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Education Policy 2020: पीएम मोदी बोले- नई नीति व्हाट टू थिंक पर नहीं हाउ टू थिंक पर जोर देती है

इस कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीम किया जा रहा है.नई नीति का लक्ष्य भारत के स्कूलों और उच्च शिक्षा प्रणाली में इस तरह के सुधार करना है कि देश दुनिया में ज्ञान की ‘सुपरपॉवर’ कहलाए.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं. इस कार्यक्रम का नाम कॉन्क्लेव ऑन ट्रांसफोरमेशनल रिफॉर्म्स इन हायर एजुकेशन अंडर नेशनल एजुकेशन पॉलिसी है. पीएम मोदी ने कहा कि बीते कई वर्षों से हमारी शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव नहीं हुए थे. परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में जिज्ञासा और कल्पना के मूल्यों को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा. आज मुझे संतोष है कि भारत की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी- राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय, इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया. बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है. एक नया ग्लोबल स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है.

पीएम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अमल में लाने के लिए हम सभी को एकसाथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है. यहां से विश्विद्यालय, कॉलेज, स्कूल शिक्षा बोर्ड, अलग-अलग राज्यों, अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ संवाद और समन्वय का नया दौर शुरु होने वाला है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ सर्कुलर जारी करके, नोटिफाई करके लागू नहीं होगी. इसके लिए मन बनाना होगा, आप सभी को दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी. भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए आपके लिए ये कार्य एक महायज्ञ की तरह है.

पीएम ने कहा- इंप्लीमेंटेशन की तरफ हैं सबकी निगाहें

पीएम मोदी ने कहा कि ये भी खुशी की बात है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का बायस है, या किसी एक ओर झुकी हुई है. कुछ लोगों के मन में ये सवाल आना स्वभाविक है कि इतना बड़ा रिफॉर्म कागजों पर तो कर दिया गया, लेकिन इसे जमीन पर कैसे उतारा जाएगा. यानि अब सबकी निगाहें इसके इंप्लीमेंटेशन की तरफ हैं.

पीएम मोदी बोले कि आज देशभर में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है. अलग-अलग क्षेत्र के लोग, अलग-अलग विचारधाराओं के लोग, अपने व्यूज दे रहे हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को रिव्यू कर रहे हैं. ये एक हेल्दी डिबेट है, ये जितनी ज्यादा होगी, उतना ही लाभ देश की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा. जितनी ज्यादा जानकारी स्पष्ट होगी फिर उतना ही आसान इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का इंमप्लीमेंटेशन भी होगा.

3-4 साल के व्यापक विचार-विमर्श के बाद शिक्षा नीति को स्वीकृत किया गया

प्रधानमंत्री ने कहा कि 3-4 साल के व्यापक विचार-विमर्श के बाद, लाखों सुझावों पर लंबे मंथन के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृत किया गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में आज का ये कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है. इस कॉन्क्लेव से भारत के एजुकेशन वर्ल्ड को राष्ट्रीय शिक्षा नीति- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत की

पीएम ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार भी यही सोच है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत की, नए भारत की आधारशिला तैयार करने वाली है. बीते अनेक वर्षों से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बड़े बदलाव नहीं हुए थे. परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में क्यूरियोसिटी और इमैजिनेशन की वैल्यूज को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था.

पीएम मोदी बोले- मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं

पीए मोदी बोले कि हर देश, अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपनी नेशनल वैल्यूज के साथ जोड़ते हुए, अपने नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म करते हुए चलता है. मकसद ये होता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को फ्यूचर रेडी रखे, फ्यूचर रेडी करें. उन्होंने कहा कि आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के इंप्लीमेंटेशन से सीधे तौर पर जुड़े हैं और इसलिए आपकी भूमिका बहुत ज्यादा अहम है. जहां तक पॉलिटिकल विल की बात है, मैं पूरी तरह कमिटेड हूं, मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं.

पीएम ने कहा कि इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है. ये एक बहुत बड़ी वजह है जिसकी वजह से जहां तक संभव हो, 5वीं क्लास तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है.

सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जड़ से जग तक, मनुज से मानवता तक, अतीत से आधुनिकता तक, सभी बिंदुओं का समावेश करते हुए, इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है.इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था. स्कूल करिकुलम के 10+2 स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 करिकुलम का स्ट्रक्चर देना, इसी दिशा में एक कदम है.

