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राज्यसभा में बदलेगा समीकरण! 37 सीटों के चुनाव से बदलेगी तस्वीर, किन नेताओं की वापसी नामुमकिन, समझें गणित

Rajya Sabha Election 2026: इस साल राज्यसभा चुनाव में सीटों का बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा, क्योंकि पूरे साल में 72 से 75 सीटें खाली हो रही हैं. इस चुनाव में सदन में पार्टियों की सीटें भी हिलने जाएंगी.

राज्यसभा में 2026 एक बड़ा बदलाव का साल साबित होने वाला है. पूरे साल में करीब 72 से 75 सीटें खाली हो रही हैं, जो अप्रैल, जून, जुलाई और नवंबर में रिटायरमेंट से होंगी. अभी फरवरी 2026 में राज्यसभा की कुल 245 सीटों में बीजेपी की 103 हैं, कांग्रेस की 27, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की 12, AAP की 10, DMK की 10, BJD की 7, YSRCP की 5 और AIADMK की 7 सीटें हैं. नॉमिनेटेड 7 हैं और कुल NDA की ताकत 121 के आसपास है, जबकि INDIA ब्लॉक के पास 80 सीटें हैं. लेकिन आने वाले चुनावों से यह आंकड़ा काफी हिलने वाला है.

NDA को 7 से 9 सीटों का फायदा होने की उम्मीद है, जिससे उनकी ताकत 145 तक पहुंच सकती है. वहीं, INDIA ब्लॉक को 5 सीटों का नुकसान हो सकता है, जो उनकी संख्या को 75 के आसपास ला देगा.

राज्यसभा की किन 37 सीटों पर होंगे चुनाव?

सबसे पहले 16 मार्च 2026 को 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जो 10 राज्यों से हैं. महाराष्ट्र से 7, ओडिशा से 4, तमिलनाडु से 6, पश्चिम बंगाल से 5, असम से 3, बिहार से 5, छत्तीसगढ़ से 2, हरियाणा से 2, हिमाचल प्रदेश से 1 और तेलंगाना से 2. ये सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं. साल के बाकी चुनावों में और 35-38 सीटें शामिल होंगी, जो कुल 22 राज्यों से हैं, जैसे उत्तर प्रदेश से 10, कर्नाटक से 4, गुजरात से 4, आंध्र प्रदेश से 4 सीटें.

बीजेपी को कहां-कहां फायदा मिलेगा?

हाल के विधानसभा चुनावों ने NDA की पोजिशन मजबूत की है. मसलन, महाराष्ट्र में NDA के 228 विधायक हैं (बीजेपी 131, शिवसेना-शिंदे 57, NCP-अजित 40), जो 7 सीटों में से 4-5 जीत सकता है यानी पहले से ज्यादा. बिहार में NDA को एक एक्स्ट्रा सीट मिल सकती है, जहां पहले से 3 थे, अब 4. आंध्र प्रदेश में 3 गेन, गुजरात में 1, ओडिशा में 2, राजस्थान में 1. ये गेन विधानसभा स्ट्रेंथ से आते हैं, जैसे महाराष्ट्र में NDA ने 2025 चुनाव जीता, बिहार में NDA मजबूत, हरियाणा में बीजेपी, झारखंड में बीजेपी. हालांकि, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में 1-1 सीट का नुकसान हो सकता है.

राज्यसभा की सीटों में विधानसभा की ताकत का पूरा गणित क्या है?

राज्यसभा के सदस्य (सांसद) राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायकों की वोटिंग से चुने जाते हैं. यानी, केंद्र में कौन सी पार्टी मजबूत होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हर राज्य की विधानसभा में किस पार्टी के कितने विधायक हैं. अगर विधानसभा में आपकी पार्टी की ताकत बढ़ती है, तो राज्यसभा में भी आपकी सीटें बढ़ती हैं.

राज्यसभा की सीटें हर राज्य में तय होती हैं. जैसे महाराष्ट्र से 19 सीटें, लेकिन चुनाव साल दर साल कुछ सीटों पर होते हैं, जब पुराने सदस्य रिटायर होते हैं. चुनाव में जीतने के लिए, हर उम्मीदवार को एक निश्चित संख्या में वोट चाहिए, जिसे ‘क्वोटा’ कहते हैं.

