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तीनों सेनाओं में 11 हजार से ज्यादा ऑफिसर की कमी, मेजर-फ्लाइट लेफ्टिनेंट से लेकर ये पद हैं खाली

Indian Armed Forces: अधिकारियों की भर्ती का एक माध्यम SSC है, जहां कैडेट 11 महीने की ट्रेनिंग के बाद अधिकारी बनते हैं और 10 से 14 साल के निश्चित कार्यकाल के लिए बलों में सेवा करते हैं.

Indian Armed Forces: भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना में 11 हजार से अधिक ऑफिसर की कमी है. खाली पड़े इन पदों में आधे से अधिक इंडियन आर्मी से संबंधित हैं. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सेना में मेजर और कैप्टन जैसे रैंक के अधिकारियों की कमी है. भारतीय वायु सेना में स्क्वाड्रन लीडर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट जैसे महत्वपूर्ण अधिकारियों की कमी है. इसी तरह भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट कमांडर रैंक के अधिकारियों समेत अन्य कई अधिकारियों की कमी है. तीनों सेनाओं में कुल 11,266 अधिकारियों की कमी है. खाली पड़े इन पदों को लेकर रक्षा मंत्रालय का कहना है कि कोविड महामारी के दौरान अधिकारियों की कम भर्ती हुई थी. 

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक कोरोना काल में अधिकारियों की कम भर्ती होना भी भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना में मेजर और कैप्टन और समकक्ष और अन्य रैंक के अधिकारियों की कमी का एक बड़ा कारण है. रक्षा मंत्रालय ने इस संदर्भ में संसद को लिखित जानकारी में बताया कि भारतीय थल सेना में 68 सौ से अधिक अधिकारियों के पद खाली हैं. थल सेना में मेजर स्तर के 2,094 और कैप्टन स्तर के 4,734 अधिकारियों की कमी है. 

भारतीय वायुसेना में इतने पद हैं खाली
वहीं भारतीय वायुसेना की बात करें तो वायु सेना में 881 स्क्वाड्रन लीडर और 940 फ्लाइट लेफ्टिनेंट की कमी है. वायु सेना के लिहाज से अधिकारियों के यह पद बहुत महत्वपूर्ण है. थल सेना और वायु सेना की तरह नौसेना में भी अधिकारियों के पद रिक्त हैं.नौसेना में लेफ्टिनेंट कमांडर और उससे नीचे के रैंक के 2,617 अधिकारियों की कमी है.

रक्षा मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान अधिकारियों की कम भर्ती इस कमी का मुख्य कारण रहा है. रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट के मुताबिक तीनों सेनाओं वायु सेना, नौसेना और थलसेना में कोरोना के दौरान अधिकारियों की नियुक्ति पर प्रभाव पड़ा है.इसके अलावा रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 'शॉर्ट सर्विस कमीशन' (एसएससी) जैसे सहायक कैडरों में भी कम भर्ती होना भी अधिकारियों की इस कमी के लिए जिम्मेदार है. 

कैसे होती है अधिकारियों की भर्ती
गौरतलब है कि सेनाओं में अधिकारियों भर्ती कई माध्यम से की जाती है. उनमें से एक माध्यम एसएससी है, जहां कैडेट 11 महीने के प्रशिक्षण के बाद पास होकर अधिकारी बनते हैं और 10 से 14 साल के निश्चित कार्यकाल के लिए बलों में सेवा करते हैं. रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अधिकारियों की कमी को पाटने के लिए वह इन पदों पर अधिकारियों की पुन: नियुक्ति जैसी किसी वैकल्पिक रणनीति पर विचार नहीं कर रहा है, लेकिन सेना में 'शॉर्ट सर्विस' प्रविष्टि को और अधिक आकर्षक बनाने पर विचार किया जा रहा है. 

हालांकि इस सब के बीच एक सकारात्मक बात यह है कि रक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में महिला उम्मीदवारों की भर्ती वर्ष 2022 से शुरू कर चुका है. वर्ष 2022 से लेकर अब तक 57 महिला कैडेटों को एनडीए के माध्यम से भर्ती किया जा चुका है.एनडीए महिला कैडेट की संख्या में हरियाणा सबसे आगे है. 

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक एनडीए में महिला कैडेटों की सभी 57 रिक्तियों को पूरी तरह से सब्सक्राइब किया गया है.इनमें सबसे ज्यादा कुल 19 महिला कैडेट हरियाणा से हैं.हरियाणा के बाद दूसरा स्थान उत्तर प्रदेश का है. उत्तर प्रदेश से अभी तक कुल 12 महिला कैडेट की भर्ती हुई है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पंजाब से तीन-तीन व हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर से दो दो महिला कैडेट भर्ती हुई हैं. एनडीए के जरिए सेना में केरल से कुल 4 महिला कैडेट भर्ती हुई थी जिनमें से एक ने रिजाइन कर दिया. 

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