CNG, PNG में अब बायोगैस मिलाएगी सरकार, कैबिनेट ने मंजूर की 23 हजार करोड़ की योजना
मोदी सरकार पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग के विरोध के बीच अब सीएनजी और पीएनजी में बायोगैस मिलाएगी. गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में गोबरधन योजना को स्वीकृति दी गई है.

पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग के विरोध के बीच अब सरकार सीएनजी और पीएनजी में बायोगैस मिलाएगी. गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना (GOBARdhan) को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाना है.
पांच प्रतिशत तक सीएनजी-पीएनजी में होगी ब्लेंडिंग
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू किया जाएगा. सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां सरकार की ओर से तय अनिवार्य मिश्रण (ब्लेंडिंग) लक्ष्य को पूरा करने के लिए बायोगैस खरीदेंगी. सीएनजी और पीएनजी में ब्लेंडिंग के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में तीन प्रतिशत, 2027-28 में चार प्रतिशत और 2028-29 से आगे पांच प्रतिशत ब्लेंडिंग का लक्ष्य तय किया है.
देश के स्वच्छ ऊर्जा तंत्र को मजबूती मिलेगी
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि गोबरधन योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू किया जाएगा. इसके तहत बायोगैस उत्पादन के लिए एक व्यापक और एकीकृत व्यवस्था तैयार की जाएगी. इसके तहत उत्पाद की सुनिश्चित खरीद (ऑफटेक), स्थिर कीमत, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन से जुड़ाव, ऋण सहायता और नई तकनीक के विकास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे देश के स्वच्छ ऊर्जा तंत्र को मजबूती मिलेगी.
कृषि अवशेष और गोबर से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा
सरकार ने इस योजना को भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में एक बड़ा कदम बताया है. योजना के तहत कृषि अवशेष, गोबर, चीनी मिलों से निकलने वाला प्रेसमड, नगर निकायों का जैविक कचरा और अन्य बायोमास से स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत तैयार किए जाएंगे. इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी और वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा.
पहले से चल रही योजनाओं को भी मिलेगा बल
सरकार ने बताया कि नई योजना पहले से संचालित कई योजनाओं को आगे बढ़ाने का काम करेगी. इनमें सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन (SATAT) योजना, मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) योजना, बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी (BAM) योजना, डेवलपमेंट ऑफ पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) योजना और राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम के तहत दी जा रही वित्तीय सहायता शामिल हैं. सरकार के अनुसार, इन योजनाओं के माध्यम से देशभर में अब तक 200 से अधिक कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं.
पूरी बायोगैस वैल्यू चेन एक मंच पर आएगी
सरकार का कहना है कि योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस की पूरी वैल्यू चेन को एक ही मंच पर जोड़ा जाएगा. इससे परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ेगी और निवेशकों तथा वित्तीय संस्थानों को निवेश के लिए अधिक भरोसा मिलेगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार CBG के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराएगी.
10 वर्षों के लिए तय होगी बायोगैस की कीमत
योजना के तहत उत्पादकों को लंबे समय तक आय की निश्चितता देने के लिए सरकार ने न्यूनतम 10 वर्षों की मूल्य व्यवस्था तय की है. इसके तहत बायोगैस की प्रशासनिक कीमत 2,110 रुपये प्रति मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट निर्धारित की गई है.
किसानों की आय बढ़ेगी, आयातित ईंधन पर निर्भरता होगी कम
सरकार का कहना है कि इस योजना से आयातित जीवाश्म ईंधन पर देश की निर्भरता घटेगी. इसके साथ ही नवीकरणीय गैस का उत्पादन बढ़ेगा, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे.



















