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साल 2019: धरना-प्रदर्शन के मामले में राजधानी दिल्ली ने बीते सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ डाले

क्या 2020 में भी दिल्ली में प्रदर्शन की बाढ़ देखी जा सकती है? 2019 के आखिरी में होने वाली कुछ घटनाएं इसी बात की तरफ की इशारा कर रही हैं. नागरिकता संशोधन कानून और जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय में नकाबपोश लोगों के हमले के बाद दिल्ली उबल रही है.

नई दिल्ली: साल 2019 दिल्ली रिकॉर्ड प्रदर्शन का गवाह बनी. सरकार विरोधी आंदोलन में 2018 के मुकाबले 2019 में 46 फीसद की वृद्धि देखने को मिली. आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में धरना, प्रदर्शन, विरोध कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में 12, 652 धरना, विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गये. ये आंकड़े 2011 के मुकाबले सबसे ज्यादा थे.

साल दर साल धरना- प्रदर्शन साल 2011 में 5354, साल 2012 में 8405, साल 2013 में 11047, साल 2014 में 7960, साल 2015 में 11158, साल 2016 में 11156, साल 2017 में 9546, साल 2018 में 8694 और साल 2019 में 12,652 धरने प्रदर्शन हुए.

नागरिकता संशोधन कानून के बाद उबल रही दिल्ली

दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये आंकड़े अभी तक 15 दिसंबर 2019 तक के हैं. नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद होनेवाले विरोध प्रदर्शनों की संख्या को इसमें शामिल नहीं किया गया है. अंग्रेजी अखबार के मुताबिक एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि अगर नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का आंकड़ा शामिल कर लिया जाए तो 12, 652 के डाटा में 500 और संख्या की बढ़ोतरी हो जाएगी.

2019 के दिसंबर के आखिरी दो सप्ताह में विरोध प्रदर्शन में बहुत इजाफा हुआ है. इससे पहले वकीलों और पुलिस में झड़प के बाद भी धरना देकर विरोध जताया गया था. मगर इसका डाटा जब 2020 में अपडेट होगा तब शाहीन बाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और दिल्ली के अन्य जगहों पर होने वाले प्रदर्शनों को शामिल कर लिया जाएगा. जानकारों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर विरोध, प्रदर्शन, धरना इस बात का इशारा करता है कि लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी और गुस्सा है. लोगों की मांग सरकार से बढ़ती जा रही है. लोग सरकार की कार्यप्रणाली से भी असंतुष्ट हैं. मगर ये लोकतंत्र के लिए अच्छी बात है. वहीं, अन्य विशेषज्ञ सरकार विरोधी प्रदर्शनों को सरकार की नीतियों से जोड़कर देखते हैं. जवाहर लाल नेहरू की रेक्टर सुधा राय कहती हैं, “ विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक है.”

2019 के अंत में नागरिकता संशोधन कानून के बाद दिल्ली उबल रही है. उसके बाद जेएनयू में नकाबपोश हमलावरों का हॉस्टल के अंदर घुसकर छात्रों और शिक्षकों को मारना. ये सब देखकर कहा जा सकता है कि 2020 में भी आंदोलन के जरिए विरोध प्रदर्शनों की बयार की बाढ़ रहेगी.

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