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अयोध्या से नागपुर तक VHP-RSS के निशाने पर SC, राम मंदिर के लिए आंदोलन के दिए संकेत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि चाहे जो भी कारण हो क्योंकि अदालत के पास समय नहीं है या राम मंदिर मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है. संभवत: वह समाज की संवेदनशीलता को नहीं समझ पा रही है.

अयोध्या/नागपुर: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की पुरानी मांग हिंदूवादी संगठनों ने एक बार फिर तेज कर दी है. अयोध्या में पिछला सप्ताह काफी गहमागहमी भरा रहा. पहले शिवसेना और फिर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने पुलिस के कड़े पहरे के बीच राम मंदिर निर्माण के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किये. शिवसेना के निशाने पर सत्तारूढ़ बीजेपी थी और वहीं वीएचपी को बीजेपी से उम्मीद. नागपुर में भी राम मंदिर को लेकर कल वीएचपी ने हुंकार रैली की.

इस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे राष्ट्रीय स्वयं सेक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधा और कहा कि अब धैर्य खत्म हो रहा है. भागवत ने कहा, ‘‘एक साल पहले मैंने स्वयं कहा था कि धैर्य रखें. अब मैं ही कह रहा हूं कि धैर्य से काम नहीं होगा. अब हमें लोगों को एकजुट करने की जरूरत है. अब हमें कानून की मांग करनी चाहिए.’’

उन्होंने कहा, ‘‘चाहे जो भी कारण हो क्योंकि अदालत के पास समय नहीं है या राम मंदिर मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है अथवा संभवत: वह समाज की संवेदनशीलता को नहीं समझ पा रही है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इस बारे में विचारे कि मंदिर निर्माण के लिये कैसे एक कानून लाया जाये... कानून जल्द से जल्द लाया जाना चाहिए.’’उन्होंने कहा, ‘‘अब यह आंदोलन का निर्णायक चरण है.’’

वीएचपी की धर्मसभा वहीं राम मंदिर निर्माण के लिये माहौल बनाने में जुटी विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) ने अयोध्या में ‘धर्म सभा‘ के जरिये अपना शक्ति प्रदर्शन करते हुए मंदिर बनाने के संकल्प को पूरे देश में फैलाने का संकल्प जाहिर किया. धर्म सभा में शिरकत करने वाले तमाम संतों और धर्माचार्यों ने जोर देकर कहा कि मंदिर निर्माण के लिये अब और इंतजार नहीं किया जा सकता है और उसकी भव्यता से भी किसी भी तरह के समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है. साथ ही संतों ने यह इशारा भी दिया कि आने वाले एक-दो महीने यह तय करेंगे कि मंदिर निर्माण की कवायद क्या रुख अख्तियार करेगी.

धर्म सभा में शिरकत करने वाले साधु-संतों और धर्माचार्यों ने कहा कि उन्होंने यहां की मिट्टी पर संकल्प लिया है कि वह राम मंदिर निर्माण के संदेश को पूरे देश में फैलाएंगे. हालांकि धर्म सभा में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ.

विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय ने धर्म सभा में दिये गये भाषण में साफ कर दिया कि उन्हें मंदिर के लिये जमीन के बंटवारे का फार्मूला मंजूर नहीं है और उन्हें पूरी की पूरी भूमि चाहिये. उन्होंने कहा ‘‘हमें बंटवारे का फार्मूला मंजूर नहीं है. हमें (जमीन का) टुकड़ा नहीं चाहिये. राम मंदिर के लिये पूरी की पूरी भूमि चाहिये.‘‘ उन्होंने कहा कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को उच्चतम न्यायालय में दायर मुकदमा वापस लेना चाहिये. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हर हिन्दू का सपना है और यह हर हाल में बनकर रहेगा. हालांकि राय ने बंटवारे के किसी फार्मूले का खुलासा नहीं किया.

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निर्मोही अखाड़ा के महंत रामजी दास ने कहा कि मंदिर निर्माण की तिथि अगले वर्ष की शुरूआत में प्रयागराज कुंभ के दौरान घोषित की जाएगी. मंत्रोच्चार के बीच भक्तमाल की बगिया में धर्मसभा को संबोधित करते हुए रामजी दास ने कहा कि राम मंदिर निर्माण की तिथि की घोषणा 2019 कुंभ के दौरान प्रयागराज में होगी .

स्वामी राम भद्राचार्य ने 11 दिसम्बर के बाद राम मंदिर का रास्ता खुलने की उम्मीद जाहिर की. उन्होंने कहा कि 23 नवंबर को केन्द्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के साथ चर्चा हुई. उन्होंने आश्वासन दिया कि 11 दिसंबर को चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साधु संतों के साथ बैठेंगे और ऐसा फैसला होगा जो राम मंदिर निर्माण का रास्ता खोलेगा .

उन्होंने कहा कि हमें यह भी बताया गया कि हमसे धोखाधडी नहीं की जाएगी. संसद के शीतकालीन सत्र में अध्यादेश लाया जा सकता है. हमें धैर्य रखना चाहिए. न्यायालय से निराश हो चुके हैं. जनता की अदालत हमें धोखा नहीं देगी.

राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास ने मंदिर निर्माण का रास्ता तैयार करने के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उम्मीदें जोड़ीं. उन्होंने कहा कि इतनी बडी संख्या में उपस्थिति दर्शाती है कि लोग राम मंदिर से कितनी गहरायी से जुडे़ हैं .

उन्होंने कहा कि हम अदालतों का सम्मान करते हैं. हमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बहुत उम्मीदें हैं. ‘‘मैं योगी आदित्यनाथ से आग्रह करता हूं कि वह राम मंदिर निर्माण का रास्ता तैयार करें.’’

करीब पांच घंटे तक चली धर्म सभा में देश के विभिन्न आश्रमों और अखाड़ों के साधु-संतों ने हिस्सा लिया. महन्त रामदास ने बताया कि धर्म सभा में हरिद्वार, छत्तीसगढ़, ऋषिकेश, उज्जैन, गुजरात, चित्रकूट, प्रयागराज और लखनऊ समेत देश के कोने-कोने से एक लाख से ज्यादा साधु-संतों ने हिस्सा लिया.

शिवसेना की हुंकार उत्तर प्रदेश में यहां भव्य राम मंदिर के निर्माण को लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने रविवार को कहा कि अगर नरेंद्र मोदी सरकार इसे लेकर अगर इस बार दुविधा में रही तो वह 2019 में सत्ता में नहीं आ पाएगी. उन्होंने कहा, "सरकार बने या न बने, मंदिर जरूर बनना चाहिए." रामलला के 30 मिनट तक दर्शन करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शिवसेना सुप्रीमो ने कहा कि इस मामले में किसी को भी हिंदुओं की भावनाओं के साथ नहीं खेलना चाहिए. ठाकरे ने कहा, "हिंदुओं को पीटे जाने की बात अब अतीत हो चुकी है, हिंदू अब शक्तिशाली हैं और उनके पास आवाज है."

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अयोध्या में मंदिर को लेकर सियासी गतिविधियों और भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गये थे. ड्रोन से नजर रखी जा रही थी और चप्पे-चप्पे पर पुलिस जवानों को तैनात किया गया था. खुफिया विभाग की टीमों को अलर्ट रखा गया था.

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