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Explained: मॉर्डन होने के साथ बन रहे कातिल! शादी नहीं करनी तो दिया मौत का तोहफा, आखिर सिया इनकार क्यों नहीं कर पाई?

Pune Murder Case: NCRB के मुताबिक, रिश्तों से जुड़ी हत्याओं का रेश्यो 2010-14 में 7-8% से बढ़कर 2016-24 में 10-11% हो गया. मॉडर्नाइजेशन ने क्राइम नहीं बढ़ाया, बल्कि अपराध के तरीके बदले हैं.

पुणे के लोहागढ़ किले की 400 फीट गहरी खाई में 26 साल के केतन अग्रवाल का शव मिला. पहले लगा एक्सीडेंट है, फिर पता चला कि उसकी 20 साल की मंगेतर सिया गोयल और प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर उसे धकेला था. सबसे हैरान करने वाला सवाल उठा कि सिया ने शादी से इंकार क्यों नहीं किया. केतन के पिता ने बाद में कहा कि अगर वह मना करती तो शादी रोक दी जाती, फिर भी उसने हत्या की साजिश रची. यह सिर्फ एक केस नहीं है, बल्कि एक पैटर्न है. सोनम रघुवंशी, मुस्कान रस्तोगी, शिवानी और राधिका जैसी महिलाएं अपने पतियों या मंगेतरों की हत्या की आरोपी हैं...

NCRB का डेटा: 10 में से 1 हत्या रिश्तों के विवाद से

सिया गोयल और चेतन चौधरी ने चार महीने तक केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची. पुलिस जांच में सामने आया कि जनवरी से जून 2026 के बीच दोनों ने 2,004 कॉल कीं और 238 घंटे बात की. तीन कोशिशों के बाद केतन को मौत के घाट उतार दिया. हालांकि, यह पहला मामला नहीं है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, 2024 में देशभर में दर्ज 27,049 हत्याओं में से 2,802 (लगभग 10%) प्रेम प्रसंग या रिश्तों के विवाद से जुड़ी थीं. 2016-2024 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 10-11% हो गया. यानी रिश्तों में हिंसा बढ़ रही है. 

दिलचस्प बात है कि 2024 में कुल हत्याओं में 2.4% की गिरावट आई, लेकिन रिश्तों से जुड़ी हत्याओं का अनुपात बढ़ा. यानी कुल हत्याएं घट रही हैं, लेकिन रिश्तों की हिंसा बढ़ रही है.

इस मामले में रिसर्च रिपोर्ट्स क्या कहती हैं?

ऑस्ट्रेलिया और तुर्किये की रिपोर्ट्स हैरान करने वाली हैं:

ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च (2010-2012)

क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्चर्स ने 149 ऑस्ट्रेलियाई हत्याओं का अध्ययन किया. नतीजे:

  • 40% हत्याएं जलन की वजह से की गईं.
  • 23% हत्याएं बीमा पैसा या संपत्ति के लिए थीं.
  • इन मामलों में पहले से कोई घरेलू हिंसा नहीं थी.

कई महिलाएं पहले से हिंसा का शिकार हुए बिना भी हत्या करती हैं. खासकर जब उन्हें लगता है कि तलाक में उन्हें कुछ नहीं मिलेगा.

तुर्किये की स्टडी में 24% महिलाएं करतीं प्लान्ड मर्डर

अंकारा यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने 123 कैदियों (73 महिलाएं, 50 पुरुष) पर स्टडी की:

  • 82.19% महिलाएं और 60.97% पुरुष अपने पार्टनर की हत्या के आरोपी थे.
  • 24% महिलाओं ने योजना बनाकर हत्या की, जबकि पुरुषों में यह 7% था.
  • महिलाओं में हत्या की सबसे बड़ी वजह पार्टनर से शारीरिक हिंसा, जलन और समाज का छोड़ देना था.
  • पुरुषों में हत्या की सबसे बड़ी वजह पार्टनर के साथ शारीरिक हिंसा था.  

रिसर्चर्स ने पाया कि महिलाएं खुद को हिंसा से बचाने के लिए अपने पार्टनर के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल करती हैं. इसके अलावा अमेरिका की ओकलैंड यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी प्रोफेसर टॉड शेकलफोर्ड के मुताबिक:

  • अमेरिका में पति-पत्नी हत्याओं का रेश्यो 50-50 है. यह दुनिया के किसी भी सक्सेसफुल वेस्टर्न देश में नहीं है.
  • यूरोप, एशिया और अफ्रीका में 80-90% हत्याएं पुरुष करते हैं.
  • जब महिलाएं अपने पति को मारती हैं, तो यह ज्यादातर डिफेंस में होता है.
  • महिलाएं हत्या करने वाली अक्सर अलग-थलग, आर्थिक रूप से निर्भर और बाहर नौकरी नहीं करने वाली होती हैं.

