‘भारत सिर्फ भूगोल नहीं, जिम्मेदारी है’, IIT रुड़की में छात्रों को सक्सेस मंत्रा दे गए सीडीएस
आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने छात्रों से बदलती तकनीक और दुनिया की चुनौतियों के लिए लगातार खुद को तैयार करने की अपील की.

आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बदलती दुनिया और भविष्य की चुनौतियों को लेकर छात्रों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भूगोल नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे पिछली पीढ़ियों ने निभाया है और अब नई पीढ़ी को इसे आगे ले जाना है. उन्होंने छात्रों से बदलती तकनीक के साथ खुद को लगातार सीखने, समस्याओं का समाधान करने और देश की जरूरतों के लिए कुछ नया करने की अपील की.
‘भारत भूगोल नहीं, जिम्मेदारी है’
जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कहा, "भारत कोई भूगोल नहीं है. यह एक जिम्मेदारी है, जिसे आपसे पहले की पीढ़ियों ने निभाया है और दुनिया में आगे बढ़ते हुए अब आपको भी इसे निभाना है."
उन्होंने कहा कि वह बदलती दुनिया के बारे में बात करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने ‘DHARA’ शब्द का इस्तेमाल किया. उन्होंने बताया कि इसमें D का मतलब डिसरप्टिव यानी तेजी से बदलाव लाने वाला, H का मतलब हाईपर-कनेक्टेडनेस यानी अत्यधिक जुड़ाव, A का मतलब असिमट्री यानी असमानता, R का मतलब रीअलाइनमेंट यानी पुनर्संरेखण और A का मतलब ऑटोनॉमी यानी स्वायत्तता है.
#WATCH | Roorkee, Uttarakhand: At the IIT Roorkee Convocation, Chief of Defence Staff (CDS), General N.S. Raja Subramani says, "Bharat is not a geography. It is a responsibility which generations before you have carried, and you will carry as you navigate this world. I want to… pic.twitter.com/7tAm8RuLN7
— ANI (@ANI) September 19, 2026
सीखना-भूलना और फिर सीखना जरूरी
CDS ने कहा कि दुनिया में बहुत बड़े स्तर पर बदलाव हो रहे हैं. तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि उसके साथ कदम मिलाना चुनौती बन गया है. उन्होंने कहा कि स्नातक छात्रों को बदलती दुनिया के साथ बने रहने के लिए लगातार सीखते रहना होगा.
उन्होंने कहा, "आपको सीखना होगा, सीखी हुई चीजों को जरूरत के अनुसार भूलना होगा, फिर से सीखना होगा, खुद को ढालना होगा और हमेशा जिज्ञासु बने रहना होगा. तभी आप बदलती दुनिया के साथ कदम मिला पाएंगे."
हाइपर-कनेक्टेड दुनिया में खतरे भी
जनरल सुब्रमणि ने कहा कि आज दुनिया सिर्फ व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया के जरिए ही एक-दूसरे से नहीं जुड़ी है. वित्तीय व्यवस्थाएं, एयरलाइंस, नेटवर्क और ऊर्जा प्रणालियां भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं.
उन्होंने कहा कि यह आपसी जुड़ाव अपने साथ कमजोरियां और जोखिम भी लेकर आता है. भविष्य के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को ऐसी प्रणालियां विकसित करनी होंगी, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी मजबूती से काम कर सकें.
‘मुश्किलों के सामने डटे रहें, समस्याओं का समाधान करें’
CDS ने छात्रों से आने वाली चुनौतियों का सामना मजबूती और धैर्य के साथ करने को कहा. उन्होंने कहा कि छात्रों को समस्याओं का समाधान करने वाला बनना चाहिए, समस्याएं पैदा करने वाला नहीं.
उन्होंने कहा, "स्नातक के रूप में आपको अपने सामने आने वाली बाधाओं का सामना करने के लिए दृढ़ रहना होगा. समस्याओं को हल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहें. समस्या पैदा करने वाले नहीं, बल्कि समस्या का समाधान करने वाले बनें."
‘कुछ बनाइए, देश की जरूरतों के लिए दिमाग का इस्तेमाल करें’
जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने छात्रों से अपने ज्ञान और सोच का इस्तेमाल देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए करने की अपील की. उन्होंने कहा कि केवल शिकायत करने से बदलाव नहीं आता, बल्कि इसके लिए पहल करनी होती है.
उन्होंने कहा, कुछ बनाइए. अपने दिमाग का इस्तेमाल देश की जरूरतों को आगे बढ़ाने के लिए कीजिए. हम सभी शिकायत कर सकते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो कुछ करने की पहल करते हैं. काम करने वाले बनिए और समस्याओं का समाधान करने वाले बनिए.
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