बिहार नीतीश कुमार के यू-टर्न से नाराज है ईबीसी वोटर, लेकिन लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के साथ
Bihar Politics: जाति-आधारित सर्वे के अनुसार बिहार में ईबीसी समुदाय की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है. यह नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक है.

Nitish Kumar: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रमुख नीतीश कुमार का बिहार में महागठबंधन से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में लौटने का फैसला लोगों को पसंद नहीं आ रहा है. खासकर पार्टी के मुख्य वोट बैंक अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) को.
हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र में एनडीए की सत्ता में वापसी के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया. वहीं, नीतीश कुमार के प्रति कुर्मियों वोटरों की लॉयल्टी पहले की तरह ही बरकरार है.
बिहार में 36 प्रतिशत ईबीसी
बिहार सरकार के हालिया जाति-आधारित सर्वे के अनुसार राज्य की आबादी में ईबीसी समुदाय की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है. अतीत में मतदाताओं का यह बड़ा हिस्सा नीतीश कुमार के प्रति वफादार रहा है, जिससे वह 18 साल तक सत्ता में बने रहे.
'आम चुनाव में बीजेपी को वोट'
हिलसा विधानसभा क्षेत्र के निवासी दिनेश ठाकुर ने द हिंदू को बताया कि वह ईबीसी कैटेगरी के अंतर्गत आने वाले नाई समुदाय से आते हैं. उन्होंने कहा कि भले ही आरजेडी-जेडीयू गठबंधन तोड़ने में बीजेपी का हाथ है. वह आम चुनाव में पीएम मोदी को ही वोट देंगे. जेडीयू प्रमुख पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए ठाकुर ने कहा कि उन्हें दूसरा गठबंधन नहीं बनाना चाहिए था
नीतीश कुमार को आरजेडी के साथ गठबंधन से पहले उसके बारे में सब कुछ पता था. इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्होंने सड़कों और बिजली सप्लाई में सुधार के लिए बहुत काम किया है, लेकिन उनसे इस यू-टर्न की उम्मीद नहीं थी.
'बीजेपी के अलावा कोई विकल्प नहीं'
वहीं, इस्लामपुर निर्वाचन क्षेत्र में रहने वाले नाई समुदाय के 60 साल के कैलाश ठाकुर ने कहा कि उन्हें आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के प्रति सहानुभूति है, लेकिन बिहार में नीतीश कुमार और बीजेपी के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
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