एक्सप्लोरर

राज की बातः पेगासस जासूसी कांड की टाइमिंग पर सवाल, अंतर्राष्ट्रीय डिजाइन होने की संभावना से इंकार नहीं

पेगासस जासूसी विवाद मामला संसद से लेकर सड़कों तक दिख रहा है. सरकार पर लगातार डेटा जासूसी कराने के आरोप लग रहे हैं. वहीं, राज की बात में ये ही बात होगी कि पेगासस खरीदा गया कि नहीं.

नई दिल्ली: संसद पेगासस जासूसी विवाद मामले से गूंज रही है. निजता के हनन का मामला आभासी संसार से लेकर संसद और सड़कों तक छाया है. सरकार पर डेटा जासूसी कराने के आरोप लग रहे हैं. विपक्ष से लेकर सोशल एक्टिविस्ट ने आसमान सिर पर उठाया हुआ है.

चूंकि, मामला निजता के अधिकार से जुड़ा है, लिहाजा तमाम लोग चिंता में हैं. राज की बात ये है कि पेगासस खरीदा गया या नहीं और खरीदा तो किसने खरीदा. ये भी अभी राज ही है. निजता के हनन के खिलाफ आवाजें उठना स्वाभाविक हैं, लेकिन राज की बात कथित डेटा जासूसी के समय को लेकर है.

नया आईटी एक्ट लाने की तैयारी से ये विवाद पैदा होते दिखा

समय संसद सत्र से पहले उठने को लेकर नहीं, बल्कि जबकि ये घटना यानी जासूसी का समय था उसको लेकर सवाल बड़े हैं. भारत सरकार ने जैसे ही डेटा न्यूट्रिलिटी का विरोध किया और देश में इंटमीडिएरी कानून और नया आईटी एक्ट लाने की तैयारी की, तभी से इस विवाद का जन्म हो गया था. नागफनी जैसे बिना बोए बढ़ती जाती है, वैसे ही भारत के आईटी आसमान में विवादों के बादल छाने लगे. दुनिया डेटा न्यूट्रिलिटी को लेकर कैसे बंट चुकी है ये भी समझेंगे और भारत पर किस तरह का दबाव है, ये भी आगे समझेंगे.

भारत सरकार राजनीतिक स्तर पर इन सवालों का समाधान कैसे करती है, यह उसके रवैये और क्षमता पर निर्भर है. मगर सरकारी एजेंसियां इस मुद्दे की टाइमिंग को डेटा व्यापार से जुड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को जोड़कर देख रही हैं. इस राज से हम आपको रूबरू कराएं, लेकिन उससे पहले आपको 2019 के आम चुनावों के समय पर हम लेकर चलते हैं. वहां से जब अब तक का सफर करेंगे तो शायद इस विवाद के पीछे की डिजाइन का कुछ आभास हो सके.

2019 का आम चुनाव जीतने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी जिस पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक में पहुंचे वो थी जापान के ओसाका में हुई G20 की शिखर बैठक. इसमें भारत ने डेटा और उसकी सुरक्षा के मुद्दे पर खुलकर अपना सख्त रुख पेश किया था. क्योंकि भारत डेटा लोकलाइेशन का हामी है वहीं कई विकसित मुल्क मुक्त डेटा प्रवाह की वकालत कर रहे हैं. मतलब भारत चाहता था कि उसके मुल्क का डेटा उसके मुल्क में ही संरक्षित हो, जबकि विकसित संसार इसके पक्ष में नहीं था.

कई मुल्कों ने जापान की तरफ से प्रसावित डेटा फ्री फ्लो विद ट्र्स्ट नामक इस प्रस्ताव और ओसाका ट्रैक दस्तावेज पर दस्तखत कर दिए जिसमें अधिक सुरक्षा के साथ सीमा-रहित डेटा प्रवाह की बात कही गई है. अमेरिका समेत कई विकसित मुल्क इसके पैरोकार हैं. वहीं भारत इस बात का हामी है कि डेटा ट्रेड के नियम विश्व व्यापार संगठन में पूरी बहस व आम सहमति से तय हों.

