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India-China Clash: क्या है ड्रैगन का फाइव फिंगर्स प्लान? अरुणाचल के तवांग में चीन की तरफ से उकसावा है इसकी बानगी

India-China Clash: भारत और चीनी सेना के बीच अरुणाचल प्रदेश में हुई झड़प 'फाइव फिंगर्स' प्लान के तहत हुई. आखिर 'फाइव फिंगर्स' प्लान क्या है, जिसको लेकर चाइना आए दिन घुसपैठ की कोशिश करता है.

India China Border Clash: भारत और चीन की सेनाओं के बीच 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तंवाग सेक्टर में हुई झड़प में हिंदुस्तानी आर्मी ने कड़ा जवाब दिया है. दुनिया को अपनी अंगुलियों पर नाचाने की सोच रखने वाला चालबाज चीन जब भी भारत की तरफ आंख तरेरता है तो उसे मुंह की ही खानी पड़ती है. 

चीन की सोच हमेशा कब्जाधारी की रही है. वो अपने पड़ोसियों की जमीनों को हथियाना चाहता है. नेपाल, भूटान, बांग्लादेश जैसे छोटे देशों को जहां चाइना कर्ज के जाल में फंसा रहा है तो भारत पर जोर आजमाइश के लिए चीन ने अपनी सेना को मोर्चे पर लगाया हुआ है, लेकिन हिंदुस्तान के सामने उसकी पीएलए हर मोर्चे पर फेल है. 

चीन का 'फाइव फिंगर्स' प्लान क्या है? 

तिब्बत पर अवैध कब्जे के बाद से ही चीन ने अपने 'फाइव फिंगर्स' प्लान को एक्टिव किया हुआ है. इसके तहत चीन सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, भूटान, नेपाल और लद्दाख को किसी भी कीमत पर कब्जाना चाहता है. ऐसे में गलवान के बाद तवांग में पीएलए की गुस्ताखी ने ये साबित भी कर दिया है. दरअसल माओ ने इन पांचों जगहों को अपने हाथ की पांच अंगुलियां और तिब्बत को हथेली बताया था.

'फाइव फिंगर्स' पर कब्जे का राग अलपाना

रक्षा विशेषज्ञ कर्नल(रिटा.) दानवीर सिंह ने बताया कि साल 1940 के दशक में लाल क्रांति के बाद चीन में माओ सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे थे. माओ का ही मानना था कि तिब्बत और उससे जुड़े इलाके चीनी साम्राज्य का हिस्सा रहे हैं इसलिए इन इलाकों को किसी भी कीमत पर हासिल करना है. विवादित नीति में तिब्बत को 5 फिंगर पॉलिसी की हथेली बताया था और इसी हथेली पर 1959 से चीन ने अवैध कब्जा कर रखा है.

इस नीति की आड़ में चीन पांचों जगहों पर कब्जा कर हिमालय में एकक्षत्र राज कायम करना चाहता है. इस कारण चीन विस्तारवादी एजेंडे के तहत ‘फाइव फिंगर्स ऑफ तिब्बत स्ट्रैटजी’ में पड़ोसी देशों पर कब्जा करने की साजिश पर विशेष फोकस करता रहा है

'फाइव फिंगर्स का मामला क्या है?

आपको बता दें कि पांच अंगुलियों में सिक्किम का भारत में 1975 में विलय हो गया था. तब चीन ने जमकर इसका विरोध किया था, लेकिन उसकी एक नहीं चली. चीन दूसरी अंगुली अरुणाचल प्रदेश को बताता है. साल 1962 में जब भारत-चीन का युद्ध हुआ तो चीन की सेना काफी अंदर तक घुस आईं लेकिन उसके मंसूबे पूरे नहीं हो पाए.

चीन की कब्जाधारी नीति में तीसरी अंगुली नेपाल को बताया गया है. हालांकि हाल फिलहाल की घटनाओं को देखकर यह ही लगता है कि नेपाल चीन की गोद में बैठ गया है. चौथी अंगुली भूटान पर भी चीन कब्जे की मंशा पाले हुए है. पांचवी फिंगर जिस पर चीन की सबसे ज्यादा निगाह रहती, वो लद्दाख है, लेकिन चीन कितनी भी साजिशें रचे,  उसका ये सपना अधूरा ही रहने वाला है.

यह भी पढ़ें- Indian Air Force: तवांग झड़प के बाद वायुसेना चौकस, लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ाई, ईस्टर्न सेक्टर में किया जाएगा अभ्यास

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