खिसियाया पाक कर सकता है घाटी को सुलगाने की कोशिश, सेना से लेकर सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
सेना मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक इस बाबत ठोस इनपुट हैं कि 15 अगस्त से पहले आतंकी IED ब्लास्ट, फिदायीन हमला और निशाना बनाकर आतंकी हमले जैसी कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं.

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक समेत सूबे को लेकर संसद में हुए विधायी बदलावों के मद्देनजर राज्य के हालात पर अशांति के बादल अब भी गहरे हैं. जहां राज्य में विरोध प्रदर्शनों के नाम पर हालात बिगड़ने की आशंका भी बनी हुई है. वहीं, सेना व सुरक्षा एजेंसियों के पास इस बात के भी इनपुट हैं कि आतंकी 15 अगस्त से पहले IED ब्लास्ट और फिदायीन हमले जैसी कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं.
सेना मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक इस बाबत ठोस इनपुट हैं कि 15 अगस्त से पहले आतंकी IED ब्लास्ट, फिदायीन हमला और निशाना बनाकर आतंकी हमले जैसी कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं. सूत्रों के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद के करीब 5 अतंकियों का एक गुट इस तरह की कार्रवाई को अंजाम देने के लिए 30-31 जुलाई को भारत में दाखिल हुआ है.
सूत्र बताते हैं कि सीमा और नियंत्रण रेखा पर फिलहाल पाकिस्तान की तरफ से कोई बड़ी कार्रवाई या संघर्ष विराम उल्लंघन नहीं किया गया है. लेकिन बीते एक हफ्ते के घटनाक्रमों और इस दौरान आतंकी गतिविधियों में हुए इजाफे के मद्देनजर खतरा बना हुआ है. 23 जुलाई के बाद से आतंकी लॉन्च पैड पर हथियारबंद अतंकियों की गतिविधियां बढ़ी हैं.
सेना ने राज्य में किसी भी हालात से निपटने के लिए अपने फॉरमेशन्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक मौजूदा घटनाक्रम के मद्देनजर सेना की भूमिका केवल आतंकवाद निरोधक ऑपरेशन तक ही है. जबकि कानून-व्यवस्था को संभालने का काम केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के जिम्मे है. हालांकि ज़रूरत पड़ने पर यदि तैनाती की आवश्यकता महसूस होती है, तो उसके अनुसार बदलाव पूरे किए जाएंगे. हालांकि ताज़ा घटनाक्रम के मद्देनजर फिलहाल सेना की यूनिटों की कोई अतिरिक्त तैनाती नहीं की गई है.
हालांकि सैन्य सूत्रों का मानना है कि राजनीतिक और विधायी स्तर पर हुए बदलावों से फौरी तौर पर आतंकवाद में किसी व्यापक बदलाव का अनुमान नहीं है. मगर, निश्चित रूप से इन बदलावों के बाद ज़मीनी स्थिति में परिवर्तन अपेक्षित है.
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