एक्सप्लोरर

बड़ी खबर: क्या इस मानसून आपके इलाके में भी कम होगी बारिश? मौसम विभाग की 20 सालों में सबसे बड़ी भविष्यवाणी

Monsoon Update: इस साल अप्रैल के महीने में बादल बरस रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग ने चेताया है कि मानसून में पानी कम बरसेगा. यह दावा मौसम विभाग ने 20 साल में सबसे बड़ी भविष्यवाणी से किया है.

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 2026 के जून से सितंबर में मानसून के लिए अपनी पहली भविष्यवाणी जारी की है, जिसमें पूरे देश में औसत से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है. IMD ने कहा है कि इस बार देश को कुल 92 प्रतिशत ही सामान्य बारिश मिलेगी. यह पिछले 20 सालों में IMD की सबसे कम बारिश वाली पहली भविष्यवाणी है, लेकिन घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत पिछले कुछ सालों में मानसून की ऊपर-नीचे होने वाली स्थिति के तैयार चुका है. सात साल लगातार अच्छी बारिश के बाद यह पहला मौका है जब IMD ने औसत से कम बारिश की बात कही है, लेकिन पानी प्रबंधन, भूजल संरक्षण और IMD की बेहतर भविष्यवाणी ने हालात को संभालने लायक बना दिया है. कैसे? एक्सप्लेनर में समझते हैं...

सवाल 1: मानसून में 92 प्रतिशत बारिश का मतलब क्या होता है?  
जवाब: जून से सितंबर के बीच मानसून भारत की कुल सालाना बारिश का 70 प्रतिशत से ज्यादा लाता है. यह सिर्फ गर्मी से राहत नहीं देता, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी सीधे प्रभावित करता है. देश की लगभग आधी खेती अभी भी बारिश पर निर्भर है. सही समय पर अच्छी बारिश अच्छी फसल, किसानों की आय और ग्रामीण मांग को बढ़ाती है. इसके अलावा मानसून जलाशयों को भरता है, जो पूरे साल पीने का पानी, बिजली और इंडस्ट्रीज की जरूरत पूरी करते हैं. नदियों का बहाव, अंतर्देशीय जल परिवहन और भूजल रिचार्ज भी मानसून पर निर्भर करते हैं.

IMD की 92 प्रतिशत वाली भविष्यवाणी का मतलब है कि कुल बारिश सामान्य (100 प्रतिशत) से 8 प्रतिशत कम रहेगी. IMD ने यह भविष्यवाणी ±5 प्रतिशत की गलती की सीमा के साथ दी है. यह पूरे देश के लिए औसत है और हर जगह समान बारिश नहीं होगी.

 

IMD का कहना है कि देश में हर जगह समान बारिश नहीं होगी
IMD का कहना है कि देश में हर जगह समान बारिश नहीं होगी

सवाल 2: बारिश कब और कहां कम रहने वाली है?  
जवाब: IMD के मुताबिक, पूरे देश में लगभग हर जगह औसत से कम बारिश की उम्मीद है. सिर्फ पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ इलाकों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है. समय के हिसाब से जून और जुलाई में बारिश सामान्य रहने की संभावना है, लेकिन अगस्त और सितंबर सूखे रहेंगे. मुख्य वजह पूर्वी प्रशांत महासागर में एलनीनो की स्थिति है, जो जुलाई में अपने चरम पर पहुंचेगी. इसका असर भारत पर एक-दो महीने की देरी से पड़ता है, इसलिए दूसरा हिस्सा सूखा रहेगा.

 

IMD के मुताबिक, अगस्त-सितंबर का हिस्सा सूखा रह सकता है
IMD के मुताबिक, अगस्त-सितंबर का हिस्सा सूखा रह सकता है

सवाल 3: बारिश कम होने की असली वजह क्या है?
जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार औसत से कम बारिश का मुख्य कारण पूर्वी प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा एलनीनो है. एलनीनो आमतौर पर भारत के मानसून को कमजोर करता है. IMD के मुताबिक यह स्थिति जुलाई में चरम पर होगी और उसका प्रभाव अगस्त-सितंबर में सबसे ज्यादा दिखेगा. पिछले सात साल अच्छी बारिश वाले रहे थे, लेकिन अब एलनीनो की वजह से यह बदलाव आ रहा है. साथ ही, जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम के पैटर्न डगमगा गए हैं. भारी बारिश की घटनाएं बढ़ी हैं और सूखे के लंबे दौर बढ़े हैं, लेकिन IMD की भविष्यवाणी अब ज्यादा सटीक, समय पर और ऑथेंटिक हो गई है, जो पहले से बेहतर तैयारी करने में मदद करती है.

सवाल 4: फिर भी घबराने की जरूरत क्यों नहीं?
जवाब: अब भारत मानसून की ऊपर-नीचे होने वाली स्थिति के प्रति काफी लचीला बन चुका है. पहले कम बारिश की भविष्यवाणी से सरकार, बाजार और किसान घबरा जाते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. कई वजहें हैं:

  • ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत हजारों तालाब, कुएं, चेक डैम बनाए गए, जिससे ग्राउंड वॉटर लेवल बढ़ा और बारिश पर निर्भरता कम हुई. यानी बेहतर पानी प्रबंधन हुआ.
  • केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट्स दिखाती हैं कि ज्यादातर इलाकों में भूजल स्थिति सुधरी है.
  • नदियों और झीलों की सफाई अभियान से कई जल स्रोत फिर से इस्तेमाल लायक हो गए.
  • IMD की भविष्यवाणी अब ज्यादा सटीक और कार्रवाई योग्य है, जिससे नीति-निर्माण आसान हुआ है.
  • 2024 और 2025 में दोनों साल 100 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हुई, इसलिए देश के 166 बड़े जलाशयों में पानी का स्टोरेज पिछले साल से बेहतर और पिछले 10 साल के औसत से भी ज्यादा है. यह स्टोरेज इस साल की कमी को काफी हद तक संभाल लेगा.