पीए मोदी ने कहा कि आज गुरुवर रबींद्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है. वो कहते थे- 'उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है.' निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का वृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है. हमारे स्टूडेंट्स में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल और इनोवेटिव एबिलिटी विकसित कैसे हो सकती है, जबतक हमारी शिक्षा में पैशन ना हो, फिलॉसफी ऑफ एजुकेशन ना हो, पर्पस ऑफ एजुकेशन ना हो.

पीएम ने कहा- हर स्टूडेंट को पैशन को फॉलो करने का अवसर मिलना ही चाहिए

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर स्टूडेंट को ये अवसर मिलना ही चाहिए कि वो अपने पैशन को फॉलो करे. वो अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से किसी डिग्री या कोर्स को फॉलो कर सके और अगर उसका मन करे तो वो छोड़ भी सके. अब कोशिश ये है कि बच्चों को सीखने के लिए इन्क्वायरी बेस्ड, डिस्कवरी बेस्ड, डिस्कशन बेस्ड, और एनालिसिस बेस्ड तरीकों पर जोर दिया जाए. इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनका पार्टिसिपेशन भी बढ़ेगा.

हाउ टू थिंक पर बेस्ड है ये नीति पीएम ने कहा कि अभी तक जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, उसमें व्हाट टू थिंक पर फोकस रहा है. जबकि इस शिक्षा नीति में हाउ टू थिंक पर बल दिया जा रहा है. ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि आज जिस दौर में हम हैं, वहां इनफॉर्मेशन और कंटेंट की कोई कमी नहीं है.

शिक्षा नीति में स्टूडेंट एजुकेशन और डिग्निटी ऑफ लेबर पर किया गया काम

नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब गांवों में जाएंगे, किसान को, श्रमिकों को, मजदूरों को काम करते देखेंगे, तभी तो उनके बारे में जान पाएंगे, उन्हें समझ पाएंगे, उनके श्रम का सम्मान करना सीख पाएंगे. इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्टूडेंट एजुकेशन और डिग्निटी ऑफ लेबर पर बहुत काम किया गया है. हायर एजुकेशन को स्ट्रीम्स से मुक्त करने, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट, क्रेडिट बैंक के पीछे यही सोच है. हम उस एरा की तरफ बढ़ रहे हैं जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक प्रोफेशन में ही नहीं टिका रहेगा. इसके लिए उसे निरंतर खुद को री-स्किल और अप-स्किल करते रहना होगा.

वर्चुअल लैब जैसे कॉन्सेप्ट होंगे इसका हिस्सा पीएम मोदी ने कहा कि जब इंस्टीट्यूशंस और इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी ये रिफॉर्म्स, रिफ्लेक्ट होंगे, तभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अधिक प्रभावी और त्वरित गति से इंप्लीमेंट किया जा सकेगा. वर्चुअल लैब जैसे कॉन्सेप्ट ऐसे लाखों साथियों तक बेहतर शिक्षा के सपने को ले जाने वाला है, जो पहले ऐसे सबजेक्ट्स पढ़ ही नहीं पाते थे जिसमें लैब एक्सपेरिमेंट जरूरी हो.

हमें टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना है- पीएम प्रधानमंत्री ने कहा कि अब टेक्नोलॉजी ने हमें बहुत तेजी से, बहुत अच्छी तरह से, बहुत कम खर्च में, समाज के आखिरी छोर पर खड़े स्टूडेंट तक पहुंचने का माध्यम दिया है. हमें इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना है.21वीं सदी के भारत से पूरी दुनिया को बहुत अपेक्षाएं हैं. भारत का सामर्थ्य है की कि वो टैलेंट और टेक्नॉलॉजी का समाधान पूरी दुनिया को दे सकता है हमारी इस जिम्मेदारी को भी हमारी एजुकेशन पॉलिसी एड्रेस करती है.

शिक्षा नीति में डिग्निटी ऑफ टीचर्स का भी विशेष ध्यान रखा गया शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, देश को अच्छे स्टूडेंट्स, अच्छे प्रोफेशनल्स और उत्तम नागरिक देने का बहुत बड़ा माध्यम आप सभी टीचर्स ही हैं, प्रोफेसर्स ही हैं. इसलिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी-राष्ट्रीय शिक्षा नीति में डिग्निटी ऑफ टीचर्स का भी विशेष ध्यान रखा गया है. गुड-क्वालिटी एजुकेशन का रास्ता इन दोनों मतों के बीच में है. जो संस्थान क्वालिटी एजुकेशन के लिए ज्यादा काम करे, उसको ज्यादा फ्रीडम से रिवार्ड किया जाना चाहिए. इससे क्वालिटी को प्रोत्साहन मिलेगा और सबको ग्रो करने के लिए इंसेंटिव भी मिलेगा.

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