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Birthday: कभी सरदार सरोवर बांध के लिए पीएम मोदी ने रखा था तीन दिन उपवास, जानिए क्या है इसकी खासियत और इतिहास

Narendra Modi Birthday: सरदार सरोवर बांध वो परियोजना है जिसका ख्वाब नेहरू ने देखा था और बाद में पीएम मोदी के हाथों इस बांध का उद्दघाटन हुआ.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 69वां जन्मदिन मना रहे है. इस मौके पर वह अपनी जन्मभूमि गुजरात में हैं. पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर गुजरात सरकार नमामि देवी नर्मदे महोत्सव मनाएंगी. पीएम मोदी आज पहले अपनी मां से मुलाकात करेंगे और फिर बाद वो नर्मदा जिले के केवड़िया जायेंगे जहां स्थित सरदार सरोवर बांध पर जल की पूजा भी करेंगे.

यह वही बांध है जिसको लेकर कभी पीएम मोदी ने उपवास रखा था. सरदार सरोवर बांध को गुजरात का लाइफलाइन कहा जाता है. इसका उद्दघाटन पीएम मोदी ने खुद साल 2017 में अपने जन्मदिन के ही दिन यानी 17 सितंबर को किया था. हालांकि उस वक्त जल स्तर काफी कम था, लेकिन अबकी बार सरदार सरोवर बांध का जलस्तर 138.68 मीटर तक पहुंच गया है. अब जब आज पीएम मोदी सरदार सरोवर बांध पर आज पूजा करने वाले हैं तो ऐसे में आइए जानते हैं इस बांध की खासियत और क्यों इसे कहा जाता है गुजरात का लाइफलाइन ?

क्या है सरदार सरोबर बांध की कहानी

सरदार सरोवर बांध वह सपना है जो कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने देखा और उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा किया. जब पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस परियोजना के बारे में सोचा तो उस वक्त कई कानूनी अड़चनों की वजह से यह रुकती रही. नेहरू ने सरदार सरोवर बांध की नींव 5 अप्रैल 1961 को रखी थी. 1961 में शुरू हुई यह परियोजना साल 2017 में पूरा हुआ. दरअसल नर्मदा पर बनने वाले इस पुल का जबरदस्त विरोध हुआ. कई मुकदमें हुए और कई तरह से कानूनी लड़ाई लड़ी गई जिसके कारण बार-बार इस परियोजना का काम रुकता रहा.

मेधा पाटकर और नर्मदा बचाओ आंदोलन

सरदार सरोवर बांध के विरोध में सबसे बड़ा आंदोलन समाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने चलाया. उनकी अगुवाई में नर्मदा बचाओं आंदोलन वजूद में आया. इस आंदोलन में शामिल लोगों का कहना था कि अगर सरदार सरोवर बांध का निर्माण होता है तो कई लोग विस्थापित होंगे और साथ ही इसका पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि बांधों के निर्माण से भूकंप का भी खतरा बना रहेगा. आंदोलन जब व्यापक हुआ तो साल 1993 में उसे बड़ी कामयाबी मिली. 1993 में विश्व बैंक ने सरदार सरोवर परियोजना से अपना समर्थन वापस ले लिया. इसके बाद बांध का काम रोक दिया गया. हालांकि साल 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना को हरी झंडी दे दी और रुका हुआ काम फिर शुरू हुआ.

बांध के लिए पीएम मोदी ने रखा था उपवास

जब पीएम मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़वाने की मांग की थी. इसके लिए उस समय पीएम मोदी तीन दिन के उपवास पर भी रहे थे. इसके बाद बांध की ऊंचाई बढ़ाकर 121.92 मीटर कर दी गई. इसके बाद भी बांध की ऊंचाई और बढ़ाई गई. इसकी ऊंचाई ​ 138.68 मीटर तक कर दी गई और इस तरह कई रुकावटों के बाद आखिरकार इस परियोजना को 56 साल बाद 2017 में पूरा कर लिया गया. इस बांध का उद्दघाटन पीएम मोदी ने किया.

क्या हैं इस बांध के फायदे

1-यह बांध गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्र के लिए फायदेमंद है. इस की मदद से एक बड़े हिस्से की सिंचाई होती है.

2- इससे राज्यों के कई इलाकों में लोगों को नर्मदा का पानी पीने के लिए मिल रहा है.

3-सरदार सरोवर परियोजना से हजारों मेगावॉट बिजली के उत्पादन होता है.

4- इस बांध के गुजरात को बाढ़ के खतरे से भी बचाना एक लक्ष्य है.

5- पानी डिस्चार्ज करने की क्षमता की बात करें तो सरदार सरोवर बांध दुनिया का तीसरी सबसे बड़ी बांध है.

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