कश्मीर घाटी की मस्जिदों में क्या चल रहा, पुलिस को बताना होगा! दिल्ली ब्लास्ट के बाद पूछे जा रहे ये सवाल
जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रदेश की हर एक मस्जिद का छोटे से छोटा डाटा हासिल करने में जुटी हुई है. दिल्ली ब्लास्ट के तार जम्मू-कश्मीर की एक मस्जिद से जुड़े होने के बाद पुलिस ऐसा कर रही है.

जम्मू-कश्मीर में कितनी मस्जिदें हैं, उनके पास पैसा कहां से आता है, वो पैसा कहां जाता है, उन मस्जिदों की देखभाल कौन करता है, उनकी विचारधारा क्या है, दुनिया के किसी दूसरे मुल्क से उनका ताल्लुक क्या है. ये कुछ ऐसे बुनियादी सवाल हैं, जिन्हें लेकर जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने वहां के पूरे मस्जिदों का सर्वे शुरु किया है. मकसद साफ है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास प्रदेश की हर एक मस्जिद का छोटे से छोटा डाटा भी मौजूद हो, लेकिन सवाल है कि क्यों? आखिर ये नौबत आई क्यों कि जम्मू-कश्मीर पुलिस को हर मस्जिद के बारे में सब कुछ जानना है. क्या पुलिस ने पहली बार ऐसा कोई अभियान चलाया है या ऐसा सर्वे पहले भी होता रहा है. आखिर इस सर्वे के जरिए केंद्र सरकार हासिल क्या करना चाहती है.
दिल्ली के लाल किला के पास नवंबर 2024 में जो ब्लास्ट हुआ था, उसके तार जम्मू-कश्मीर की एक मस्जिद से भी जुड़े हुए पाए गए थे. ये जैश-ए-मोहम्मद का मॉड्यूल था, जो कश्मीर घाटी की एक मस्जिद से ऑपरेट करता था. इस खुलासे के बाद से ही जम्मू-कश्मीर पुलिस की नजर प्रदेश की हर एक मस्जिद पर थी. कभी औपचारिक तौर पर तो कभी अनौपचारिक तौर पर पुलिस अपने तईं मस्जिदों से जुड़ी जानकारियां इकट्ठा कर रही थी, लेकिन अब पुलिस ने बाकायदा चार पन्नों का एक फॉर्म निकाला है और उसे प्रदेश की हर मस्जिद कमिटी को दिया गया है. इसमें एक पन्ना मस्जिद से जुड़ा है और बाकी के तीन पन्ने मस्जिद कमेटी के लोगों से जुड़े हैं.
पहले पन्ने में इन सवालों का जवाब जानना चाहती है पुलिस
- मस्जिद की क्षमता कितनी है, उसकी लागत कितनी है, उसका महीने का खर्च कितना है, वो पैसा आता कहां से है?
- मस्जिद का अकाउंट नंबर क्या है?
- मस्जिद के पास क्या कोई और जमीन है या उसकी कुछ और संपत्ति है?
- अगर जमीन है तो वो किसकी है, क्या राज्य सरकार की है, वक्फ की है, मिल्कियत है या शामिलियत है?
- मस्जिद कितने मंजिल की है, उसका क्षेत्रफल कितना है?
- मस्जिद की विचारधारा क्या है. वो देवबंदी है, बरेलवी है, हनफी है या फिर अहल-ए-हदीस है?
- मस्जिद का इमाम कौन है, मुअज्जिन कौन है, खतीब कौन है और बैतउल माल कौन है. मैनेजमेंट कमिटी में कौन-कौन शामिल हैं?
किसी मस्जिद का इमाम वो शख्स होता है, जो मस्जिद में नमाज पढ़ाता है. खतीब उस शख्स को कहते हैं जो जुमे की नमाज पढ़ाता है और तकरीर पढ़ता है. मुअज्जिन वो शख्स होता है, जो नमाज के वक्त नमाजियों को बुलाने के लिए आवाज देता है. बैत-उल-माल वो शख्स होता है, जो मस्जिद से जुड़े कल्याणकारी कामों में खर्च हो रहे पैसे की देखरेख करता है. पुलिस के चार पन्नों में से तीन पन्ने इन्हीं लोगों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए हैं. पुलिस जानना चाहती है कि
- मस्जिद से जुड़े लोगों जैसे इमाम, मुअज्जिन, खतीब और बैत-उल-माल का मोबाइल नंबर क्या है?
- जो हैंडसेट वो इस्तेमाल करते हैं, उसका मॉडल नंबर और आईएमईआई नंबर क्या है?
- मस्जिद से जुड़े लोगों के सोशल मीडिया हैंडल की डिटेल्स क्या है. मेल आईडी क्या है. पढ़ाई-लिखाई कहां तक है?
- उनका पासपोर्ट नंबर, उसकी पूरी डिटेल
- उनके डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का नंबर और उसकी पूरी डिटेल क्या है?
- उनका वोटर आईकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और आधार-पैनकार्ड की पूरी डिटेल
- उनका राशन कार्ड का नंबर क्या है, उसकी पूरी डिटेल?
- इमाम, मुअज्जिन, खतीब और बैत उल माल के परिवार की पूरी जानकारी. घर में कौन-कौन हैं. किसके रिश्तेदार कहां रहते हैं. विदेश में हैं तो कहां हैं और क्या करते हैं?
- जो लोग मस्जिद से जुड़े हैं उनकी विदेश यात्रा की पूरी जानकारी. किस देश में गए, कहां गए, क्यों गए, कब गए?
- मस्जिद से जुड़े जो भी लोग हैं, चाहे वो इमाम हों, मुअज्जिन हों, खतीब हो या फिर बैत उल माल या कोई दूसरा, सबको अपनी आय का स्रोत बताना होगा कि वो महीने में कितना पैसा कमाते हैं, कहां से कमाते हैं, कहां खर्च करते हैं और उनके पास संपत्ति कितनी है, जमीन है तो उसकी अनुमानित कीमत कितनी है?
यानी कि जम्मू-कश्मीर पुलिस को मस्जिद से जुड़े हर शख्स की हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी जानकारी लिखित में चाहिए. इसकी वजह से अब मस्जिद से जुड़े लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता में दखल के तौर पर भी देख रहे हैं. पुलिस के अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं तो जो लोग इस सर्वे से प्रभावित हैं, वो भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है.
Source: IOCL
