जी20 में शरीक 25 पक्षों ने इस पर दस्तखत किए

वैसे भी डेटा को भविष्य का सोना कहा जाता है और इस सोने पर अधिकार के लिए विकसित और विकासशील देश खेमों में बंट गए थे. जापान के ओसाका शहर में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर सबसे मुखर विरोध भारत का सुनाई दिया. जिसने डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा पर आयोजित सत्र में न तो हिस्सा लिया और न इस मुद्दे पर जारी ‘डेटा फ्री फ्लो विद ट्र्स्ट’ के ओसाका ट्रैक द्स्तावेज पर दस्तखत किए. जी20 में शरीक 25 पक्षों ने इस पर दस्तखत किए. जबकि भारत के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया ने भी इसका बहिष्कार किया.

अब जरा ध्यान दें कि ये पेगासस विवाद का खुलासा तो अभी हुआ है, लेकिन ये डेटा जासूसी इसके बाद की बताई जा रही है. मसलन भारत चाहता है कि गूगल से लेकर व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टा, फेसबुक या एमेजन जैसी कंपनियां जिनके सर्वर उनके मुल्क में लगे हैं, उन्हें भारत में डेटा संरक्षित करना होगा. जाहिर है कि ये बड़ा खर्च है. साथ ही जहां डेटा रखा जाएगा, वहां के कानूनी पचड़े भी इन कंपनियों को झेलने होंगे. राज की बात ये है कि सरकार डेटा का दुरुपयोग कर रही यानी जासूसी कर रही है, पेगासस विवाद जैसे मसले इस धारणा को बढावा देते हैं.

वैसे सच्चाई ये है कि साइबर सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब है. भारत के राष्ट्रीय सायबर सुरक्षा संयोजक लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पंत कह चुके हैं कि कि देश के सामने मौजूद नई सायबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक सायबर सुरक्षा नीति लाई जा रही है. इसे तैयार कर लिया गया है और सरकार में शीर्ष स्तर पर मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा. सायबर सुरक्षा के खतरों का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते साल करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान सायबर हमलों और धोखाधड़ियों के कारण उठाना पड़ा. वहीं दुनिया में बीते 9 महीनों के दौरान दर्ज किए गए साइबर अपराध से हुए नुकसान का आंकड़ा ही करीब 6 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है.

कई एप तीसरे स्थान पर डेटा भेज रहे थे

इतना ही नहीं, हाल ही में सरकार के सायबर सुरक्षा तंत्र की तरफ से किए गए एक आकलन में पाया गया कि 15 ऐसे वैक्टर पॉइंट हैं जिनके सहारे मोबाइल फोन को हैक कर उसमें मालवेयर डालना सम्भव है. इसमें एप्स ही नहीं बल्कि वाईफाई कनेक्शन, मैमोरी चिप और ब्लूटूथ शामिल हैं. आकलन में पाया गया कि कई एप तीसरे स्थान पर डेटा भेज रहे थे. देश के एटॉमिक कार्यक्रम, अंतरिक्ष मिशन, वित्तीय क्षेत्र, ट्रांसपोर्ट समेत कुछ अहम सेक्टर में सूचना सुरक्षा सरकार की बड़ी चिंता और प्राथमिकता है. वहीं दुनियाभर में रेन्समवेयर यानी फिरौती वसूल करने की मंशा से भेजे गए मेलवेयर हमलों का बढ़ना इन चिंताओं में इजाफा करता है.

जाहिर है कि इन चिंताओं को भारत कानूनों के माध्यम से दुरुस्त करने की कोशिश करेगा ही. यह पहली बार नहीं है. 2006 में ब्लैकबेरी के साथ भी इस तरह का विवाद हो चुका है. मगर अभी दुनिया साइबर विलेज बनकर रह गई है, जिसके लिए सुरक्षा के इंतजाम जरूरी हैं. हालांकि, डेटा जासूसी भारत में कराया जाना एक अघोषित सच्चाई है, उसको लेकर विरोध भी लाजिमी है. मगर साइबर संसार में भारत अपने आसमान को यूं ही खुला तो नहीं छोड़ सकता है. सरकार इसको रोकने की कोशिश कर रही है तो पेगासस जैसे विवाद उसकी नीयत पर सवाल खड़े कर रहे हैं. राज की बात ये है कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय डिजाइन होने से इनकार नहीं किया जा सकता.

यह भी पढ़ें.