रिश्तों में विवाद पर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

सीनियर साइकियाट्रिस्ट डॉ. पंकज कहते हैं, 'लड़की दो कम्पार्टमेंट की जिंदगी जी रही है. उसके दिमाग में जो चल रहा है वह लड़के से शादी नहीं करेगी, उसे रास्ते से हटाना चाहती है और अपने पुराने प्रेमी के पास जाना चाहती है. लेकिन वह समाज को कुछ और दिखा रही है.' जब कोई इतनी देर तक दोहरी जिंदगी जीता है, तो उसका दिमाग झूठ को ही सच मानने लगता है.

साइकियाट्रिस्ट डॉ. चैतन्य श्योरान के मुताबिक, 'शादियां आज भी एक सामाजिक घटना है, व्यक्तिगत पसंद नहीं.' लोग परिवार की नसें ठंडी करने के लिए शादी कर लेते हैं. जब यही दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है, तो इंसान बाहर निकलने का कोई और रास्ता ढूंढने लगता है. चाहे वह रास्ता कितना भी खौफनाक क्यों न हो. हत्या के घंटों बाद मासूम बनने का नाटक करना बिहेवियर डिसऑर्डर का हिस्सा है.

साइकियाट्रिस्ट डॉ. अंशु कुलकर्णी के मुताबिक, 'जब कोई बच्चा बहुत सख्त माहौल में बड़ा होता है, तो उसमें माता-पिता के इनकार का गहरा डर पैदा हो जाता है. जहां उसकी राय को कभी महत्व नहीं दिया जाता है.' 

साइकियाट्रिस्ट डॉ. दीपक रहेजा कहते हैं कि सिया दो बिल्कुल अलग दुनियाओं के बीच फंस गई थी. एक तरफ 'ट्रॉफी रिश्ता' (अमीर परिवार से शादी), दूसरी तरफ अपनी असली जिंदगी.

'ना' कहने से ज्यादा आसान क्यों है जान लेना?

एक्सपर्ट्स 4 बड़ी वजहें बताते हैं:

  • 'इज्जत' का बोझ: पुलिस पूछताछ में चेतन ने खुलासा किया कि सिया ने भाग जाने की बात तो की, लेकिन मना कर दिया. उसे डर था कि इससे उसके परिवार की इज्जत को ठेस पहुंचेगी.
  • परिवार का दबाव: NCRB के मुताबिक, 2020-2022 के बीच 'इज्जत' के नाम पर 76 हत्याएं हुईं. यानी हर साल करीब 25 लोग सिर्फ इसलिए मारे गए क्योंकि उन्होंने परिवार की मर्जी के खिलाफ रिश्ता चुना.
  • इमोशनल डिटेचमेंट: डॉ. श्योरान के मुताबिक, 'गहरी खाई में धकेलने की सोच, एक सामान्य दिमाग के लिए बीमारी है.'
  • साजिश का आसान रास्ता: 2,004 कॉल, 238 घंटे की बातचीत, कैफे में बैठकर 'प्लान C' तक बनाना.. यह कोई जल्दबाजी में की गई हत्या नहीं थी. यह ठंडे दिमाग से रची गई साजिश थी.

तो क्या मॉडर्नाइजेशन ने अपराध बढ़ाया है?

NCRB डेटा साफ बताता है कि रिश्तों से जुड़ी हत्याओं का रेश्यो 2010-14 में 7-8% से बढ़कर 2016-24 में 10-11% हो गया. लेकिन मॉडर्नाइजेशन ने क्राइम नहीं बढ़ाया, बल्कि अपराध के तरीके बदले हैं.

पहले के जमाने में लड़कियों के पास चुनाव ही नहीं था. वह जबरन शादी कर लेती थीं. अब चुनाव तो है, लेकिन सामाजिक दबाव वही है. आजादी मिली है, लेकिन समाज का ढांचा नहीं बदला. इसी टकराव में जब इंसान फंसता है, तो वह गलत कदम उठाता है.

सिया गोयल का मामला सिर्फ एक हत्याकांड नहीं, बल्कि हमारे समाज का आईना है. जहां 'ना' कहना इज्जत खोने जैसा लगे, वहां लोग जान लेने जैसी हद तक जा सकते हैं. जहां बच्चों को अपनी बात कहने की आजादी न हो, वहां वे बड़े होकर सीधी बात की बजाय साजिशें रचना सीख जाते हैं.

बदलाव लाना है तो घर से शुरू करना होगा. बच्चों को 'ना' कहने की आजादी देनी होगी, क्योंकि अगर वे घर पर 'ना' नहीं कह पाए, तो वे बाहर जान लेने जैसा कदम उठा सकते हैं.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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