है.

डेबिट कार्ड पर सर्विस चार्ज यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को कम से कम रखने के लिए सरकार बैंकों से अपील कर सकती है. 2000 रुपये तक के लेन-देन पर सर्विस कर नहीं लगाने की व्यवस्था जारी रखने की बात कही जा सकती है.

बजट में किसानों पर खास ध्यान बजट में उम्मीद है कि फसलों के एकीकृत राष्ट्रीय बाजार के विस्तार करने की योजना पेश की जाएगी जिससे किसानों को अपनी पैदावार बेहतर कीमत पर बेचने में मदद मिले.

कर्ज नहीं लेने वाले किसान राष्ट्रीय फसल बीमा योजना में भाग ले सके, ये सुनिश्चित करने का काम किया जाएगा. खाद और बीज पर सब्सिडी बढ़ायी जा सकती है, वहीं मिट्टी की पड़ताल को लेकर विशेष योजना का ऐलान हो सकता है. सरकार के रूख को देखते हुए कर्ज माफी जैसी योजना तो शायद नहीं आएगी, हां, ब्याज में रियायत की बात की जा सकती है.

मनरेगा का बढ़ सकता है बजट किसानों के साथ-साथ गरीबों के लिए सरकार इस बार आवंटन बढ़ा सकती है. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के तहत आवंटन 43500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर कम से कम 50 हजार करोड़ रुपये की जा सकती है

ग्रामीण इलाकों में आमदनी बढ़े और नोटबंदी के बाद वापस गांव लौटे लोगों को रोजगार मिले. इसके लिए मनरेगा के तहत आवंटन 5 से 10 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है. 2016-17 में 38,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था.

'यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम' गरीबी रेखा से नीचे मौजूद लोगों के लिए सरकार एक नई योजना भी लांच कर सकती है. योजना का नाम यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम है. इस स्कीम के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को हर महीने एक निश्चित रकम मसलन 1200-1400 रुपये दिए जा सकते हैं. इस बारे में आर्थिक सर्वे में चर्चा की ही गयी है, अब यदि एक साथ पूरे देश मे नहीं भी लागू की जाती है तो देश के चुनिंदा जिलो में बतौर पायलट शुरु करने का ऐलान तो हो ही सकता है.

उद्योग जगत के लिए अच्छी खबर की उम्मीद बजट से उम्मीद है कि बड़े उद्योगों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटाने की बड़ी पहल होगी. 2015-16 के बजट में कहा जा चुका था कि चार सालों में कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया जाएगा.

इस सिलसिले में 2016-17 के बजट में नयी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए कुछ शर्तो के साथ 25 फीसदी और 5 करोड़ रुपये से कम कमाई करने वालों यूनिट के लिए 29 फीसदी की दर से टैक्स लगाने का प्रस्ताव हुआ था.

छोटे उद्योगों को भी खुश कर सकती है सरकार उम्मीद है कि बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा बढ़ाकर एमएसएमई के सभी कामगारों को शामिल किया जाएगा. अभी सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को इसका फायदा मिलता है. छोटे उद्योगों के लिए वर्किंग कैपिटल लोन लेना और आसान बनाने का एलान किया जा सकता है.

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