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दुखदः आइसोलेशन वार्ड में था कोरोना संदिग्ध, नहीं कर पाया पिता का अंतिम संस्कार, FB पर लिखा भावुक पोस्ट

केरल का एक शख्स इसलिए अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाया कि क्योंकि वह कोरोना वायरस संदिग्ध था और उसे आइसोलेशन वॉर्ड में रखा गया था.

तिरुवनन्तपुरमः कोरोना वायरस जिस तेज़ी से फ़ैल रहा है उसने देश भर में भी भय का माहौल बना दिया है. इस बीच कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या अब 85 हो गई और 2 लोगों की मौत भी हो चुकी है. देश समेत पूरी दुनिया इस वक़्त जहां कोरोना वायरस से लड़ रही है वहीं केरल से एक दर्द भरी कहानी सामने आई है. कोरोना का संदिग्ध एक शख्स अपने पिता को देखने के लिए कतर से लौटा था, लेकिन कोरोना वायरस होने के शक के कारण उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है और वह पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका.

अब केरल के इस शख्स ने फेसबुक के जरिए अपने दर्द को बयां किया है. कतर के एक निजी फर्म में काम करने वाला यह शख्स थोडुपुझा के पास अलैकोड गांव का रहने वाला है. इस शख्स ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है-

"अच्चन (डैडी) कल रात स्ट्रोक के कारण चल बसे. मैंने अस्पताल में पूछा कि क्या मैं उन्हें आखिरी बार देख सकता हूं तो मुझे कहा गया कि ऐसी अवस्था में मेरा आइसोलेशन वार्ड से बाहर निकलना सही नहीं है. मैं इस वक़्त सिर्फ रो सकता था. मेरे लिए यह बहुत मुश्किल पल था कि उनके (पिता के) इतने करीब होने के बावजूद मैं उन्हें आखिरी बार नहीं देख पा रहा.

7 मार्च को मैंने अपने भाई का मैसेज देखा. उसने तुरंत संपर्क करने को कहा. जैसे ही मैंने उसे कॉल किया मुझे पता चला कि मेरे पिता सोने के दौरान बिस्तर से गिर गए थे जिस कारण उन्हें गंभीर चोटें आई हैं. उन्हें अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया गया था. बाद में जब मैंने फोन किया तो मुझे बताया गया कि उन्हें आंतरिक रक्तस्राव यानी इंटर्नल ब्लीडिंग हो रही है. मैंने तुरंत ऑफिस में जानकारी दी. फिर उन लोगों ने केरल के लिए मेरी फ्लाइट बुक कर दी. हालांकि केरल में फैले कोरोना वायरस की भी मुझे जानकारी थी, इसलिए मैं चिंतित था कि क्या मैं घर जा पाऊंगा. मैं उस रात कोच्चि के लिए निकला और पहुंचने पर कोरोना वायरस के लिए स्क्रीनिंग की गई. उसके बाद अपने होम टाउन जाने की अनुमति दी गई. बाद में कोट्टायम के लिए रवाना हुआ. हालांकि, इस दौरान मेरे रिश्तेदारों से संपर्क नहीं हो पाया और इस तरह मुझे अस्पताल में अपने पिता से मिलने का मौका मिला. जैसे ही मैं अस्पताल से बाहर आया मुझे खांसी शुरू हो गई और मेरे गले में खुजली महसूस हुई. शुरू में मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

फिर भी सुरक्षा को देखते हुए मैं कोट्टायम मेडिकल कॉलेज में कोरोना सेल में डॉक्टर से कंसल्ट किया. डॉक्टर ने मुझे बताया कि कतर के कई हिस्से में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है और मुझे तुरंत आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. आइसोलेशन वार्ड में 9 दिन बिताने के बाद रात में खबर मिली कि मेरे पिता को दौरा पड़ा और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. पिता और मैं दोनों एक ही अस्पताल में थे, लेकिन आइसोलेटेड प्रोटोकॉल के कारण अपने पिता से नहीं मिल सका. अगले दिन उनके पिता के शव को मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में लाया गया, लेकिन मैं अपने पिता को आइसोलेशन वार्ड की खिड़की से एंबुलेंस में ले जाते वक़्त ही देख पाया. जब पिता के शरीर को लाया गया तो मैं आखिरी बार उन्हें वीडियो कॉल से देखा. अगर मैं कोरोना सेल से संपर्क नहीं किया होता तो मैं अपने पिता को देखने में कामयबा हो जाता. हालांकि, मैंने ये वायरस अपने परिवार और मेरे क्षेत्र के लोगों में नहीं फैलने दिया. "

दुखदः आइसोलेशन वार्ड में था कोरोना संदिग्ध, नहीं कर पाया पिता का अंतिम संस्कार, FB पर लिखा भावुक पोस्ट

शख्स ने आगे यह भी लिखा है कि अब वह रिजल्ट का इंतजार कर रहा है लेकिन वह जानता है कि रिजल्ट नेगेटिव आएंगे. पर वह इससे और ज्यादा उदास होगा क्योंकि उसे इस बात का दुख हमेशा रहेगा कि बिना किसी बीमारी के बावजूद वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाया.

उधर इस दिल को छूने वाली खबर को सुन कर केरल के मुख्यमंत्री पीनराई विजयन ने भी व्यक्ति के इस दिल छूने वाले त्याग को खूब सराहा है. साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिस तरह से इस शख्स ने अपनी भावनाओं से ज्यादा सामाजिक उत्तरदायित्व को आगे रखा वह वाकई काबिले तारीफ है.

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