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मन की बात: पीएम मोदी बोले- हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं, शांति हर सवाल का जवाब

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूछा, ''क्या आपने ऐसी किसी जगह के बारे में सुना है, जहां शांति और सद्भाव जीवन के लिए मुसीबत बने हों?''गणतंत्र दिवस समारोह की वजह से इस रविवार प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम के समय में बदलाव किया गया.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गणतंत्र दिवस पर 'मन की बात' में कहा कि हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है और शांति हर सवाल के जवाब का आधार होना चाहिए. उन्होंने लोगों से अपील की कि एकजुटता से हर समस्या के समाधान का प्रयास हो और भाईचारे के जरिये हर विभाजन और बंटवारे की कोशिश को नाकाम करें. आकाशवाणी पर प्रसारित 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम इक्कीसवीं सदी में हैं, जो ज्ञान-विज्ञान और लोक-तंत्र का युग है. क्या आपने किसी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां हिंसा से जीवन बेहतर हुआ हो?'' उन्होंने पूछा, ''क्या आपने ऐसी किसी जगह के बारे में सुना है, जहां शांति और सद्भाव जीवन के लिए मुसीबत बने हों ?''

मोदी ने कहा कि हिंसा, किसी समस्या का समाधान नहीं करती. दुनिया की किसी भी समस्या का हल, कोई दूसरी समस्या पैदा करने से नहीं बल्कि अधिक से अधिक उसका समाधान ढूंढकर ही हो सकता है. प्रधानमंत्री ने कहा, ''आइये, हम सब मिलकर, एक ऐसे नए भारत के निर्माण में जुट जाएं, जहां शांति हर सवाल के जवाब का आधार हो. एकजुटता से हर समस्या के समाधान के प्रयास हो और, भाईचारा, हर विभाजन और बंटवारे की कोशिश को नाकाम करे.'' गणतंत्र दिवस समारोह की वजह से इस रविवार प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम के समय में बदलाव किया गया. सुबह 11 बजे की बजाय आज के लिए शाम 6 बजे का वक्त तय किया गया था. यह प्रधानमंत्री मोदी का नये साल में पहला 'मन की बात' कार्यक्रम है.

पूर्वोत्तर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आपने भी समाचार में देखा होगा कि अभी कुछ दिनों पहले असम में, आठ अलग-अलग मिलिटेंट ग्रुप के 644 लोगों ने अपने हथियारों के साथ आत्म-समर्पण किया. जो पहले हिंसा के रास्ते पर चले गए थे उन्होंने अपना विश्वास, शान्ति में जताया और देश के विकास में भागीदार बनने का निर्णय लिया है, मुख्य-धारा में वापस आए हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले साल, त्रिपुरा में भी 80 से अधिक लोग, हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्य-धारा में लौट आए हैं जिन्होंने यह सोचकर हथियार उठा लिए थे कि हिंसा से समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है, उनका यह विश्वास दृढ़ हुआ है कि शांति और एकजुटता ही, किसी भी विवाद को सुलझाने का एक-मात्र रास्ता है. उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में अलगाववाद काफी कम हुआ है और इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस क्षेत्र से जुड़े हर एक मुद्दे को शांति के साथ, ईमानदारी से, चर्चा करके सुलझाया जा रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ''देश के किसी भी कोने में अब भी हिंसा और हथियार के बल पर समस्याओं का समाधान खोज रहे लोगों से आज, इस गणतंत्र-दिवस के पवित्र अवसर पर अपील करता हूं कि वे वापस लौट आएं. मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में, अपनी और इस देश की क्षमताओं पर भरोसा रखें.'' ब्रू-रियांग शरणार्थियों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गए. इसके साथ ही, लगभग 25 साल पुरानी ब्रू-रियांग शरणार्थी समस्या के एक दर्दनाक अध्याय का अंत हुआ.

पीएम ने कहा कि यह समस्या 90 के दशक की है. 1997 में जातीय तनाव के कारण ब्रू रियांग जनजाति के लोगों को मिज़ोरम से निकल करके त्रिपुरा में शरण लेनी पड़ी थी. इन शरणार्थियों को उत्तर त्रिपुरा के कंचनपुर स्थित अस्थाई कैम्पों में रखा गया. यह बहुत पीड़ादायक है कि ब्रू रियांग समुदाय के लोगों ने शरणार्थी के रूप में अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खो दिया था. 23 साल तक- न घर, न ज़मीन, न परिवार के लिए, बीमारी के लिए इलाज़ का प्रबंध और ना बच्चों के शिक्षा की सुविधा. मोदी ने कहा कि सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन इनकी पीड़ा का हल नहीं निकल पाया. लेकिन इतने कष्ट के बावज़ूद भारतीय संविधान और संस्कृति के प्रति उनका विश्वास अडिग बना रहा.

मोदी ने कहा कि और इसी विश्वास का नतीज़ा है कि उनके जीवन में आज एक नया सवेरा आया है. समझौते के तहत, करीब 34000 ब्रू-शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा. इतना ही नहीं, उनके पुनर्वास और सर्वांगीण-विकास के लिए केंद्र सरकार लगभग 600 करोड़ रूपए की मदद भी करेगी. प्रत्येक विस्थापित परिवार को घर बनाने में उनकी मदद की जाएगी. इसके साथ ही, उनके राशन का प्रबंध भी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ये समझौता कई वजहों से बहुत ख़ास है. ये सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाता है.

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