यह कोटा कैसे निकालते हैं?

फॉर्मूला बहुत सिंपल है: कोटा = (कुल विधायक) / (सीटें +1) +1.

राज्यसभा के सदस्य विधानसभा के इलेक्टेड मेंबर्स चुनते हैं, इसलिए हर राज्य में विधायकों की संख्या से कोटा तय होता है. यह इसलिए है कि हर सीट के लिए वोट्स बराबर बंटें और कोई पार्टी ज्यादा वोट्स से ज्यादा सीटें जीत सके. अगर किसी उम्मीदवार को कोटा से एक वोट भी कम मिला, तो वो हार जाता है. 

बिहार के उदाहरण से समझें: बिहार में कुल 243 विधायक हैं और 5 सीटों पर चुनाव होना है. क्वोटा: 243 ÷ (5 + 1 = 6) = 40.5, फिर +1 = 41.5, लेकिन राउंडिंग से 42 वोट प्रति सीट. NDA के पास 202 विधायक हैं, तो 202 ÷ 42 ≈ 4.81 यानी 4 सीटें. पहले NDA की ताकत कम थी, तो 120 ÷ 42 ≈ 2.85 यानी सिर्फ 2-3 सीटें. लेकिन बिहार में NDA ने हाल के चुनावों में मजबूत पकड़ बनाई, इसलिए राज्यसभा में गेन मिलेगा. अगर कोई विधायक क्रॉस-वोट करे या इंडिपेंडेंट सपोर्ट करे, तो 5वीं सीट भी NDA को मिल सकती है.

कौन सी पार्टियां घाटे या फायदे में रहेंगी?

कांग्रेस और INDIA ब्लॉक को सबसे ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि 5 से 6 सीटें कम हो सकती हैं. जैसे गुजरात में कांग्रेस की 1 सीट खत्म हो सकती है, पश्चिम बंगाल में तृणमूल को लॉस, कर्नाटक में कांग्रेस को 1 कम. BJD ओडिशा में 1-2 कम, YSRCP आंध्र में 3 कम, CPI(M) पश्चिम बंगाल से 1 कम. ये पार्टियां जहां विधानसभा में कमजोर हुईं, वहां सीटें गंवाएंगी.

वहीं, फायदे वाली पार्टियां NDA दल की हो सकती हैं. इनमें बीजेपी को 7-9 सीटों का फायदा हो सकता है यानी कुल NDA 145 तक पहुंच सकती है. कांग्रेस को DMK तमिलनाडु में 1-2 एक्स्ट्रा सीट का फायदा हो सकता है, लेकिन ओवरऑल INDIA गठबंधन डाउन रहेगा.

किन बड़े नेताओं की राज्यसभा में वापसी मुश्किल हैं?

बड़े नेताओं की वापसी मुश्किल लग रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (कर्नाटक) के लिए री-इलेक्शन की कोशिश हो रही है, लेकिन स्पेकुलेशन है कि वह नहीं लौटेंगे. दिग्विजय सिंह (मध्य प्रदेश) को कमलनाथ की जगह थर्ड टर्म नहीं मिलेगा. एचडी देवगौड़ा (कर्नाटक) JDS के पास नंबर नहीं है इसलिए रिटायरमेंट संभव है. शरद पवार (महाराष्ट्र) टर्म एंड, NCP(SP) कमजोर, रणजन गोगोई (नॉमिनेटेड) मार्च में रिटायर, परिमल नथवानी (आंध्र) बीजेपी सेकंड टर्म नहीं देगी, बिकाश रंजन भट्टाचार्य CPI(M). ये सब स्पेकुलेशन हैं, लेकिन पार्टी स्ट्रेंथ से वापसी टफ लग रही है.

कुल मिलाकर, 2026 राज्यसभा में NDA और मजबूत होगा, जो विधेयकों पास करने में आसानी देगा. विपक्ष को रणनीति बदलनी पड़ेगी.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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