भारत अब बारिश की कमी से ज्यादा भारी बारिश और बाढ़ से निपटने में चुनौती का सामना करता है.

सवाल 5: कम बारिश से कृषि, जलाशयों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर बारिश की कमी बहुत ज्यादा न हुई तो बड़ा खतरा नहीं है. कृषि पर असर तभी ज्यादा पड़ेगा जब सूखा वाकई गंभीर हो, लेकिन जलाशयों का अच्छा स्टोरेज, भूजल सुधार और पानी संरक्षण के काम इसे बफर कर देंगे. पीने का पानी, बिजली और उद्योगों की जरूरतें भी जलाशयों से पूरी हो सकेंगी. नीति-निर्माताओं को अब पहले से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. पानी का प्रबंधन, फसल बीमा और वैकल्पिक सिंचाई पर फोकस करना होगा.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें 8 साल से ज्यादा का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

970 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क: म्यांमार से सुपारी तस्करी मामले में ED की मिजोरम में बड़ी छापेमारी
970 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क: म्यांमार से सुपारी तस्करी मामले में ED की मिजोरम में बड़ी छापेमारी
जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गौरक्षा यात्रा लेकर पहुंचे फर्रुखाबाद, केंद्र और यूपी सरकार पर साधा निशाना
जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गौरक्षा यात्रा लेकर पहुंचे फर्रुखाबाद, केंद्र और यूपी सरकार पर साधा निशाना
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत हुई पूरी, समझौते के लिए दोनों पक्षों ने जताई प्रतिबद्धता
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत हुई पूरी, समझौते के लिए दोनों पक्षों ने जताई प्रतिबद्धता
कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार का ऐलान, खरगे और पवन खेड़ा को कर्नाटक से उतारा, देखें पूरी लिस्ट
कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार का ऐलान, खरगे और पवन खेड़ा को कर्नाटक से उतारा, देखें पूरी लिस्ट
Advertisement

वीडियोज

Breaking | Malviya Nagar Fire Update: होटल जला तो पता चला, सब मिले हैं जी! | Delhi News | Fire
Malviya Nagar Fire | Janhit: 'करप्शन' की 'आग' में पूरा परिवार खत्म! | Delhi News | Chitra Tripathi
Delhi Malviya Nagar Fire | Bharat Ki Baat: 1 परिवार, 8 जिंदगी...'सिस्टम' ने छीन ली! | Fire Accident
Sandeep Chaudhary: 'FLOP SYSTEM' की पोल-खेल Analysis! | Lavkesh Bajaj | Malviya Fire News | Delhi
Malviya Nagar Fire News | Mahadangal: कागजों मे ही कायदे कानूनहकीकत में तबाही और मौत? | Breaking
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
28 साल में पहली बार टूट, विधायकों के बाद अब सांसदों के बागी होने का खतरा, कैसे अकेली पड़ गईं ममता?
28 साल में पहली बार टूट, विधायकों के बाद अब सांसदों के बागी होने का खतरा, कैसे अकेली पड़ गईं ममता?
छत्तीसगढ़ निकाय चुनाव के नतीजे घोषित, BJP-कांग्रेस के बीच टक्कर, किसने कितनी सीटें जीतीं?
छत्तीसगढ़ निकाय चुनाव के नतीजे घोषित, BJP-कांग्रेस के बीच टक्कर, किसने कितनी सीटें जीतीं?
Don 3 Row: 'एकतरफा फैसला ठीक नहीं', FWICE के फैसले पर पूनम ढिल्लों ने जताई नाराजगी, रणवीर सिंह का किया सपोर्ट
'एकतरफा फैसला ठीक नहीं', FWICE के फैसले पर पूनम ढिल्लों ने जताई नाराजगी, रणवीर सिंह का किया सपोर्ट
ROKO के संन्यास के बाद टीम इंडिया बेदम, आंकड़ों ने खोली शुभमन गिल की कप्तानी की पोल
ROKO के संन्यास के बाद टीम इंडिया बेदम, आंकड़ों ने खोली शुभमन गिल की कप्तानी की पोल
BJP ने राज्यसभा चुनाव के लिए की उम्मीदवारों की घोषणा, सतीश पूनिया समेत जानें किसे-किसे दिया मौका
BJP ने राज्यसभा चुनाव के लिए की उम्मीदवारों की घोषणा, सतीश पूनिया समेत जानें किसे-किसे दिया मौका
न इस्तीफा, न नई पार्टी... अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने पर तमिलनाडु बीजेपी चीफ ने दिया ये जवाब
न इस्तीफा, न नई पार्टी... अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने पर तमिलनाडु बीजेपी चीफ ने दिया ये जवाब
बासमती की खेती से चमकेगी किसानों की किस्मत, इन सीक्रेट तरीकों से बढ़ेगा उत्पादन
बासमती की खेती से चमकेगी किसानों की किस्मत, इन सीक्रेट तरीकों से बढ़ेगा उत्पादन
Germany Visa: जर्मनी में पढ़ाई के लिए कैसे मिलता है वीजा, इंटरव्यू में पूछे जाते हैं कौन-कौन से सवाल?
जर्मनी में पढ़ाई के लिए कैसे मिलता है वीजा, इंटरव्यू में पूछे जाते हैं कौन-कौन से सवाल?
Embed widget