स्वाति मालीवाल के विवाद से लेकर राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने तक... कैसे आम आदमी पार्टी में तैयार हुआ टूट का प्लॉट?
AAP Split: पंजाब से राज्यसभा MP बनने के बाद राघव का कद तेजी से बढ़ा. वह कभी AAP के सबसे प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे. इस महीने की शुरुआत में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया.

आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उसके 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. पार्टी छोड़ने वालों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं. इस घटनाक्रम ने संसद में AAP की स्थिति को कमजोर कर दिया है और पार्टी के राष्ट्रीय भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
स्वाति मालीवाल विवाद: टूट की शुरुआत
AAP के मौजूदा संकट की जड़ें साल 2024 में सामने आए उस विवाद से जुड़ी हैं, जब स्वाति मालीवाल ने तत्कालीन दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी पर उनके आवास पर शारीरिक हमला करने का आरोप लगाया था. 13 मई 2024 को सामने आए इस मामले ने पार्टी के अंदर गहरी दरार पैदा कर दी, जो समय के साथ और चौड़ी होती गई.
राघव चड्ढा को हटाने से बढ़ी खाई
इस महीने की शुरुआत में पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया. इस फैसले ने उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी को और बढ़ा दिया. इसके बाद सुलह की संभावनाएं लगभग खत्म होती नजर आईं.
‘भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी’ के आरोप
पार्टी छोड़ते हुए स्वाति मालीवाल ने एक विस्तृत पोस्ट में “बेकाबू भ्रष्टाचार” का आरोप लगाया. उन्होंने महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न और हमले की घटनाओं का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी “गुंडा तत्वों” को बढ़ावा दे रही है. इन आरोपों ने विवाद को और गहरा कर दिया है.
चौंकाने वाला सामूहिक इस्तीफा
हालांकि कुछ नेताओं के नाराज होने की चर्चाएं पहले से थीं, लेकिन एक साथ सात सांसदों का इस्तीफा देना चौंकाने वाला रहा. अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और संदीप पाठक जैसे नेताओं ने पहले सार्वजनिक रूप से असहमति नहीं जताई थी.
ED छापों के बाद मित्तल का फैसला
अशोक मित्तल का इस्तीफा उनके घर और कारोबारी ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापों के बाद आया. ये छापे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े मामले में डाले गए थे, जिससे राजनीतिक दबाव की अटकलें और तेज हो गईं.
‘ऑपरेशन लोटस’ का आरोप
AAP नेता संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बीजेपी पर “ऑपरेशन लोटस” चलाने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि ED और CBI जैसी एजेंसियों के डर से सांसदों ने पार्टी छोड़ी. सिंह के मुताबिक, इस्तीफों का समय और पैमाना बाहरी दबाव की ओर इशारा करता है.
राघव चड्ढा का उदय और पतन
राघव चड्ढा कभी AAP के सबसे प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे. 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा. भगवंत मान सरकार बनने के बाद वह राज्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए थे, लेकिन 2024 में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद उनकी भूमिका पर सवाल उठे. पार्टी के भीतर उनकी निष्क्रियता और अहम मुद्दों पर चुप्पी को लेकर आलोचना हुई. धीरे-धीरे उन्हें कई अहम जिम्मेदारियों से हटा दिया गया.
‘नदी से बाढ़’ वाला बयान हुआ सच
उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने कहा था कि वह एक नदी की तरह हैं, जो सही समय पर बाढ़ बन सकती है. अब उनका पार्टी छोड़ना इस बयान को सही साबित करता नजर आ रहा है और यह AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. स्वाति मालीवाल को छोड़कर बाकी सभी सांसद पंजाब से थे. ऐसे में उनके जाने से राज्यसभा में AAP की ताकत पर बड़ा असर पड़ा है और पंजाब में पार्टी की पकड़ भी कमजोर हो सकती है.
चुनाव से पहले बड़ा संकट
यह संकट ऐसे समय आया है, जब AAP पंजाब, गुजरात और गोवा में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है. कभी तेजी से उभरती राष्ट्रीय पार्टी मानी जाने वाली AAP अब आंतरिक संकट से जूझ रही है, जो आने वाले महीनों में उसकी राजनीतिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.
Source: IOCL

























