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क्या प्रदूषण रोकने में सफल रहा है ऑड-ईवन फॉर्मूला, अब तक कितना हुआ फायदा? जानिए

Delhi Air Pollution: दिल्ली सरकार ने एक बार फिर से राजधानी में ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू करने की घोषणा की है. इससे पहले इसे 2016, 2017 और 2019 में भी लागू किया गया था.

Odd Even Formula: दिल्ली की हवा इन दिनों जहरीली हो गई है. राजधानी में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार हो चुका है. दिल्ली में लगातार खराब होते एक्यूआई स्तर को कंट्रोल करने के लिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार एक बार फिर से 'ऑड-ईवन' फॉर्मूला को लागू करने पर विचार कर रही है. 

इस संबंध में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा था कि वह देख रहें है कि गिरते एक्यूआई को नियंत्रित करने के लिए क्या ऑड-ईवन को लागू करने जरूरत है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने एक विश्लेषण किया है, जिसमें कहा गया है कि 21 से 26 अक्टूबर तक दिल्ली के वायु प्रदूषण में सबसे ज्यादा योगदान वाहनों का हो सकता है. ऐसे में सरकार प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सार्वजनिक परिवहन को महत्व दे सकती है.

गौरतलब है कि AAP सरकार ने 2016 में पहली बार 'ऑड-ईवन' पेश किया था. इसे वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने और बढ़ते पार्टिकुलेट मैटर स्तर को कम करने के लिए लागू किया गया था. इसके तहत दिल्ली में ऑड संख्या वाले निजी वाहन ऑड डेट पर और ईवन तारीख पर ईवन संख्या वाले वाहन चलाने की अनुमति दी गई थी.

2016 में हुआ सकारात्मक प्रभाव 
2016 में लागू किए ऑड-ईवन नियम के प्रभाव पर दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) में एक अध्ययन किया गया और रिसर्च में सकारात्मक परिणाम सामने आए. हालांकि वायु गुणवत्ता में उतना सुधार नहीं हुआ, जितनी की उम्मीद की जा रही थी. 

2017 में फिर लागू हुआ ऑड-ईवन
2017 में इस नियम को एक बार फिर से लागू किया गया और इस बार भी राजधानी की हवा में वह सुधार देखने को नहीं मिला, जिसकी सरकार उम्मीद कर रही थी. आईआईटी कानपुर ने 2017 में ऑड-ईवन नियम पर अध्ययन किया और चौंकाने वाला खुलासा किया.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में वाहन प्रदूषण की मात्रा लगभग 20 प्रतिशत है, जबकि इससे ज्यादा प्रदूषण दोपहिया वाहन करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक दोपहिया वाहन लगभग 56 प्रतिशत प्रदूषण करते हैं. 

2019 में कितनी मिली सफलता?
इसके बाद इस नियम को 2019 को फिर से लागू किया गया. काउंसिल ऑन एनर्जी एनवायरमेंट एंड वाटर की स्टडी के मुताबिक ऑड-ईवन से कोई खास फायदा नहीं होता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में ट्रांसपोर्टेशन की वजह से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है. इसके अलावा टू व्हीलर से भी काफी प्रदूषण होता है. 

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में टू व्हीलर की वजह से अच्छा-खासा प्रदूषण फैलता है, लेकिन ऑड ईवन में टू व्हीलर को शामिल नहीं किया जाता है. इस वजह से प्रदूषण के स्तर पर कुछ खास फर्क नहीं पड़ता.

क्या है विशेषज्ञों की राय?
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के वरिष्ठ प्रोफेसर और वैज्ञानिक सेवा राम ने कहा इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि जब योजना लागू होती है तो यातायात की भीड़ कम हो जाती है और यह प्रत्येक वाहन से निकलने वाले उत्सर्जन और प्रदूषकों में कटौती करने में मदद होता है, लेकिन यह उस विशेष दिन की मौसम संबंधी स्थिति पर भी निर्भर करता है. इसलिए, वायु गुणवत्ता के स्तर में सुधार पर इसका मामूली प्रभाव पड़ता है, बड़ा नहीं.

वहीं, सेंट्रल रोड एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ प्रोफेसर और वैज्ञानिक एस वेलमुर्गन ने कहा कि अगर AQI 450 प्लस से 500 तक पहुंचता है तो ऑड-ईवन लागू किया जाना चाहिए. बात सिर्फ इतनी है कि सरकार अपनी योजनाओं को कितनी सख्ती से लागू करती है और उसकी निगरानी करती है. इसके लिए कड़ी सतर्कता और सख्ती की जरूरत है.

यह भी पढ़ें- ED समन पर बवाल के बीच दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बुलाई AAP विधायकों की बड़ी बैठक

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