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Karnataka: मल्लिकार्जुन खरगे के अध्यक्ष बनने से कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस को कितना फायदा? राजनीतिक विश्लेषकों ने दी ये राय

Mallikarjun Kharge: मल्लिकार्जुन खरगे के कांग्रेस के अध्यक्ष बनने से उनके गृह राज्य कर्नाटक की जनता और राज्य के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को क्या फायदा होगा, बताया राजनीतिक विश्लेषकों ने.

Karnataka Congress: मल्लिकार्जुन खरगे के कांग्रेस का अध्यक्ष चुने जाने के बाद उनके गृह राज्य कर्नाटक में एक तरफ जनता की नई उम्मीद जगी है तो वहीं कर्नाटक कांग्रेस पर इसके राजनीतिक असर पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं. कांग्रेस को इस बदलाव के कारण उसका दलित वोट आधार मजबूत होने की भी उम्मीद है. राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि अनुभवी नेता खरगे की मध्यस्थता से राज्य में गुटों में बंटी पार्टी को एकजुट करने में मदद मिलेगी.

खरगे, जगजीवन राम के बाद कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले दूसरे दलित नेता हैं. कर्नाटक में आबादी का लगभग 24 प्रतिशत हिस्सा दलित समुदाय से संबंध रखता है और इस समुदाय के 100 से अधिक जातीय समूह हैं.

बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस का दलित आधार सिकुड़ गया है

पार्टी के कुछ अंदरूनी सूत्रों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, दलित समुदाय के बीच कांग्रेस का आधार पिछले कुछ वर्षों में सिकुड़ गया है. इसका एक कारण हाल के वर्षों में समुदाय के एक हिस्से का ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व और विकास के एजेंडे पर उनके जोर देने के कारण’’ बीजेपी की ओर आकर्षित होना है. साथ ही, दलितों के बीच आंतरिक आरक्षण को लेकर वामपंथी और दक्षिणपंथी समुदायों के बीच मतभेदों को सुलझाने में कांग्रेस की अक्षमता के कारण भी पार्टी ने वामपंथी दलितों का समर्थन खो दिया है.

दलित समुदाय के कई नेताओं में इस बात को लेकर नाराजगी है कि दलितों का लंबे समय तक समर्थन मिलने के बावजूद कांग्रेस ने किसी दलित को राज्य का मुख्यमंत्री नहीं बनाया. खरगे को भी दो बार मुख्यमंत्री बनने के बहुत करीब होने के बावजूद यह पद नहीं सौंपा गया.

राजनीतिक विश्लेषकों ने दी अपनी राय

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, खरगे दलित दक्षिणपंथी समुदाय से संबंध रखते हैं और ऐसे में मुख्य रूप से भाजपा का समर्थन कर रहे वामपंथी दलितों का समर्थन हासिल करने के लिए खरगे क्या कर सकते हैं, इस पर सबकी नजर है और इसी से तय होगा कि ये चीजें कांग्रेस के समर्थन में रहेंगी या उसके खिलाफ जाएंगी.

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के राजनीतिक विश्लेषक ए नारायण ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर, यह (खड़गे का अध्यक्ष बनना) कांग्रेस (कर्नाटक में) के लिए फायदेमंद है, लेकिन यह किस हद तक चुनावी या राजनीतिक पूंजी में बदल पाएगा, हमें नहीं पता और इस पर नजर रखनी होगी.’’

न्यायमूर्ति एजे सदाशिव जांच आयोग ने अनुसूचित जातियों (एससी) के बीच आरक्षण सुविधाओं के समान वितरण के तरीकों का अध्ययन किया था अैर उसने सभी 101 जातियों को चार समूहों में व्यापक रूप से पुनर्वर्गीकृत करके जातियों के बीच आंतरिक आरक्षण की सिफारिश की थी.

खरगे के अध्यक्ष बनने से कर्नाटक वासियों में है खुशी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद के पूर्व सभापति वी आर सुदर्शन ने कहा कि खरगे का कांग्रेस अध्यक्ष बनना कर्नाटक के लिए गर्व की बात है और यह राज्य में राजनीतिक और सामाजिक रूप से पार्टी को निश्चित रूप से मजबूत करेगा. खरगे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से कर्नाटक की आम जनता भी खुश है.

खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद, राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि क्या इससे पहले से विभाजित कांग्रेस की कर्नाटक इकाई में शक्ति का एक और केंद्र बन जाएगा. राज्य इकाई के अध्यक्ष डी के शिवकुमार और विधायक दल के नेता सिद्धरमैया के दो धड़ों को एकजुट करना खरगे की बड़ी जिम्मेदारी होगी.

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