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वैज्ञानिकों ने कहा- कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी

वैज्ञानिकों ने कहा कि अब तक कोई ऐसा सबूत नहीं पाया गया है कि वायरस का नया स्ट्रेन अधिक घातक है. उनका कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग, सैनेटाइजर और मास्क इसके खिलाफ कारगर साबित हो सकते हैं.

नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने कहा कि ब्रिटेन से आए लोगों में मिले कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन पर काबू के लिए मास्क, सैनेटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे मानक बचाव तंत्र प्रभावी होंगे. इसके साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि नए स्ट्रेन को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है और यह डायग्नोस्टिक ​​रूप से अधिक गंभीर नहीं है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि ब्रिटेन से हाल ही में लौटे छह लोगों में कोरोना वायरस के नए स्वरूप (यूवीआई-202012/01) का पता लगा है. इससे यह चिंता पैदा हो गयी कि इस बीमारी के खिलाफ भारत की लड़ाई और जटिल हो सकती है जबकि रोजाना नए मामलों की संख्या में कमी आ रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बेंगलुरू स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं स्नायु विज्ञान अस्पताल (निमहांस) में जांच के लिए आए तीन नमूनों, हैदराबाद स्थित कोशिकीय और आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) में दो नमूनों और पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) में एक नमूने में सार्स-सीओवी-2 के ब्रिटिश स्वरूप के जीनोम का पता लगा है.

कई वैज्ञानिकों ने चिंताओं को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि अब तक ऐसे कोई सबूत नहीं है कि वायरस का यह स्वरूप अधिक घातक है. नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-आईजीआईबी संस्थान के निदेशक अनुराग अग्रवाल उनमें से एक हैं. उन्होंने कहा, ' सतर्क रहना और अच्छी आदतों का पालन करना (नए स्ट्रेन के संदर्भ में) पर्याप्त होना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि वायरस के नए स्ट्रेन की पहचान सबसे पहले ब्रिटेन में की गयी और उसने नए स्वरूप के अधिक गंभीर होने के संबंध में कोई डायग्नोस्टिक ​​संकेत नहीं दिया है.

यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) ने कहा है कि 19 दिसंबर को ब्रिटेन द्वारा शुरू किए गए प्रारंभिक ‘मॉडलिंग’ परिणामों से पता चलता है कि नया प्रकार पहले की अपेक्षा 70 प्रतिशत अधिक संक्रामक है. हालांकि, उसने यह भी कहा कि अधिक संक्रमण गंभीरता का कोई संकेत नहीं है.

विषाणु विज्ञानी उपासना रे भी इस आकलन से सहमत थीं कि चिंता करने का कोई कारण नहीं है क्योंकि इस संबंध में अभी तक कोई जानकारी नहीं है कि नया स्वरूप अधिक घातक है. सीएसआईआर-आईआईसीबी कोलकाता की वरिष्ठ वैज्ञानिक ने यह भी कहा, "यह कहा गया है कि संक्रमण दर अधिक है. लेकिन इस संबंध में प्रयोगशाला आधारित कोई साक्ष्य नहीं हैं." रे ने कहा कि यात्रा पर प्रतिबंध पहले ही सुझाया जा चुका है और ब्रिटेन से आने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए परीक्षण की सिफारिश की गई है. उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण कदम मास्क का उपयोग सहित अन्य बुनियादी सावधानियों को लागू करना है.

के विजय राघवन ने कहा कि इसका अब तक पता नहीं चल पाया है कि नए स्ट्रेन से बीमारी की गंभीरता बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मौजूदा वैक्सीन वायरस के नए स्वरूप से बचाव में नाकाम रहेगा.

9 से 22 दिसंबर तक भारत पहुंचे कोरोना वायरस संक्रमित सभी यात्रियों की होगी ‘जीनोम सीक्वेंसिंग’ 

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