विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली प्रोफेसर को जेएनयू प्रशासन ने पत्र भेजकर आगाह किया

नई दिल्ली: शैक्षणिक परिषद की बैठक को कथित रूप से बाधित करने के आपरोप में निलंबित छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लेने पर जेएनयू प्रशासन ने एक प्रोफेसर को पत्र जारी करते हुए आगाह किया है. प्रशासन ने प्रोफेसर से कहा है कि उनकी कार्रवाइयों के आधार पर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की प्रोफेसर निवेदिता मेनन को जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने पत्र भेजा जिसमें शैक्षणिक नियमों का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन नहीं करने की अपील की गई.
पत्र में लिखा गया, ‘‘विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.’’ पत्र में कहा गया कि प्रोफेसर निवेदिता ने गत 28 दिसंबर को शाम चार बजकर 15 मिनट पर प्रशासनिक खंड की सीढ़ियों के पास छात्रों के एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया जो विश्वविद्यालय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है.
रजिस्ट्रार द्वारा जारी किए गए एक सरकुलर में भी इसी नियम का हवाला देते हुए सभी शिक्षकों, छात्रों एवं कर्मचारियों को याद दिलाया गया कि प्रशासनिक इमारत के पास भूख हड़ताल, घेराव, विरोध प्रदर्शन, प्रदर्शन विश्वविद्यालय के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और उनसे नियमों, विधियों आदि का पालन करने का अनुरोध किया गया.
हालांकि प्रोफेसर निवेदिता ने जेएनयू छात्र संघ द्वारा प्रशासनिक खंड के पास आयोजित एक दूसरी विरोध प्रदर्शन सभा में हिस्सा लिया.
निवेदिता ने कहा, ‘‘वे (जेएनयू प्रशासन) अब शिक्षकों को निशाना बना रहे हैं. मुझे पत्र मिला और मैंने जेएनयूएसयू कार्यक्रम में हिस्सा लिया एवं वहां बोला तथा बोलना जारी रखूंगी. दस और शिक्षक थे जिन्होंने वहां बोला और हम बोलना जारी रखेंगे. इस तरह की चीजों को स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता.’’
Source: IOCL

