प्रियंका गांधी का केंद्र पर निशाना, कहा- सरकार के पास ‘शहीद किसानों’ का आंकड़ा नहीं, कृषि कानून रद्द हो

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

'मोदी जी माफ कर देंगे', CJP का PM केयर्स फंड को लेकर RTI एक्टिविस्ट पर तंज
'मोदी जी माफ कर देंगे', CJP का PM केयर्स फंड को लेकर RTI एक्टिविस्ट पर तंज
PM मोदी को आपत्तिजनक शब्द कहने वाली नाबालिग पर नहीं होगा एक्शन, पुलिस ने दी राहत
PM मोदी को आपत्तिजनक शब्द कहने वाली नाबालिग पर नहीं होगा एक्शन, पुलिस ने दी राहत
Xप्लेन: Google और OpenAI जैसी कंपनियों पर भारत की निर्भरता कितनी खतरनाक?
Google और OpenAI जैसी कंपनियों पर भारत की निर्भरता कितनी खतरनाक?
BJP-शासित राज्यों में उपचुनावों पर Gen-Z प्रोटेस्ट का पड़ेगा असर? आज आ रहा रिजल्ट
BJP-शासित राज्यों में उपचुनावों पर Gen-Z प्रोटेस्ट का पड़ेगा असर? आज आ रहा रिजल्ट

वीडियोज

Mahadev & Sons: Narmada ने दी बड़ी खुशखबरी, किन्नर के भेष में Mogra का बाप देगा झटका!
Bollywood News: सालों बाद आमने-सामने कंगना-ऋतिक, वायरल मीम्स पर ऋतिक के रिएक्शन से भड़कीं कंगना (02.08.26)
Ranbir Kapoor के Lord Ram रोल के सपोर्ट में Dipika Chikhlia, बोलीं- एक्टर हर किरदार निभा सकता है
Pakistan में छाया Ramayana Trailer, Ranbir Kapoor, Yash और Sai Pallavi की हो रही तारीफ
Ramayana Trailer के बाद Kangana Ranaut का पुराना Sita लुक चर्चा में, एक पोस्ट से मचा बवाल

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
होर्मुज को लेकर ओमान-ईरान के बीच फाइनल हुई डील, बनेगा नया रास्ता?
होर्मुज को लेकर ओमान-ईरान के बीच फाइनल हुई डील, बनेगा नया रास्ता?
Datia Bypoll Result 2026 Live: दतिया में वोटो की गिनती जारी, BJP ने बनाई बढ़त, कितना पीछे हैं कांग्रेस के घनश्याम सिंह?
Live: दतिया में वोटो की गिनती जारी, BJP ने बनाई बढ़त, कितना पीछे हैं कांग्रेस के घनश्याम सिंह?
अभिजीत दीपके को इस छात्रा ने याद दिलाई उनकी बात, बोली- 'आपने कहा था कि...'
अभिजीत दीपके को इस छात्रा ने याद दिलाई उनकी बात, बोली- 'आपने कहा था कि...'
'मैं राक्षस बन गया था, सेट पर शराब पीता था', राम कपूर ने बताया क्यों बंद हुआ था 'बड़े अच्छे लगते हैं' शो
राम कपूर ने बताया क्यों बंद हुआ था 'बड़े अच्छे लगते हैं'? बोले- 'मैं सेट पर शराब पीता था'
जिन 12 मैदानों पर होंगे विश्वकप के मैच वहां कैसा है भारत का रिकॉर्ड?
जिन 12 मैदानों पर होंगे विश्वकप के मैच वहां कैसा है भारत का रिकॉर्ड?
Xप्लेन: Google और OpenAI जैसी कंपनियों पर भारत की निर्भरता कितनी खतरनाक?
Google और OpenAI जैसी कंपनियों पर भारत की निर्भरता कितनी खतरनाक?
अखिलेश को OP राजभर ने दी कव्वाली सीखने की सलाह, कहा- 2027 के बाद...
अखिलेश को OP राजभर ने दी कव्वाली सीखने की सलाह, कहा- 2027 के बाद...
World Breastfeeding Week 2026: बच्चे के लिए कितना जरूरी है मां का दूध, इसमें कितना पोषण?
बच्चे के लिए कितना जरूरी है मां का दूध, इसमें कितना पोषण?
Embed widget