शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव, NCERT को मिला ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा
NCERT को आधिकारिक रूप से डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया. केंद्र की मोदी सरकार ने करीब 3 साल पहले NCERT के कार्यक्षेत्र को बढ़ाने का संकेत दिया था.

देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक अहम बदलाव के मद्देनजर केंद्र सरकार की ओर से National Council of Educational Research and Training (NCERT) को आधिकारिक रूप से डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है. इस फैसले के साथ ही NCERT की भूमिका अब केवल स्कूलों के लिए पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेगी.
2 जनवरी 2026 को भी NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने की चर्चा तेज हुई थी. करीब 3 साल पहले केंद्र सरकार ने NCERT के कार्यक्षेत्र को बढ़ाने का संकेत दिया था. अब इस फैसले को लागू करते हुए इसे विश्वविद्यालय जैसी स्वायत्तता प्रदान की गई हैं. इस नए दर्जे के तहत NCERT अब अपने खुद के डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स चला सकेगा. विशेषकर शिक्षक प्रशिक्षण, शिक्षा नीति और शैक्षिक रिसर्च जैसे क्षेत्रों में.
NCERT अब UGC के दायरे में
सरकार के इस निर्णय के बाद NCERT अब University Grants Commission (UGC) के नियामक दायरे में भी आ गया है. इसका मतलब है कि इसके सभी शैक्षणिक कार्यक्रम UGC के नियमों और गुणवत्ता मानकों के अनुसार संचालित होंगे, जिससे इसकी विश्वसनीयता और भी मजबूत होगी.
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम देश में शिक्षक, शिक्षा और रिसर्च को नई दिशा दे सकता है. डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने से NCERT न केवल स्कूली स्तर पर बल्कि उच्च शिक्षा में भी शिक्षकों को प्रशिक्षित कर सकेगा. इससे नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण और इनोवेशन पर जोर दिया गया है.
शिक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता
कुछ शिक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले पर चिंता भी जताई है. उनका कहना है कि NCERT का मूल कार्य स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाना है और अगर इसका ध्यान उच्च शिक्षा की ओर ज्यादा चला गया तो इससे उसकी प्राथमिक जिम्मेदारियों पर असर पड़ सकता है. ऐसे भी विशेषज्ञ हैं जिनका मानना है कि यह विस्तार NCERT की क्षमता को और मजबूत करेगा, न कि कमजोर.
NCERT के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही नए कोर्स और प्रोग्राम लॉन्च किए जाएंगे. जिनमें डिजिटल शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और शिक्षण तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इससे देशभर के शिक्षकों और छात्रों को आधुनिक और प्रासंगिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा. कुल मिलाकर NCERT को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलना भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा और निर्णायक बदलाव माना जा रहा है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह संस्था अपने विस्तारित दायरे में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाती है.
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Source: IOCL


























