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Explained: भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सुधरना कितना मुमकिन? क्यों यह आसान काम नहीं रहा, इससे हमें क्या फायदा?

India Pakistan Peace Appeal: यह पत्र अभी कोई बड़ा बदलाव लाता नजर नहीं आ रहा. लेकिन दोनों देशों में शांति और बातचीत के समर्थक मौजूद हैं. सवाल यह है कि क्या दोनों सरकारें इसे गंभीरता से लेंगी या नहीं.

1 जुलाई 2026 की एक खबर ने पूरे दक्षिण एशिया का ध्यान खींचा, जिसमें भारत और पाकिस्तान की 117 जानी-मानी हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक जॉइंट लेटर लिखा. इस लेटर में दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल करने, कूटनीतिक रिश्ते बेहतर करने और आपसी दुश्मनी खत्म करने की अपील की गई है. लेकिन क्या भारत और पाकिस्तान के रिश्ते वाकई सुधर पाएंगे और क्या यह लेटर कोई ठोस बदलाव ला पाएगा...

यह लेटर किसने लिखा और क्यों लिखा?  

यह लेटर सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस (CPP) संस्था की पहल पर लिखा गया है, जिसके अध्यक्ष ओ.पी. शाह हैं. इस लेटर पर भारत की 61 और पाकिस्तान 56 बड़ी हस्तियों ने दस्तखत किए हैं.

भारत की ओर से हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं:

  • फारूक अब्दुल्ला: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व CM
  • महबूबा मुफ्ती: PDP चीफ और जम्मू-कश्मीर की पूर्व CM
  • मीरवाइज उमर फारूक: हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता
  • मनोज झा: राज्यसभा सांसद (RJD)
  • मणि शंकर अय्यर: पूर्व केंद्रीय मंत्री (कांग्रेस)
  • ए.एस. दुलत: पूर्व RAW चीफ
  • हुमायूं कबीर: AJUP के नेता

पाकिस्तान की ओर से हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं:

  • खुर्शीद महमूद कसूरी: पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री
  • अशरफ जहांगीर काजी: पूर्व राजदूत
  • इस्फनियार भंडारा: पाकिस्तानी विधायक
  • परवेज हूडभॉय: मशहूर न्यूक्लियर साइंटिस्ट

यह लेटर ऐसे वक्त लिखा गया है जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत नाजुक दौर से गुजर रहे हैं. इस लेटर में बॉर्डर खोलने, रिश्ते सुधारने, व्यापार बढ़ाने, वीजा जारी करने, करतारपुर कॉरिडोर खोलने और बस ट्रेवल शुरू करने जैसी 11 बड़ी मांगें हैं.

भारत-पाकिस्तान के रिश्ते मौजूदा दौर में कितने बिगड़े हैं?

दोनों देशों के रिश्ते 4 बड़ी वजह से बहुत बिगड़ चुके हैं:

  • पहलगाम हमला (22 अप्रैल 2025): जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 नागरिक मारे गए. भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया.
  • ऑपरेशन सिंदूर (7 मई 2025): इस हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया. भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए.
  • सिंधु जल संधि पर विवाद: इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया. पाकिस्तान ने इसे गंभीर मुद्दा बनाया और कहा, 'पानी को कभी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए.'
  • पूरी तरह ठप कूटनीति: 25 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री मोदी का लाहौर दौरा आखिरी उच्च-स्तरीय मुलाकात थी. 2 जनवरी 2016 के पठानकोट हमले के बाद से द्विपक्षीय वार्ता पूरी तरह बंद है.

क्या भारत-पाकिस्तान के रिश्ते पहले जैसे हो पाना मुमकिन है?

इस सवाल का जवाब सीधा नहीं है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रिश्तों के सामान्य होने की उम्मीद बहुत कम है. इसके पीछे कई बड़ी बाधाएँ हैं:

  • आतंकवाद का मुद्दा: भारत का साफ रुख है, 'आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते.' भारत ने साफ कह दिया है कि कोई भी बातचीत केवल आतंकवाद के मुद्दे पर ही होगी और कोई भी सुधार पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद खत्म करने पर निर्भर है.
  • भरोसे की कमी: दशकों की दुश्मनी और बार-बार हुए आतंकी हमलों ने भरोसे को पूरी तरह नष्ट कर दिया है.
  • दोनों देशों में कट्टरपंथी ताकतें: पाकिस्तान के अखबार डॉन के मुताबिक, 'एक समय पाकिस्तान में हार्ड राइट भारत के साथ जनरलाइजेशन के खिलाफ था. आज भारतीय व्यवस्था में कट्टरपंथी तत्व पाकिस्तान के साथ दोस्ती के खिलाफ हैं.'
  • पहलगाम का जख्म ताजा: पहलगाम हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या द्विवेदी का कहना है, 'हमें पाकिस्तान की जरूरत नहीं है, पाकिस्तान को हमारी जरूरत है.'
  • बीजेपी का कड़ा रुख: बीजेपी नेता गौरव वल्लभ ने कहा, 'पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते' और चेतावनी दी, 'पाकिस्तान में जन्मे आतंकवाद को शांति के नाम पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.'
  • कांग्रेस का विरोध: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, 'पिछले 50 सालों में भारत ने जितनी भी बार पाकिस्तान से संपर्क साधा, हर बार आतंकी हमला हुआ.' उन्होंने कहा कि जो लोग पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या भूल गए हैं, वे कैसे जनरलाइजेशन की बात कर सकते हैं.

किन शर्तों पर बन सकती है बात?

अगर कभी बातचीत होती है, तो वह कुछ सख्त शर्तों पर ही हो सकती है:

  • आतंकवाद का खात्मा: भारत की पहली और सबसे बड़ी शर्त है, 'पाकिस्तान से आतंकवाद को बढ़ाना और ट्रेनिंग देना पूरी तरह बंद हो जाए.'
  • आतंकी ढांचे का खात्मा: सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए पाकिस्तान से अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी ढांचे को खत्म करने की ठोस कार्रवाई.
  • भरोसा बढ़ाने वाले कदम: कोई बड़ी बातचीत शुरू होने से पहले छोटे-छोटे भरोसा बढ़ाने वाले कदम उठाने होंगे.
  • सुरक्षा चिंताओं का समाधान: दोनों पक्षों की 'वैध सुरक्षा चिंताओं' को संबोधित करना होगा.

अगर बात बनती है तो भारत को क्या फायदा?

अगर किसी चमत्कार से बातचीत शुरू होती है और रिश्ते सुधरते हैं, तो भारत को कई फायदे हो सकते हैं:

  • अगर दोनों देशों में शांति बढ़ती है तो इससे पूरे साउथ एशिया को आर्थिक फायदा पहुंचेगा. व्यापार बढ़ेगा, सीमाएं खुलेंगी और दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिलेंगे.
  • अगर तनाव कम होगा, तो भारत को सीमा पर सुरक्षा पर कम खर्च करना पड़ेगा औऱ उश पैसे को विकास के कामों में लगाया जा सकेगा.
  • साउथ एशिया में शांति से चीन जैसी बड़े चुनौतीपूर्ण देशों का सामना करना आसान होगा.सिंधु जल संधि पर विवाद बातचीत के जरिए सुलझ सकता है.
  • भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि में सुधार होगा और वह क्षेत्रीय शांति का नेतृत्व करने वाले देश के रूप में देखा जाएगा.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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