लद्दाख की 23 अनमोल धरोहरें संरक्षित घोषित, प्रशासन का बड़ा ऐलान
लद्दाख प्रशासन ने 23 ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और विरासत संपत्तियों को संरक्षित स्मारक घोषित किया है. फैसले का मकसद लद्दाख की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना है.

लद्दाख की अनोखी सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 23 स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और विरासत संपत्तियों को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया है. इस फैसले का मकसद उन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को कानूनी सुरक्षा देना है, जो पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक क्षरण, बढ़ते पर्यटन, अतिक्रमण और लोगों की ओर से की गई तोड़फोड़ का शिकार हो रही थीं.
इस फैसले के तहत इन सभी महत्वपूर्ण स्थलों का संरक्षण, रखरखाव और मरम्मत व्यवस्थित तरीके से की जाएगी ताकि आने वाली पीढ़ियां भी लद्दाख की समृद्ध विरासत को समझ और देख सकें. प्रशासन का मानना है कि इन धरोहरों की सुरक्षा न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगी, बल्कि जिम्मेदार पर्यटन को भी बढ़ावा देगी.
Delighted to announce a landmark decision to safeguard Ladakh's cultural and spiritual heritage!
— LG Ladakh (@lg_ladakh) July 30, 2026
Have officially declared 23 historic sites across Ladakh as "Protected Monuments". With this move, invaluable treasures, including ancient petroglyphs, rock carvings, centuries-old… pic.twitter.com/F4oRHRTlvo
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लद्दाख के उपराज्यपाल ने दी जानकारी
इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी देते हुए लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने बताया कि इन स्मारकों को जम्मू-कश्मीर प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, संवत 1977 (1920 ईस्वी) की धारा 3(1) के तहत संरक्षित घोषित किया गया है, जो लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में लागू है. उन्होंने कहा कि यह पहल लद्दाख की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन, शोध और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उपराज्यपाल ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास भी, विरासत भी विजन के अनुरूप है. इसका उद्देश्य विकास के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों को भी मजबूत करना है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी विरासत से जुड़ी रहें.
लद्दाख की सांस्कृतिक
जम्मू-कश्मीर प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम के तहत उठाया गया यह कानूनी कदम ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह आदेश जारी होते ही पूरे लद्दाख क्षेत्र में लागू हो गया है. प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, संरक्षित घोषित किए गए स्थल लेह, शाम, नुब्रा, जंस्कार और करगिल जिलों में फैले हुए हैं. ये सभी जगह लद्दाख की सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और कलात्मक विरासत को दर्शाते हैं. संरक्षित स्मारकों की सूची में प्राचीन किले, पत्थरों पर बनी नक्काशी वाली जगहें, चट्टानों पर उकेरी गई मूर्तियां, ध्यान गुफाएं, बौद्ध प्रतिमाएं, ऐतिहासिक शिलालेख और मठों से जुड़ी पुरानी इमारतें शामिल हैं. ये सभी स्थल लद्दाख के हजारों वर्षों पुराने इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं की कहानी बताते हैं.
लद्दाख की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान
इनमें शारनोस, डोमखार, लेहदो, अल्ची, मुर्गी और मैंगमोर में स्थित प्राचीन पेट्रोग्लिफ कॉम्प्लेक्स शामिल हैं. इसके अलावा शे में स्थित प्रसिद्ध मैत्रेय बुद्ध की चट्टान पर बनी नक्काशी, ऐतिहासिक टिंगमोसगंग किला, सुमूर किला और सस्पोल की प्राचीन गुफाओं को भी संरक्षण दिया गया है. लिस्ट में पवित्र स्टोंगडे गोंपा भी शामिल है, जो लद्दाख की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. नुब्रा घाटी के कई महत्वपूर्ण बौद्ध विरासत स्थल भी इस सूची में शामिल किए गए हैं. इनमें ध्यान गुफाएं, चट्टानों पर बनी बुद्ध की मूर्तियां, मैत्रेय बुद्ध की नक्काशी, रिगसुम गोंबो चट्टान प्रतिमा, चंबा कार्पो, फोलोंग सिंगे और ऐतिहासिक डेचेन त्सोमो खार किला प्रमुख हैं.
लद्दाख की प्राचीन शिलालेख परंपरा
करगिल जिले में स्थित योरबाल्टक का ऐतिहासिक चट्टानी शिलालेख भी अब संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल हो गया है. यह स्थल लद्दाख की प्राचीन शिलालेख परंपरा, चट्टानी कला, धार्मिक इतिहास और सांस्कृतिक विकास का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है. ये सभी स्मारक और पुरातात्विक स्थल मिलकर ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में सदियों से चले आ रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बौद्ध परंपराओं, व्यापारिक मार्गों, कला, स्थापत्य और मानव सभ्यता के विकास की कहानी बताते हैं. यही वजह है कि इन्हें लद्दाख की साझा सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
लद्दाख के प्रशासनिक सचिव का बयान
लद्दाख के अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के प्रशासनिक सचिव IAS संजीत रोड्रिग्स ने कहा कि यह अधिसूचना उन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था. उन्होंने कहा कि यह कदम लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की कि वे इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखें. उन्होंने कहा कि स्मारकों और चट्टानों पर अपने नाम, संदेश या किसी भी प्रकार की लिखावट करके उन्हें नुकसान न पहुंचाएं. उन्होंने जोर देकर कहा कि इन धरोहरों को सुरक्षित रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है.























