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कैसे 1997 में पेपर लीक प्रदर्शन ने धर्मेंद्र प्रधान को बनाया छात्र नेता, आज उसी तरह के मामले में हो रही उनके इस्तीफे की मांग

धर्मेंद्र प्रधान देश के शिक्षामंत्री हैं, जिनको लेकर सियासत गरमाई हुई है. नीट यूजी पेपर लीक के बाद से लगातार इस्तीफे का दवाब है. एक वक्त था, जब उन्होंने पेपर लीक पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था.

बात उस समय की है, जब साल 1997 था. उस समय ओडिशा में कांग्रेस की सरकार थी. तब मुख्यमंत्री हुआ करते थे, जानकी बल्लभ पटनायक. भुवनेश्वर में सीएम आवास पर कुछ ही किलोमीटर दूर कुछ छात्र जिनकी संख्या 1500 थी, जब वह परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में राज्य सचिवालय के बाहर जमा हुए थे. उस प्रदर्शन में शामिल थे, देश के वर्तमान शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिनके इस्तीफे की मांग लगातार की जा रही है. वजह है, नीट का पेपर लीक होना. 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो प्रधान ने आरएसएस के स्टूडेंट ग्रुप यानी छात्र संगठन एबीवीपी से जुड़े नेता के तौर पर 1997 में हुए ओडिशा की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्हीं के नेतृत्व में इस प्रदर्शन को किया गया था. प्रधान ने उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी की पढ़ाई की है. नवंबर 1994 से 1997 में दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव रहे.

1997 में हुए विरोध प्रदर्शन को याद करते हुए उनके जूनियर प्रशांत राउत के हवाले से न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खबर में बताया था कि सचिवालय के सामने ओडिशा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. करीबन उस समय 1500 स्टूडेंट प्रदर्शन में शामिल हुए. कार्रवाई से पहले विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था. 

जब प्रधान की बुरी तरह से हुई थी पिटाई, हुआ था फ्रैक्चर

राउत ने कहा, 'उस समय वह बेहद डरे हुए थे. उस समय प्रधान की बुरी तरह पिटाई हुई थी. उन्हें फ्रैक्चर भी हुआ था. उस समय कैंपस चुनाव हिंसक हो जाया करते थे. बताया जाता है कि उस समय यह तय हो गया था कि प्रधान जीतने वाले हैं, तो जनता दल के सपोटर्स ने उनपर हमला कर दिया. वह आज सिर्फ किस्मत से जिंदा हैं.' 

उनके छात्र जीवन में एक्टिव रहने और लंबे समय तक संगठनात्मक कामों में रहने के चलते बीजेपी में उनके करियर की नींव रखी गई. 2021 में एजुकेशन मिनिस्टर बनने से पहले पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के केंद्रीय मंत्री रहे. उन्होंने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय भी संभाला. कई दशक तक ओडिशा में उन्होंने बीजेपी का संगठन मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. यह कोशिश 2024 में सफल हुई.

ओडिशा में बीजेपी के नेता, आरएसएस का मजबूत बैक सपोर्ट

बीजेपी ने ओडिशा में अपनी सरकार बनाई. नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल के दो दशक के शासन को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई. ऐसे में माना जाता है कि प्रधान आरएसएस में अहम पैठ रखते हैं. बीजेपी अगर उन्हें हटाती भी है, तो यह एक बड़ा कदम माना जाएगा. 

धर्मेंद्र प्रधान का 1997 का प्रदर्शन उस समय चर्चा में आ गया, जब नीट यूजी पेपर लीक को लेकर विवाद चल रहा है. ऐसे में बड़ी तदाद में छात्र सीजेपी और सोनम वांगचुक की अपील पर संसद मार्च में शामिल हुए. अभी फिलहाल देशभर में उनके इस्तीफा की मांग की चर्चा गरम है.

कार्तिक सागर समाधिया, ABP न्यूज में बतौर कंसल्टेंट सेवाएं दे रहे हैं. नेशनल और इंटरनेशनल खबरों पर लगातार नजर रखते हैं. कई राज्यों के विधानसभा चुनाव के अलावा साल 2019 में हुए लोक चुनावों से जुड़ी खबरों को कवर किया. एबीपी न्यूज से पहले दैनिक भास्कर, एशियानेट न्यूज, ईटीवी भारत, इंडिया टुडे से जुड़े रहे हैं. इस दौरान एडिटोरियल, टीवी-डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े कार्य किए. इंडिया टुडे के यूट्यूब, सोशल मीडिया पर कैप्सूल और लॉन्ग फॉर्मेट वीडियो बनाने से जुड़ा अनुभव शामिल है. मीडिया का करीबन साढ़े 8 साल का अनुभव है. कोरोना और एमपी चुनाव के समय ग्राउंड से एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. मध्यप्रदेश के सीहोर शहर से ताल्लुक रखते हैं. कार्यक्षेत्र भोपाल, दिल्ली और हैदराबाद रहा है.

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