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महाराष्ट्र सरकार की तिजोरी भरने के लिए वाइन शॉप शुरु करने की राज ठाकरे की मांग पर शिवसेना ने साधा निशाना

महाराष्ट्र सरकार की तिजोरी भरने के लिए वाइन शॉप शुरु करने की राज ठाकरे की मांग पर शिवसेना ने निशाना साधा है.

मुंबई: एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से राज्य में वाइन शॉप शुरु करने की मांग कर दी. राज ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से कहा कि राज्य को आर्थिक मज़बूती देने के लिए राज्य सरकार ने शराब बिक्री शुरु करनी चाहिए. ऐसा करने से राज्य को सालना 15000 करोड़ का रेवेन्यू मिलेगा जिससे सरकार को कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ने में मदद मिलेगी.

राज ने अपने पत्र में कहा ''लॉकडाउन की वजह से राज्य की आर्थिक स्थिती ठीक नहीं है. राज्य सरकार के पास अपने कर्मचारियों की तनख़्वाह देने तक के पैसे नहीं. जहां एक तरफ़ ज़मीन के सौदे नहीं हो रहे, दुकानें बंद है, राज्य के सारे व्यवहार जिनसे सरकार को रेवेन्यू मिलता है वो सब बंद हैं तो ऐसी स्थिती में वाइन इंडस्ट्री से मिलने वाले रोज़ाना 42 करोड रुपये सरकार का बड़ा आधार देगा. सरकार ने नैतिकता का बंधन में न फंसते हुए राज्य में शराब बिक्री शुरु करके राज्य चलाने के लिए पैसे खड़े करने चाहिए.''

राज ठाकरे के इस मांग की कई अर्थशास्त्रियों ने तारीफ़ की तो वहीं कई लोगों ने आलोचना. आज शिवसेना के मुखपत्र सामने के ज़रिए शिवसेना ने राज ठाकरे की इस मांग के पीछे के इरादे पर उंगली उठा दी. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा, ''राज ठाकरे ने लाखों शराब प्रेमियों की भावनाओं को व्यक्त करके बड़ा उपकार किया है. राज ठाकरे के इस मांग से उन्हें एक विशिष्ट वर्ग की वाहवाही जरुर मिलेगी. ऐसा वर्ग जिनके घरों में शराब का स्टॉक ख़त्म हुआ है या जिनके गले सूखे है. राज ठाकरे ने क्या वाकई में राज्य की आर्थिक स्थिती सुधारने के इरादे से ये पत्र लिखा है या फिर उन लोगों के लिए जिनके गले लॉकडाउन की वजह से सूख गए है.’

सामना के ज़रिए शिवसेना ने राज ठाकरे से कुछ सवाल पूछे है. सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि केवल वाइन शॉप खुले रखने से क्या होगा. वाइन शॉप तक शराब पहुंचाने के लिए शराब के कारख़ाने शुरु करने होंगे. कारख़ाने शुरु करना मतलब मज़दूरों को कारख़ानों तक पहुंचाना, शराब बनाकर शहरों में पहुंचाना, फिर शराब की बिक्री लोगों तक करना. लोग अनाज, सब्ज़ी मंडी में सोशल डिस्टन्सिंग का पालन कर रहे हैं लेकिन वाइन शॉप के बाहर होनेवाली भीड़, झगड़े लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन किस प्रकार करेंगे इस कल्पना तक नहीं की जा सकती. फिर वाइन शॉप शुरु करने से कोरोना संक्रमण का ख़तरा बढ़ नहीं जाएगा?.

सामना में आगे लिखा गया है कि लोग शराब के नशे में लॉकडाउन का उल्लंघन करेंगे. अपने घरों में दोस्त यारों के साथ जाम के प्याले टकराएंगे. कोरोना पार्टी करके घरों में पड़े रहेंगे. ऐसे में स्थिति और बेक़ाबू होगी. राज्य की जनता के लिए क्या करना चाहिए, आर्थिक हालात कैसे सुधारे जाने चाहिए. इन सब विषयों पर सरकार के साथ राज्य के प्रमुख विरोधी दलों ने सोचना चाहिए. अब तक इन प्रमुख विरोधी दलों को राज ठाकरे जैसी कल्पना नहीं आई. ये भी सोचनेवाली बात है.

इस संपादकीय में शिवसेना ने हरिवंशराय बच्चन की मधुशाला कविता का भी ज़िक्र किया है. ‘मुसलमान और हिंदू है दो, एक, मगर उनका प्याला, एक, मगर उनका मदिरालय, एक मगर उनकी हाला दोनों रहते एक न जब तक मस्जिद मंदिर में जाते, बैर बढ़ाते मस्जिद, मंदिर मेल कराती मधुशाला'

वहीं राज ठाकरे भी ये भलीभांति जानते थे की उनकी मांग को लेकर कुछ लोग सवाल भी उठाएंगे लेकिन राज ठाकरे का मानना है कि उन्होंने जो कहा वो राज्य के भले के लिए कहा.

वाइन शॉप पर राज बनाम शिवसेना के इस विवाद में राज ठाकरे को शिवसेना के मित्र पक्ष एनसीपी का भी साथ मिला. कैबिनेट मंत्री एनसीपी के जेष्ठ नेता छगन भुजबल ने कहा, ''राज ठाकरे की वाइन शॉप शुरु करने की मांग पुरी तरह से सही है. ऐसा करने से राज्य सरकार को आर्थिक आधार मिलेगा जो फ़िलहाल बेहद जरुरी है. वैसे भी आज बाज़ार में 100 की शराब 500 में मिल ही रही है. देखते हैं कि केंद्र सरकार के आदेश के बाद राज्य सरकार कौन सी दुकानें खुली रखते है. उसमें वाइन शॉप का समावेश होता है या नहीं.''

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