Mughal Emperor Akbar: मुगल बादशाह अकबर के पास थी चीतों की फौज, जंग में करता था इस्तेमाल, आंकड़ा होश उड़ा देगा
Mughal Emperor: भारत में मुगल काल में चीतों का इस्तेमाल बादशाह लोग करते हैं. खासतौर पर जंगल में शिकार करने लिए चीतों की जरूरत पड़ती थी.

भारत में बड़ी संख्या में चीते पाए जाते थे, करीब 1947 के आसपास ये विलुप्त श्रेणी में शामिल हो गए. लगातार शिकार और जंगलों की कमी के कारण उनकी संख्या तेजी से घटती गई. आखिरकार भारत का आखिरी एशियाई चीता मध्य प्रदेश की कोरिया रियासत में शिकार कर लिया गया.
दिव्यभानु सिंह की किताब स्टोरी ऑफ इंडियन चीता के अनुसार, हड़प्पा सभ्यता में चीते का कोई साफ उल्लेख किसी मुद्रा या मोहर पर नहीं मिलता. हालांकि मध्य प्रदेश के कुछ पाषाण चित्रों में चीते जैसी आकृतियां जरूर देखी गई हैं. चीते सबसे ज्यादा अफ्रीका में पाए जाते हैं. प्राचीन मिस्त्र में इनका इस्तेमाल शिकार के लिए किया जाता था. छठी और सातवीं शताब्दी की एक पुरानी पेंटिंग, जो तुर्की की बाइजेन्टाइन बस्ती से मिली थी, उसमें भारत को एक सांवली महिला के रूप में दिखाया गया है. उसके आसपास कई जानवर बनाए गए थे, जिनमें लंगूर, अफ्रीकी तोता, बाघ और चीता भी शामिल थे.
तुर्क और अफगान शासनकाल में चीते का इस्तेमाल
भारत में तुर्क और अफगान शासकों के आने के बाद चीते का इस्तेमाल शिकार में बढ़ने लगा. खासकर काले हिरण के शिकार में इनका यूज किया जाता था. फिरोज शाह तुगलक ने शिकार के लिए सिर्फ चीते ही नहीं, बल्कि कुत्तों और जंगली बिल्ली यानी कराकल का भी इस्तेमाल किया था. अकबर के समय में चीते का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हुआ. ऐसा कहा जाता है कि अपने 50 साल के शासनकाल में अकबर ने करीब 9,000 चीते अपने पास रखे थे. एक समय आगरा में उनके पास 1,000 से ज्यादा चीते मौजूद थे, जिन्हें पालतू जानवरों की तरह रखा जाता था और शिकार में इस्तेमाल किया जाता था.
भारत में जानवरों का देखभाल कैसा होती थी?
इतिहासकार अबुल फजल ने विस्तार से लिखा है कि जंगलों से चीतों को पकड़कर कैसे ट्रेंड किया जाता था. बीस्ट एंड मैन इन इंडिया बुक के लेखक जॉन लॉकवुड किपलिंग ने लिखा था कि भारत में जानवरों और उनकी देखभाल करने वालों के बीच एक खास रिश्ता होता था, जिसे शब्दों में बताना आसान नहीं है. वर्ष साल में भारत में चीते को आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया. भारतीय रजवाड़ों में शिकार का काफी चलन था. शिकार को रोमांचक माना जाता था. इसी कारण 1918 से 1945 के बीच अफ्रीका से भी चीते भारत लाए जाते रहे.
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